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16 जनवरी, 2021|1:26|IST

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हिन्दुस्तान मिशन शक्ति : संघर्ष करो मंजिल तो मिल ही जायेगी

हिन्दुस्तान मिशन शक्ति : संघर्ष करो मंजिल तो मिल ही जायेगी

1 / 2जीवन में संघर्ष करना बहुत जरूरी है, बिना संघर्ष के कुछ भी नहीं है। संघर्ष करने पर मंजिल जरूर मिलती है, भले ही देर कितनी भी हो जाये। ये शब्द उन तीन...

हिन्दुस्तान मिशन शक्ति : संघर्ष करो मंजिल तो मिल ही जायेगी

2 / 2जीवन में संघर्ष करना बहुत जरूरी है, बिना संघर्ष के कुछ भी नहीं है। संघर्ष करने पर मंजिल जरूर मिलती है, भले ही देर कितनी भी हो जाये। ये शब्द उन तीन...

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जीवन में संघर्ष करना बहुत जरूरी है, बिना संघर्ष के कुछ भी नहीं है। संघर्ष करने पर मंजिल जरूर मिलती है, भले ही देर कितनी भी हो जाये। ये शब्द उन तीन महिला शक्तियों के थे जो कि संघर्ष के बल पर आगे बढ़ी हैं, तीनों महिला शक्ति आज संघर्ष के बल पर समाज के लिये प्रेरणा श्रोत बनी हैं।

हिन्दुस्तान मिशन शक्ति अभियान के तहत स्कूल संवाद कार्यक्रम गिंदो देवी कॉलेज में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्राचार्य डॉ. गार्गाी बुलबुल ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप जलाकर करायी। इसके बाद संबोधन का दौर शुरू हुआ। प्राचार्य ने अपने जीवन में किये गये संघर्ष की दास्तान सुनाते हुये छात्राओं को जीवन में आगे बढ़ने के लिये प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जीवन में अगर कोई कठिनाई आये तो उससे हिम्मत नहीं हाराना चाहिये, ब्लकि उसका मुकाबला करना चाहिये। ऐसा करने पर एक दिन मंजिल जरुर मिलेगी। शिक्षा ही मनुष्य को महान बनाती है। ऐसे में पढ़ाई का विशेष ध्यान रखना चाहिये। बेटियों की शिक्षा पर कहा कि बेटियों का शिक्षित होना बहुत जरूरी है, क्योंकि अगर बेटी शिक्षित होती है तो वह दो परिवारों को शिक्षित करने का काम करती है। पढ़ लिखकर जरूरी नहीं है कि नौकरी मिल जाये, एक श्रेष्ठ नागरिक का दर्जा पाने के लिये भी शिक्षित होना अनिवार्य है। कार्यक्रम के दौरान छात्रााओं ने ट्रेनरों से सवाल भी दागे। जिनका ट्रेनरों ने जवाब दिया। संचालन महेंद्र सिंह ने किया।

डॉ. सरला चक्रवर्ती,डॉ. इंदु शर्मा, डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी, डॉ. उमा सिंह, मुक्ता सक्सेना, ममता वर्मा, शिखा पाण्डे, डॉ.सोनी मौर्य, शुभी भसीन, निशा साहू, शिल्पी शर्मा, शिल्पी तोमर, प्रियंका, रिचा गुप्ता, छवि वैश्य, रूचि पटेल, गीता गाडगे, कमलेश, निधि गुप्ता मौजूद थे।

आत्मनिर्भर बनना बहुत जरूरी : संगीता : उच्च प्राथमिक विद्यालय आमगांव की इंचार्ज प्रधानाध्यापिका ट्रेनर संगीता ने स्कूल संवाद कार्यक्रम में छात्राओं को अपने जीवन में किये गये संघषों की कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि हाईस्कूल पास करने के बाद पढ़ाई पर ब्रेक लग गया था, घरवालों ने आगे पढ़ाने के लिये मना कर दिया, ऐसे में बड़ी दिक्कत महसूस होने लगी, मन में चिंता सताने लगी कि आगे की पढ़ाई कैसे करेंगे। हिम्मत नहीं हारी घर वालों को समझाया तो वह भी आगे की पढ़ाई के लिये राजी हो गये, तब जाकर इंटर किया इसके बाद उच्च शिक्षा ग्रहण कर शिक्षिका का पद हासिल किया। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ छात्राओं के लिये आत्मनिर्भर बनना भी बहुत जरूरी है। संगीता ने कहा कि लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ना चाहिये। कदम आगे बढ़ जायें तो फिर पीछने नहीं खींचना चाहिये। छात्राओं को कोई भी परेशानी हो तो वे हमें फोन पर बतायें, बड़ी बहन होने के नाते उसे दूर करेंगे, आगे बढ़ने में मदद करेंगे।

मां, बाप का भरोसा कभी न तोड़ें : नीतू : बदायूं। वन स्टॉप सेंटर केंद्र प्रशासक नीतू सिंह ने छात्राओं को कानूनी पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि अगर कोई शोषण करता है तो उसे सहन न करें, ब्लकि उसका विरोध करें। 181 पर शोषण से संबंधित शिकायत दर्ज करायी जा सकती है। 181 के बारे में बताते हुये नीतू सिंह ने खुद के संघर्ष से छात्राओं को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि 181 में कार्य करने के दौरान कई बार फैसले अपने पक्ष में कराने के लिये दबंगों की ओर से धमकियां मिली, लेकिन डरे नहीं, सच का साथ दिया। नीतू ने छात्राओं को मां, बाप का भरोसा कभी न तोड़ने के लिये कहा। उन्होंने अपना मोबाइल नंबर भी छात्राओं दिया और कहा कि कभी कोई दिक्कत आये तो कॉल करना बड़ी बहन की तरह मदद करूंगी।

हिम्मत नहीं हारना चाहिये कामयाबी मिलेगी : रजनी : बदायूं। दुगरैया की ट्रेनर रजनी अब तक के संघर्ष की दास्तान सुनाते-सुनाते भावुक हो गयी। रजनी ने अपने बारे में बताते हुये कहा कि बचपन में पिता का देहांत हो गया था। कक्षा पांच तक की पढ़ाई गांव में की। इसके बाद मां ने दाखिला शहर के एक स्कूल में कराया तो पड़ोसियों ने मां से शहर भेजने के लिये मना कर दिया। मां ने भी आगे की पढ़ाई कराने में असमर्थता जताई। ऐसे में बड़ी समस्या खड़ी हो गयी। रजनी ने बताया कि मां को समझाया और पढ़ाई के लिये तैयार कर लिया, तब उन्होंने आगे की पढ़ाई की अनुमति दी। आज मां की बदौलत ही एमए की तालीम हासिल करने का मौका मिला है। रजनी ने बताया कि पढ़ाई के दौरान आर्थिक समस्यायें भी आईं, उनका सामना स्कूल की पढ़ाई से बचने वाले समय में प्राइवेट नौकरी कर किया। रजनी ने कहा कभी हिम्मत नहीं हारना चाहिये।

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