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विक्रेताओं को क्लीनचिट, खरीदारों पर स्टांप चोरी का मुकदमा

हिन्दुस्तान टीम,बदायूंPublished By: Newswrap
Thu, 29 Jul 2021 04:02 AM
विक्रेताओं को क्लीनचिट, खरीदारों पर स्टांप चोरी का मुकदमा

बदायूं। संवाददाता

श्रीकृष्ण धर्मशाला को बेचने के मामले में धर्मशाला पर प्रशासन द्वारा डाला गया ताला जल्द खुलेगा। प्रशासन की जांच पूरी हो गई है और श्रीकृष्ण धर्मशाला मामले में बिक्री करने वाले परिवार को क्लीनचिट दे दी है। जांच में साफ कहा कि संपत्ति अग्रवाल परिवार की है और उन्हें बेचने का अधिकार है, मगर प्रशासन ने उक्त संपत्ति को खरीदने वालों पर स्टांप चोरी करने के मुकदमा की संस्तुति की है।

बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार ने शहर की श्रीकृष्ण धर्मशाला के मामले की जांच पूरी कर दी और रिपोर्ट डीएम दीपा रंजन को सौंप दी है। सिटी मजिस्ट्रेट ने रजिस्ट्री कार्यालय, तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर जांच की। रिकार्ड खंगलवाकर जानकारी जुटायी, नगर पालिका से भी साक्ष्य लिये। जिसके बाद जांच रिपोर्ट डीएम को दी है।

सिटी मजिस्ट्रेट ने अपनी रिपोर्ट में अग्रवाल परिवार को क्लीनचिट दी है और खरीदारी करने वालों पर स्टांप चोरी के मामले में मुकदमा की संस्तुति की है। रिपोर्ट के अनुसार श्रीकृष्ण धर्मशाला के असली हकदार मदनलाल थे। उनकी स्मृति में बनायी गयी। मदनलाल दो ई भाई थे, उनके भाई का नाम रामप्रकाश अग्रवाल थे। मदनलाल के कोई संतान नहीं थी। उनके भाई रामप्रकाश के दो बेटे हैं। इनमें से एक बेटा विजय अग्रवाल हैं, उनको इस संपत्ति का मुक्तियारनामा किया गया था। इसलिये वे संपत्ति को बेचने के हकदार हो गये। प्रशासन ने निजी संपत्ति घोषित की है।

इन्होंने खरीदी संपत्ति

शहर की श्रीकृष्ण धर्मशाला बेचने के मामले में प्रशासन ने जांच की है। जांच के बाद साफ हुई है कि संपत्ति को बेचने का अधिकार रामप्रकाश अग्रवाल के बेटे को है। उन्होंने छह प्लाट के रूप में अलग अलग बैनामे सुरेंद्र पाल सिंह, अरुण कुमार, सुभाष दुआ, मनीष बत्रा आदि को विक्रय की है।

1359 तक का निकाला रिकार्ड

सिटी मजिस्ट्रेट की जांच के अनुसार धर्मशाला पब्लिक संपत्ति है और निजी कब्जा न हो और राज्य संपत्ति घोषित की जाये। इसको लेकर जांच की गयी थी। इस जांच को करने के लिये प्रशासन ने फसली वर्ष 1359 से अब तक का रिकार्ड निकलवाया है। जिसमें साफ हो गया कि अग्रवाल एंड संस परिवार की निजी संपत्ति है।

मदन लाल की स्मृति में बनी थी धर्मशाला

श्रीकृष्ण धर्मशाला का मामला ठंडा नहीं पड़ा है। सिटी मजिस्ट्रेट ने जांच कर रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। डीएम को सौंपी रिपोर्ट में एक मामला साफ हो गया है कि श्रीकृष्ण धर्मशाला रामप्रकाश अग्रवाल के भाई मदनलाल अग्रवाल की स्मृति में बनाई गयी थी। उनकी याद में बनी धर्मशाला लंबे समय तक सार्वजनिक कार्यक्रम होते रहे। इसलिये लोग सार्वजनिक संपत्ति मामने लगे थे, लेकिन उसके हकदार विजय अग्रवाल निकले।

एडीएम के न्यायालय में चलेगा मामला

श्रीकृष्ण धर्मशाला बिक्री के मामले में प्रशासन की जांच पूरी हो गयी है जिसमें साफ हुआ है कि खरीदारी करने वाला पक्ष ने गड़बड़ी की है। बिल्डिंग को प्लांट दिखाते हुये सुरेंद्र पाल, अरुण कुमार, सुभाष दुआ, मनीष बत्रा को बैनामा किया गया है। जिसमें खरीदारों ने सरकार के राजस्व को नुक्सान पहुंचाया। जांच अधिकारी के अनुसार चारों खरीदारों पर मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति की।मामला एडीएम वित्त एवं राजस्व न्यायालय में जायेगा।

श्रीकृष्ण धर्मशाला तहसील से रिपोर्ट भी ली गयी थी। उसके बाद जांच पूरी करके रिपोर्ट डीएम को दे दी है। श्रीकृष्ण धर्मशाला निजी संपत्ति है। जिस विजय अग्रवाल ने जमीन बेची है। उसके लिये मुक्तयारनामा है, इसलिये वह बेचने को अधिकृत हैं। प्रकरण में स्टांप चोरी का मामला सामने आया है। बिल्डिंग को प्लाट दिखाकर बैनामा किया है। चारों खरीदारों पर मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति की।

अमित कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट

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