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बदायूं में खुले में शौच करने को मजबूर 17 हजार परिवार

बदायूं में खुले में शौच करने को मजबूर 17 हजार परिवार

संक्षेप:

Badaun News - बदायूं के विकास भवन स्थित स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का कार्यालय।10 बीडीएन 54--बदायूं के विकास भवन स्थित स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का कार्यालय।10 बीड

Sep 11, 2025 05:12 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बदायूं
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बदायूं। केंद्र सरकार की योजना स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण बजट के संकट में धड़ाम हो चुकी है। स्थानीय जनपद में पिछले दो वर्ष से बजट का संकट है। जिसकी वजह से सावर्जनिक और विभागीय कार्य ही नहीं लटके हैं व्यक्तिगत परिवारों के शौचालयों को दी जाने वाली धनराशि भी लटकी है। बजट के संकट में व्यक्तिगत शौचालय नहीं बन पा रहे हैं। इसकी वजह से हजारों की संख्या में ग्रामीण आंचल के लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं। जनपद में 1037 ग्राम पंचायत हैं जिनके करीब 1407 गांव हैं। इन ग्रामीण क्षेत्रों आज भी ओडीएफ योजना कागजों तक सीमित है।

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क्योंकि जनपद वैसे तो ओडीएफ हो चुका है और ओडीएफ प्लस में है। मगर यहां आज भी लोगों के घरों पर शौचालय नहीं हैं व्यक्तिगत शौचालय की लोगों की डिमांड है। पंचायत राज विभाग के तहत संचालित राष्ट्रीय स्वच्छ भारत मिशन परियोजना को जनपद के लिए पिछले दो वर्ष से बजट नहीं आया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में बजट आया था। इसके बाद से बजट नहीं आया है। जनपद में वित्तीय वर्ष 2024-25 में 10 हजार 777 लाभार्थी पात्र घोषित हुए थे। वहीं करीब दो हजार से अधिक लाभार्थी अपात्र निकले थे। वहीं 10777 में से छह हजार परिवारों को प्रथम की किस्त व्यक्तिगत शौचालय बनवाने को दे दी गई। वहीं 4777 लाभार्थियों को अभी तक पहली किस्त का पैसा भी नहीं मिला है। इसलिए 10 हजार 777 इन परिवारों के घरों पर व्यक्तिगत शौचालय नहीं है और खुले में शौच करने को मजबूर हैं। इनके अलावा वित्तीय वर्ष 2025-26 में 6612 परिवारों ने और आवेदन कर दिया है कि उन्हें भी व्यक्गित शौचालय चाहिए। इस तरह से दो वर्ष में 17389 परिवारों के पास व्यक्तिगत शौचालय नहीं है और शौचालय मांग रहे हैं। मगर दो वर्ष से बजट का संकट है और बिना बजट के व्यक्तिगत शौचालय कार्य ही नहीं तमाम कार्य लटके हुए हैं। छह हजार लोगों को और चाहिए शौचालय जनपद में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 के लाभार्थियों को शौचालय की धनराशि नहीं मिल सकी है। तब तक वित्तीय वर्ष 2025-26 में छह महीने होने जा रहे हैं नये वित्तीय वर्ष में शौचालय की मांग आ गई है। शासन ने नये वित्तीय वर्ष के लिए 11509 का लक्ष्य भी दे दिया है। वहीं ब्लाकों से भी 2150 व्यक्तिगत शौचालयों की डिमांड आ चुकी है। इसी बीच छह महीने में जिले भर से 6612 लाभार्थियों ने व्यक्तिगत शौचालय के लिए आवेदन कर दिया है। जिनको शौचालयों की जरूरत है। मगर बजट का संकट बना हुआ है। यह कार्य भी रुके स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत बजट के अभाव में एक नहीं कई-कई कार्य रुके हुए हैं। सरकार ने योजना और अपने मिशन में शामिल कर रखे हैं। मगर बजट के अभाव में लटके हुए हैं। इसमें चाहे सामुदायिक शौचालय हों या फिर कूड़ा प्रबंधन को लेकर आरआरसी सेंटर का कार्य हो, नाफेड के कार्य हों या फिर सोखता बन वाना हो। हैंडपंप सोखता और गड्डा बनवाने जैसे का र्य भी लटके हुए हैं। विभाग के पास बजट नहीं हैं। स्वच्छ भारत मिशन में कुछ कार्य के लिए बजट की दिक्कत है जिसमें व्यक्तिगत शौचालय आदि का बजट कम आया है। फिलहाल जो डिमांड जनपद भर की थी उसे भेज दिया है। केशव कुमार, सीडीओ