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यूरिया के लिए हाहाकार, रुहेलखंड में किसान घंटों कतार में खड़े होने को मजबूर


रुहेलखंड में किसान इस वजह से लंबी-लंबी लाइनें लगाने को हैं मजबूर

रुहेलखंड के जिलों बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर में यूरिया के लिए हाहाकार मचा हुआ है। किसान खेतों में काम करने की जगह खाद केंद्रों के सामने लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर है। इस समय धान की फसल को खाद की सख्त जरूरत है लेकिन यूरिया न मिल पाने से फसल खराब होने का संकट उत्पन्न हो गया है। चिंतित अन्नदाता के सामने बड़ा संकट खड़ा है। कई स्थानों पर महिलाएं भी चूल्हा-चौका छोड़कर यूरिया के लिए लाइनों में लगने को मजबूर हैं।

बदायूं में खाद के लिए सुबह से ही मारामारी

बदायूं। गुरुवार को दिन भर सुबह से शाम तक मंडी समिति स्थित इफको केंद्र पर मारामारी रही है, कई बार तो जमकर हंगामा हुआ और पुलिस जैसे-तैसे किसानों को संभाल पाई हैं, महिलाएं भी कई बार नाराज हो गईं। किसानों की मानें तो कुछ किसानों के लिए यूरिया का वितरण कर दिया और बाकी किसानों से कह दिया कि यूरिया खत्म हो गई। इसके चलते किसान आक्रोशित हो गए और जमकर हंगामा हुआ है। वहीं शहर के खेड़ा नवादा से लेकर दातागंज तिराहे तक यूरिया को लेकर प्राइवेट दुकानों पर भीड़ जुटी और लाइन लगानी पड़ी है। मगर दोपहर से पहले प्राइवेट दुकानों पर भी यूरिया खत्म हो गई। यही हालात गुरुवार को देहात क्षेत्रों में रहे हैं।

इसलिए धान के लिए जरूरी है यूरिया

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार धान की रोपाई के बाद पहली सिंचाई करते ही तीन से चार दिन में फसल को नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है। अगर समय पर नाइट्रोजन नहीं मिला तो फसल पीली होने लगती है। फसल की बढ़त प्रभावित हो जाती है। जो बाद में उपज को प्रभावित करती है।

क्योलड़िया में कालाबाजारी के सुबह पांच बजे ही बिकने लगी यूरिया

बरेली। गुरुवार को क्योलड़िया सोसायटी का ताला खोलकर तड़के अंधेरे में यूरिया कालाबाजारी होने लगी। पता चला तो किसान भी पहुंच गए । किसानों के अनुसार कुछ लोग जो गोदाम में पहले से ही घुसे हुए थे जो तांगा और छोटा हाथी से यूरिया के बोरे लादकर जाने लगे। इसपर भड़के किसान गोदाम में घुसकर हंगामा करने लगे। किसानों ने यूरिया की कालाबाजारी करने का आरोप लगाया। काफी देर हंगामा होता रहा मगर किसानों की कोई सुनने वाला नहीं था। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंच गई और लोगों को शांत कराया। पुलिस ने फिर से किसानों की लाइन लगवाई और यूरिया बंटवाई। किसानों का आरोप है कि यूरिया के हर कट्टे पर 200 से 300 रुपये अधिक लेकर सैकड़ों बोरी यूरिया बांटी गयी। लेकिन जब किसानों ने हगामा किया तो ताला डाल दिया गया। वहीं एसडीएम कमलेश कुमार का कहना है कि यूरिया खाद की किल्लत को लेकर समितियों के सचिवों को बुला कर बैठक की जाएगी। खाद की कालाबाजारी किसी भी हाल में नहीं होने दी जाएगी।

बंडा में यूरिया की कालाबाजारी में 3 पर रिपोर्ट दर्ज

बंडा। पुलिस ने अवैध रूप से बिक रही यूरिया समेत ट्रक को कब्जे में ले लिया। अधिकारियों ने जांच की तथा जिला कृषि अधिकारी ने व्यापारी समेत 3 लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट में बताया कि बुधवार को यूरिया की कालाबाजारी करते ट्रक संख्या यूपी 25 टी 8190 पर 20 बोरी यूरिया टेढ़ा पुल के पास बंडा में बरामद की गई। ट्रक पर 100 बैग उर्वरक पुवायां से लाकर 80 बैग की कालाबाजारी कर दी गई। शेष 20 बोरी ट्रक से मौके पर बरामद किया गया। इस यूरिया को बंडा के संगम कृषि रक्षा केंद्र का होना बताया गया।

 

पीलीभीत में जब भरपूर आ रही खाद तो क्यो परेशान हो रहे अन्नदाता

पीलीभीत। जिले में यूरिया का लक्ष्य 59 हजार 766 मीट्रिक टन है। इसमें सहकारिता का 33 हजार 880 और निजी क्षेत्र का 23 हजार 259 हैं। इसमें अब तक सहकारिता के लक्ष्य का 59 प्रतिशत यानी 19 हजार 922 मीट्रिक टन खाद आ चुकी है। वहीं निजी क्षेत्र को देते तो लक्ष्य का 90 प्रतिशत यूरिया आ चुकी है। यानी 21 हजार 50 मीट्रिक टन आ चुकी है। इसके बाद भी जिले में खाद की किल्लत इस कदर है कि किसानों में हाहाकार मचा हुआ है। यूरिया लेने के लिए किसान सुबह पांच बजे से ही समितियों पर खाद पाने के लिए खड़े हो जाते हैं तांकि उनका नंबर जल्द आए और उन्हें खाद मिले। जिला कृषि अधिकारी डा. विनोद कुमार यादव ने बताया खाद भरपूर है, कहीं कोई समस्या नहीं है। कुछ किसान अतरिक्त खाद खरीदकर स्टाक कर है, इसके चलते भीड़ कम नहीं हो पा रही।

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  • Web Title:Farmers are worried for urea