
मेला ककोड़ा से ग्रामीणों को मिलेगी सालभर की रोजी-रोटी
संक्षेप: Badaun News - रुहेलखंड का मिनीकुंभ मेला ककोड़ा पांच दिन चलता है, लेकिन इसकी तैयारी एक महीने पहले शुरू होती है। यह मेला आस्था का केंद्र है और स्थानीय गांवों के लोगों को छह महीने तक रोजगार देता है। मेले की तैयारियों में सड़कों और टेंटों का निर्माण चल रहा है, जिसमें हजारों लोग शामिल हैं।
रुहेलखंड के मिनीकुंभ मेला ककोड़ा वैसे तो पांच दिन चलता है लेकिन यहां तंबुओं के शहर को बसाने की तैयारी एक महीना पहले से शुरू होती हैं। आठ दिन बाद तक मेला स्थल पर रौनक रहती है। यह मेला ककोड़ा आस्था का केंद्र ही नहीं बल्कि मनोरंज का भी एक अच्छा स्थान है। यहां लोग परिवार के साथ आते हैं और गंगा नहाने के साथ ही मनोरंज भी करते हैं। लेकिन खास बात यह है कि हर वर्ष यह मेला स्थानीय गांवों की जनता को छह महीने तक की रोजी-रोटी का ठिकाना मिल जाता है। इस दौरान मेला ककोड़ा में टैंट और तंबू लगाने का काम तेज रफ्तार के साथ चल रहा है।

गुरुवार को गांगा की कटरी में जिला पंचायत द्वारा मेला ककोड़ा की तैयारियां तेज दिखीं। इस दौरान मेला स्थल पर हैंडपंप तथा टैंट लगाने का काम चल रहा है। वहीं अब मेला स्थल पर सड़कें तैयार की जा रही हैं। जिसमें मीना बाजार से लेकर गंगा तट छोटी-छोटी सड़कें बनाई जा रही हैं। इधर गंगा घाट के पास समतलीकरण किया जा रहा है। वहीं जिला पंचायत के ठेकेदार सिरकीर पोल की बाउंड्री लगवा रहे हैं। खास बात यह है कि जिला पंचायत के ठेकेदारों द्वारा मेला स्थल पर तमाम प्रकार की तैयारियां में कामकाज कराये जा रहे हैं। जिसमें आसपास के करीब दर्जनभर गांव के पांच सौ लोग मेला में काम कर रहे हैं। जिन्हें रोजगार मिल रहा है। जिससे इन ग्रामीणों के परिवार की रोजी-रोजी का ठिकाना शुरू हो गया है।

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