Badaun News: तीन घंटे थाने में पिता-पुत्र से होती रही पूछताछ, इंस्पेक्टर को भनक भी नहीं
Badaun News: तीन घंटे थाने में पिता-पुत्र से होती रही पूछताछ, इंस्पेक्टर को भनक भी नहीं तीन घंटे थाने में पिता-पुत्र से होती रही पूछताछ, इंस्पेक्टर को भनक भी नहीं

Badaun News: जरीफनगर थाने में तैनात पुलिस यूं ही बेलगाम नहीं हुई। उसके पीछे थाना प्रभारी की कार्यशैली भी कहीं न कहीं जिम्मेदार है। हैरत की बात तो यह है कि थाने का पूरा सिस्टम चलाने वाला ऑपरेटर थाने की आइडी पासवर्ड को लीक कर वसूली कराता रहता है, लेकिन वह शिकायत से पहले पकड़ में नहीं आता है। इसी तरह से थाने की ही चौकी का प्रभारी दूसरे हल्के में बिना रवानगी, बिना अफसरों को सूचना दिए सादा वर्दी में तीन पिता-पुत्रों को मनमाने तरीके से पकड़कर ले आता है और उनको तीन घंटे तक थाने में बैठाए रखता है। ऐसे में इंस्पेक्टर को इस बात की भनक न हो, यह बात किसी के गले से नहीं उतर रही है। हालांकि अब जांच बड़े स्तर पर चल रही है इसलिए इंस्पेक्टर बाबूराम गौतम सवालों के घेरे में हैं। फर्जी दबिश देने और बेवजह पिता-पुत्रों को पकड़कर थाने लाने के मामले में चौकी प्रभारी और उनकी टीम पर कार्रवाई के बाद इंस्पेक्टर की भूमिका की भी जांच हो रही है।
थाने के भीतर का घटनाक्रम
बीते दिनों बस्तोई सीकरी के तत्कालीन चौकी प्रभारी मनीष भारद्वाज चार सिपाहियों सुरजीत सिंह, लोकेश, हरीश और संदीप के साथ निजी गाड़ी से दियोहरा शेखपुर पहुंचे। आरोप है कि संभल के जुनावई थाना क्षेत्र के फतेहपुर निवासी अमन के इशारे पर चौकी प्रभारी ने फर्जी तरीके से अपनी एसओजी टीम बनाकर मादक पदार्थ से जुड़ी सूचना के नाम पर उदय प्रकाश, उनके भाई अमरीश और पिता कृपाल को घर से उठाया गया था। टीम ने तलाशी ली, लेकिन तीनों के पास से किसी भी तरह की आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली।
अवैध गिरफ्तारी की प्रक्रिया
इसके बाद तीनों को जरीफनगर थाने लाया गया। आरोप है कि थाने के पीछे से दीवार फांदकर उन्हें अंदर कराया गया था। दरोगा तीनों को लेकर थाने पहुंचा, मगर न आमद दर्ज कराई और इससे पहले न रवानगी। अब सवाल थाना प्रभारी इंस्पेक्टर बाबूराम गौतम की निगरानी की करें तो तीन लोग थाने लाए गए और उनसे थाने में अलग-अलग जगहों पर बैठाकर बेवजह की पूछताछ और परेशान किया गया। मगर, थाना प्रभारी इस मामले से पूरी तरह अंजान बने रहे। हालांकि मामला उजागर होने के बाद चौकी प्रभारी और उनकी टीम को निलंबित किया गया, लेकिन थाना प्रभारी की भूमिका की जांच भी जरूरी बताई जा रही है।
जांच और सवाल
सवाल है कि इतने घंटे तक थाने के अंदर घटनाक्रम होता रहा और इंस्पेक्टर को यह भी नहीं पता कि कौन दरोगा, उन लोगों को पकड़कर किस जुर्म में लाए हैं। थाने से दूरी पर मौजूद चौकी प्रभारी और उसकी पूरी टीम बिना किसी घटना की सूचना के एक साथ थाने के अंदर क्यों इधर से उधर पिता-पुत्रों से पूछताछ करती रही। ऐसे में कैसे संभव हो सकता है कि इस प्रकरण की जानकारी इंस्पेक्टर को न हो। फिलहाल विभागीय जांच में उनकी भूमिका भी सामने आएगी, फिलहाल जांच किस स्तर से की जा रही है और किस अधिकारी को सौंपी गई है यह अभी तक स्पष्ट नहीं है।


