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3 जून, 2020|7:26|IST

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Exclusive : लॉकडाउन में दिवंगतों की अस्थियों को है गंगा में विसर्जन की प्रतीक्षा 

the ashes of the disabled in lockdown await immersion in the ganges

 लॉकडाउन ने पूरे जनजीवन को तो प्रभावित कर ही दिया है। वहीं जो लोग आज हमारे बीच नहीं रहे हैं उन लोगों को भी कोरोना ने प्रभावित कर रखा है। जी हां, सुनने में ये बात थोड़ी अजीब जरूर लगेगी पर यह सच है। लॉकडाउन के चलते वे मोक्ष को प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। उनके परिजनों की लाख कोशिशों के बाद भी अपनों की अस्थियों का विसर्जन नहीं कर पा रहे हैं। अब उन्हें बस लॉकडाउन खुलने का इंतजार है।

सनातन धर्म में है बड़ी महत्ता

सनातन धर्म में मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार का बड़ा महत्व होता है। इसके बाद अस्थियों को गंगा या यमुना में विसर्जित किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि अस्थियों का विसर्जन मृतक की आत्मा को मोक्ष दिलाने के लिए किया जाता है, लेकिन लॉकडाउन के दौरान मरने वाले लोगों की अस्थियों को मोक्ष का इंतजार है।

लॉकडाउन के बीच कई लोगों की हुई मृत्यु

लॉकडाउन के दौरान अब तक शहर से लेकर देहात तक काफी संख्या में लोगों की मृत्यु हो चुकी है। उनकी अस्थियों का विसर्जन किया जाना है लेकिन, लॉकडाउन के चलते परिजनों को अस्थि विसर्जन के लिए जाने की अनुमति नहीं मिल रही है। जिले से अधिकांश लोग कछला, हरिद्वार में गंगा नदी में अस्थि विसर्जन के लिए जाते हैं। 

अलमारी में बंद है अस्थियां

शहर में अस्थियों को सुरक्षित रखने के लिए पंजाबी चौक स्थित गुरुद्वारा व रघुनाथ मंदिर में व्यवस्था है। यहां पर एक अलमारी सिर्फ अस्थियों को सुरक्षित रखने के लिए स्थापित की गई है। जिसमें मृतक के परिवार के लोग आकर अस्थियों को रख देते हैं व कुछ ही दिनों में विसर्जन करने के लिए ले जाते हैं। लॉकडाउन के दौरान भी यहां पर कई अस्थियों को रखा गया है। 

लॉकडाउन के चलते कुछ अस्थियां अलमारी में रखी हुई हैं। जिन्हें विसर्जित नहीं किया जा सका है। उनके परिवार वाले लॉकडाउन खुलने का इंतजार कर रहे हैं। जब तक लॉकडाउन नहीं खुलता तब तक अस्थियां सुरक्षित अलमारी में ही रहेंगी।

गुरदीप सिंह, महासचिव गुरुद्वारा साहिब

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