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जीव यहां पर खरीदार है, अजब है यह दुनियां बाजार

जीव यहां पर खरीदार है, अजब है यह दुनियां बाजार

केबी हिंदी साहित्य समिति की 53वीं मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन नगर के आरके इंटरनेशनल स्कूल में किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता राम सेवक शर्मा ने की।

मुख्य अथिति सुग्रीव वाष्र्णेय ,विशिष्ट अथिति हरस्वरूप शर्मा रहे। संचालन विजयं कुमार सक्सेना ने किया। शुभारंभ मंचासीन अथितियों एवं संस्थाध्यक्ष डॉ. सतीश चंद्र शर्मा द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। डॉ. सुधांशु ने वाणी वंदना यूं की- स्वीकारिए स्वीकारिए मां शारदे वंदन मेरा।

शांति स्वरूप सुमन ने कहा-जीव यहां पर खरीदार है ईश्वर साहूकार। अजब है यह दुनियां बाजार। विजय कुमार सक्सेना ने कहा-भक्त बढ़े भक्ति घटी,हुआ धर्म का नाश।

फैशन बन कर रह गए, रोजे और उपवास। 7 वर्षीय रुद्रांश ने कविता सुनाई- आ जा चिड़िया,आ जा चिड़िया पी जा पानी खा जा चिड़िया। इस अवसर पर देव रत्न वाष्र्णेय ,सुधीर कुमार शर्मा,आशीष शर्मा,आशुतोष शर्मा आदि उपस्थित रहे।

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  • Web Title:The creature here is the buyer it is strange that this world market