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23 नवंबर, 2020|1:47|IST

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सूरत की साड़ी की बदायूं में जरी बदलती सीरत


सूरत की साड़ी की बदायूं में जरी बदलती सीरत

सूरत की साड़ी और बदायूं में उस पर जरी का काम। साड़ी पर जरी के काम को देख सऊदी के शेख दीवाने हैं। एक जनपद एक उप्ताद में बदायूं के इस हुनर के देश ही नहीं विदेशों में भी लोग खासकर महिलायें कायल हैं। कंप्यूटर की डिजायन न किसी की नकल, दिमाग में उतारी गयी ऐसी डिजायन में जरी की साड़ियां तैयार की जा रही हैं। यह कार्य जनपद के शेखूपुर में किया जा रहा है।

एक जनपद एक उत्पादत के तहत बदायूं जिले के कारीगरों के हुनर के लिये बढ़ावा मिला है। शहर से सटे हुये कस्बा शेखूपुर में करीब दो हजार जिले में 8 हजार कारीगर जरी जरदोजी का कार्य करते हैं। यहां पर सूट, साड़ियां, लहंगा और दुप्पटे दबका, नक्सी, जरकन, कटदाना, मोती, चांदला, रेशम, सितारे से तैयार किये जाते हैं। यहां के कारीगरों की विशेषता यह है कि डिजायन किसी के द्वारा दी गयी इस्तेमाल नहीं करते हैं, न ही कंप्यूटर से डिजायन लेते हैं, बल्कि खुद के दिमाग से डिजायन तैयार जारजट के कपड़े पर कलाकारी दिखाते हैं।

इस कार्य में अधिकांश कारीगर साकिब खान की देखरेख में लगे हुये हैं, जो कि साड़ियों को तैयार करने के बाद जयपुर सप्लाई करते हैं। यहां से बदायूं के शेखूपुर की बनी साड़ियां दुबई, सऊदी, न्यूजीलैंड तक जाती हैं। साकिब ने बताया कि कोरोना काल में काम को झटका लग गया था। लेकिन अब फिर से काम को गति मिल रही हैं। पहले जैसी बात नहीं हैं, फिर भी अब बाहर से जरी की साड़ियों की डिमांड आ रही है।

पांच से 25 हजार तक की साड़ी : शेखूपुर के कारीगरों के हाथों की बनी बढ़िया साढ़ी पांच से 25 हजार रुपये तक की बिक जाती है। पांच हजार रुपये वाली साड़ी में खर्चा निकालकर एक हजार रुपये बच जाते हैं। 10 हजार वाली में करीब 2500 की बचत होती है। 25 हजार रुपये वाली साड़ी पांच हजार रुपये तक लागत के बाद छोड़ देती है। इस साड़ी को तैयार करने में तीन कारीगरों को 14 दिन का वक्त लगता है।

जयपुर से आता है कच्चा माल

शेखूपुर के कारीगर सूरत से लेकर जयपुर तक से कच्चा माल लेकर आते हैं, यहां से माल कुछ सस्ता पड़ जाता है। अगर स्थानीय स्तर पर माल लेना होता है तो बरेली से भी कारीगर कच्चा माल ले आते हैं। कोरोना काल के बाद जरूर कच्चा माल मिलने में दिक्कत आ रही है।

सरकार के मेलों में रहती हैं एडवांस मांग : शेखूपुर के राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त कारीगर साकिब की बनी साड़ियों की मांग सरकार द्वारा लगवाये जाने वाले मेलों में रहती हैं। उनके द्वारा एक जनपद एक उत्पाद के तहत बनारस, प्रयागराज, लखनऊ मेले में दुकान लगायी जा चुकी है। लखनऊ में राज्यपाल और सीएम ने खुद डेमो कराकर देखा था।

कारीगरों ने खोला रोजगार का द्वार : जरी के काम में लगे कारीगर शेखूपुर की अन्य महिलाओं को युवतियों को घर बैठे रोजगार मुहैया करा रहे हैं। महिलाओं और युवतियों से काम लेने के बदले दिन भर के 250 से 300 रुपये दिये जाते हैं। शेखूपुर की करीब 800 महिलाओं को इस प्रकार रोजगार मिल रहा है।

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  • Web Title:Zari changing in Surat 39 s sari in Badaun