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पांच बार के सांसद और जमानत जब्त

पांच बार के सांसद और जमानत जब्त

कमाल है लोकतंत्र का भी। जिस व्यक्ति को पांच बार सांसद बनाया इस बार उसकी जमानत ही जब्त करवा दी। शेरवानी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि इस चुनाव में बदायूं की जनता उन्हें पूरी तरह से नकार देगी।

जिस शहर में नेता अगर पांच बार सांसद या विधायक बन जाए तो उस नेता की विरासत कायम कर लेता है। मगर सलीम इकबाल शेरवानी एक ऐसे नेता निकले जो पांच बार के सांसद रहे और छठी बार चुनाव में जमानत भी नहीं बचा सके और 51 हजार वोट पा सके।देश के 50 रईशजादों में सुमार रखने वाले सलीम इकबाल शेरवानी की राजनीति शुरुआत राजीव गांधी ने इंदिरा गांधी के समय में कराई।

पहली बार सलीम इकबाल शेरवानी को कांग्रेस से 1984 में बदायूं से टिकट दिया और करीब 27 हजार 450 जीत हासिल की। इसके बाद वर्ष 1996 के चुनाव तक कासगंज और अन्य स्थानों से प्रत्याशी बनकर गए, लेकिन जीते कभी नहीं। शेरवानी ने जो जीत हासिल की वह बदायूं में ही की। 1996 के चुनाव में सलीम इकबाल शेरवानी ने सपा का दामन थामा और सांसद चुने गए।

इस चुनाव में सलीम शेरवानी की जीत करीब 17000 हजार वोटों से हुई। फिर चुनाव वर्ष 1998 में हुआ तो सपा की सीट पर शेरवानी दस हजार वोट से ही जीत हासिल कर पाए, वहीं अगला चुनाव वर्ष 1999 में चुनाव हुआ तो सलीम शेरवानी की जीत सबसे नीचे आकर 9000 हजार से ही हो पाई। इसके बाद वर्ष 2004 का चुनाव हुआ फिर से सपा ने ही सलीम शेरवानी को प्रत्याशी चुनाव इस चुनाव में जीत सिफ 15000 हजार से जीत हुई। जबकि उस दौर में भी बदायूं सपा का गढ़ था, लेकिन कभी 50 हजार के पार जीत नहीं ले जा पाए।

इधर, 2009 में जब सपा ने सलीम शेरवानी से सीट छीन ली और अपने भतीजे धर्मेंद्र यादव को दे दी, तब शेरवानी धर्मेंद्र के खिलाफ चुनाव लड़ने कांग्रेस से आ गए। उस दौर में पांच बार के सांसद रहने के बाद भी हार का मुंह देखना पड़ा और एक लाख 93 हजार 834 वोट मिल पाए। फिर 2014 के चुनाव में सलीम शेरवानी बदायूं छोड़ आंवला चले गए और सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने 1 लाख 66 हजार 347 से जीत हासिल की।

अब 2019 का चुनाव आया तो पांच बार के सांसद चुनाव तो लड़े, लेकिन उनका जन समर्थन काफी पीछे छूट गया। इस बार सलीम शेरवानी को 51 हजार 947 वोट ही मिल पाए। इससे साफ हो गया कि जिले की जनता या तो पांच बार के सांसद से दूरियां बना चुकी है और वोट देना नहीं चाहती। या फिर कांग्रेस के नाम पर जनता ने दूरियां बनाईं हैं। बरहाल जो व्यक्ति पांच बार बदायूं का सांसद रहा आज की स्थिति में काफी प्रयास के बाद पचास हजार वोटों पर सिमट रहा है। यह कांग्रेस और सलीम शेरवानी के लिए काफी चिंतनीय एवं सोचनीय सवाल है।

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  • Web Title: Five times MP and Bail seized