179 आंगनबाड़ी कार्यकत्री को सेवा समाप्ति का चेतावनी नोटिस
Badaun News - बदायूं में गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए पोषाहार वितरण में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की लापरवाही सामने आई है। 179 कार्यकत्रियों को सेवा समाप्ति का नोटिस दिया गया है क्योंकि उनका पोषाहार वितरण 10 प्रतिशत से कम है। यदि कार्य में सुधार नहीं हुआ तो सेवा समाप्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

बदायूं, संवाददाता। गर्भवती/धात्री महिलाएं एवं शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों को सरकार पोषाहार दे रही है लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकत्री डिजिटल तरीके से वितरण करने में फेल हो गई हैं। सरकार ने वितरण के लिए पोषण ट्रैकर एप बना दिया है, जिसमें चेहरा प्रमाणीकरण कर वितरण किया जा रहा है। सरकार ने यह व्यवस्था इसलिए लागू की जिससे भ्रष्टाचार समाप्त हो जाये। मगर इसमें आंगनबाड़ी लापरवाही दिखा रही हैं। लापरवाहा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को सेवा समाप्ति का चेतावनी नोटिस दिया है वहीं बड़ी संख्या में कार्यकत्रियों का वेतन भी रोका है। गुरुवार को बाल विकास विभाग में पोषण ट्रैकर योजना के तहत चेहरा प्रमाणीकरण से पोषाहार वितरण की समीक्षा की गई।
जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रमोद कुमार की अध्यक्षता में समीक्षा की गई। जिसमें पता चला कि जनपद के सभी परियोजनाओं में गंभीर रूप से कम पोषाहार वितरण करने वाली कुल 179 आंगनबाड़ी हैं। इन 179 आंगनबाड़ी कार्यकत्री के विरूद्ध सेवा समाप्ति की कार्रवाई शुरू कर दी है। इनको सेवा समाप्ति का चेतावनी पत्र दिया है। अगर दो दिन में कार्य को पूरा नहीं करती हैं तो सेवा समाप्ति कर दी जायेगी। 179 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के पोषाहार का वितरण शून्य से 10 प्रतिशत है। इसको लेकर सेवा समाप्ति की नोटिस सीमा, ग्राम बिहारीपुर दातागंज, कमलेश ग्राम खुनक जगत, आरती कुमारी ग्राम लालूपुर नगरिया कादरचौक, प्राना देवीं ग्राम सेमरा बनवीरपुर सहसवान, परवीन सबदलपुर अंबियापुर सहित 179 को सेवा समाप्ति की चेतावनी नोटिस है। कुल 663 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का पोषाहार वितरण जनपद के औसत प्रतिशत 67 प्रतिशत से कम है, जिनका मानदेय रोकने का नोटिस दिया गया है। प्राप्त पोषाहार से कम पोषाहार वितरण करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से पोषाहार के मूल्य के बाराबर धन की वसूली की जाएगी और उनके विरूद्ध दण्डात्मक कार्रवाई भी प्रस्तावित की जा रही है। कुछ ब्लाकों पर जिनकी प्रगति लगातार कम है उसमें जगत 46 प्रतिशत, उसावां 57 प्रतिशत और बिसौली 59 प्रतिशत है। इससे बाल विकास विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां भी परेशान हैं कि काफी प्रयास के बाद भी इस कार्य को पूर्ण नहीं कर पा रही हैं।
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