
शहर में पकड़ा नकली कॉल सेंटर, साइबर ठगी का भंडाफोड़
Badaun News - बदायूं में पुलिस ने कॉल सेंटर के जरिए लोगों से नौकरी दिलाने का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया। गिरोह के मास्टरमाइंड समेत चार युवतियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि दो आरोपी फरार हैं। ठग अपने असली नामों के बजाय फर्जी नामों का उपयोग करते थे।
बदायूं, संवाददाता। कॉल सेंटर के जरिये लोगों को बैंक और फाइनेंस कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। मास्टरमाइंड समेत चार युवतियों को गिरफ्तार किया गया। गिरोह के दो ठग फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस टीमें जुटी हैं। जांच में ये भी पता चला है कि आरोपी लोगों से बात करने के दौरान अपना असली नाम नहीं बताते, बल्कि फर्जी नाम का इस्तेमाल करते थे। एसपी सिटी विजयेंद्र द्विवेदी ने पुलिस लाइन सभागार में खुलासा करते हुए बताया, साइबर क्राइम थाने में 30 दिसंबर को उपनिरीक्षक रजत यादव ने प्रबंध पोर्टल पर संदिग्ध मोबाइल नंबर की जांच के दौरान पांच ठगी की शिकायतें पाईं।
उन्होंने मुकदमा दर्ज कर नंबर ट्रेस किया तो लोकेशन नई सराय कोतवाली सदर क्षेत्र में मिली। साइबर क्राइम थाना प्रभारी विनोद कुमार वर्धन पुलिस टीम के साथ लोकेशन पॉइंट पर पहुंचे और गली में बने मकान का दरवाजा खुलवाया, जहां एक छोटे कमरे में फर्जी कॉल सेंटर बना मिला। इसमें तीन युवतियां और एक युवक काम कर रहे थे। युवक लैपटॉप पर काम कर रहा था, जबकि महिलाएं मोबाइल पर बात कर रही थीं। पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर चारों को पकड़ लिया, उनकी निशानदेही पर अन्य युवती को भी गिरफ्तार किया । गिरफ्तार साइबर ठगी के मास्टरमाइंड विवेक पुत्र सुरेश निवासी गोविंद नगला थाना मूसाझाग, आकांक्षा पटेल पुत्री विजेंद्र सिंह निवासी बरातेगदार सिविल लाइंस, अंशु पटेल पुत्री दीपक सिंह निवासी लखनपुर सिविल लाइंस, ईशा साहू पुत्री प्रेम शंकर निवासी नगर पंचायत गुलड़िया थाना मूसाझाग और मीनाक्षी पुत्री राजकुमार सिंह निवासी बरायमय खेड़ा कोतवाली उझानी हैं। उन्होंने बताया कि वह वर्क इंडिया साइट पर यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश के लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर किसी अन्य खाते में पैसे ट्रांसफर करवा कर साइबर ठगी करते थे। शिकायत में चार लाख 50 हजार रुपए की ठगी की है। 10 एनसीआरपी शिकायतें दर्ज हैं। ये उपकरण हुए बरामद लैपटॉप, प्रिंटर, माउस, लैपटॉप चार्जर, सात मोबाइल फोन, चार मोबाइल कीपैड, सात मोबाइल चार्जर, 23 सिम कार्ड, एचडीएफसी बैंक मुंबई की मोहर, एक हाजिरी रजिस्टर, चार कापी और किरायनामा की एक फोटोकॉपी शामिल है। यह सभी सामग्री गिरोह द्वारा लोगों को ठगी करने के लिए इस्तेमाल की जा रही थी और पुलिस ने इसे कब्जे में ले लिया है। वर्चुअल नाम का इस्तेमाल करते थे ठग गिरफ्तार अभियुक्तगण अपने असली नामों के अलावा लोगों से बात करने में अलग-अलग वर्चुअल नाम का इस्तेमाल करते थे। मास्टरमाइंड विवेक ने खुद को राजीव बताकर ठगी की। आकांक्षा पटेल और अंशू पटेल ने लोगों से रिया शर्मा बनकर संपर्क किया। ईशा साहू ने नाव्या शर्मा और कृतिका शर्मा बनाकर बात की। मीनाक्षी ने निधि शर्मा का नाम अपनाकर लोगों को ठगी का झांसा दिया। कुल मिलाकर पांच अभियुक्त अपने असली नाम के अलावा इन वर्चुअल नामों से कॉल सेंटर के जरिये साइबर ठगी को अंजाम दे रहे थे। दो आरोपी फरार ठगी में दो आरोपी अभी फरार हैं। हेमपाल उर्फ टिंकू मौर्य और सलीम उर्फ अबलू घटना के बाद से पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। दोनों आरोपी कॉल सेंटर के जरिये साइबर ठगी में शामिल थे। लोगों को नौकरी का झांसा देकर उनके खाते से रुपये ठग रहे थे। पुलिस ने उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। शहर में फर्जी कॉल सेंटर चलाकर लोगों से साइबर ठगी की जा रही थी। पुलिस ने मास्टरमाइंड और चार युवतियों को गिरफ्तार किया, जबकि दो आरोपी फरार हैं। जांच में पता चला कि सभी आरोपी अपनी असली पहचान छुपाकर कॉल करते थे। साइबर थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। विजयेंद्र द्विवेदी, एसपी सिटी

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