बेटे के शव लेने को पिता ने घर रखा गिरी फिर मांगी भीख

Dec 22, 2025 01:39 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बदायूं
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Badaun News - दातागंज, बरेली में एक व्यक्ति को अपने बेटे का शव नहीं दिया गया क्योंकि उसने अस्पताल का बिल नहीं चुकाया। बेटे के इलाज के लिए पिता ने अपने घर को गिरवी रखकर पैसे जुटाए, लेकिन फिर भी बिल का भुगतान नहीं कर पाने पर अस्पताल ने शव देने से इनकार कर दिया। अंततः पुलिस की मदद से शव सौंपा गया।

बेटे के शव लेने को पिता ने घर रखा गिरी फिर मांगी भीख

दातागंज, संवाददाता। बरेली के एक निजी अस्पताल में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। दातागंज निवासी युवक की उपचार के दौरान मौत के बाद बेटे का शव नहीं दिया गया। पिता का आरोप है कि वह इलाज का बिल नहीं चुका पाए तो अस्पताल प्रबंधन ने बेटे का शव देने से इंकार कर दिया। जिसके बाद उन्होंने गांव में अपना झोपड़ीनमा मकान गिरवी रखा, फिर भी रुपये नहीं हुये तो गांव और बरेली में भीख मांगी। पूरे रुपये न हो पाने पर पुलिस से मदद मांगी तब जाकर उसके बेटे का शव दिया गया। दातागंज तहसील के हजरतपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले ग्राम नगरिया खनू के श्यामलाल वाल्मीकि का इकलौता बेटा धर्मवीर 21 वर्ष बीते एक दिसंबर को बाइक से गांव जा रहा था।

बदायूं-दातागंज हाईवे पर मूसाझाग थाना क्षेत्र के अंतर्गत कर ने टक्कर मार दी जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। पुलिस ने पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से मेडिकल कालेज रेफर किया गया। पिता का आरोप है, गंभीर चोट होने के बाद भी मेडिकल कालेज में धर्मवीर वाल्मीकि का उपचार सही से नहीं किया गया, उसे अन्य जगह ले जाने की सलाह दी। घायल धर्मवीर के पिता श्यामलाल ने ग्रामीणों से रिश्तेदारों चंदा करके बरेली के एक अस्पताल में इलाज हेतु ले गये। जहां धर्मवीर को भर्ती कराया। बेटे को बचाने की गुहार ग्रामीणों से की तो ग्रामीणों ने चंदे में श्यामलाल को काफी धन दिया। श्यामलाल ने बताया उसके पास जो रुपये थे और चंदे में मिले जो मिले कुल मिलाकर तीन लाख रुपए अस्पताल में जमा कर दिया। 14 दिन तक इलाज चला और बिल बढ़कर छह लाख 10 हजार हो गया। दो दिन पहले उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। डॉक्टर ने 3.10 लाख रुपये जमा करने के लिए कहा। इस पर श्यामलाल ने कहा और रुपये नहीं होने की बात कही। इससे उलट अस्पताल प्रबंधन ने पिता को बेटे का शव देने के बदले अस्पताल का बकाया दो लाख 30 हजार रुपये और जमा करने की मांग की। श्यामलाल पर रुपया नहीं था, जिसके चलते अस्पताल प्रबंधन लाश नहीं दी।

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