
कागजों में सात वेंटीलेटर संचालित, हकीकत में तोड़ चुके दम
संक्षेप: Badaun News - बदायूं मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा उपचार की स्थिति बेहद खराब है। मरीजों को उपचार नहीं मिल रहा है और उन्हें अन्य अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। आकस्मिक चिकित्सा विभाग में वेंटिलेटर और मॉनिटर की कमी है। डॉक्टरों के अनुसार, स्थिति में सुधार के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है, लेकिन प्रशासन की अनदेखी जारी है।
बदायूं, संवाददाता। स्थानीय जनपद के साथ-साथ आसपास जनपद के मरीज मेडिकल कालेज में उपचार की उम्मीद से पहुंचते हैं लेकिन वह यहां आने के बाद उपचार तो नसीब नहीं कर पाते हैं लेकिन हां रेफर स्लिप जरूर पाते हैं। मेडिकल कालेज में चिकित्सा उपचार के बुरे हाल हैं। आकस्मिक चिकित्सा विभाग में डाक्टर-कर्मचारियों की कमी तो है ही साथ में उपकरण तक नहीं हैं। कागजों में वेंटीलेटर चल रहे हैं हकीकत में खराब हैं और दम तोड़ चुके हैं। बदायूं मेडिकल कालेज की वेंटीलेटर सुविधा खुद वेंटीलेटर पर है। राजकीय मेडिकल कालेज के आकस्मिक चिकित्सा विभाग में सात-सात वेंटीलेटर की सुविधा है लेकिन वर्तमान में कोई भी वेंटीलेटर संचालित नहीं है।

सब खराब पड़े हैं। डॉक्टरों के मुताबिक आकस्मिक चिकित्सा विभाग को तत्काल की स्थिति में दो इनवाइसिव व दो नॉन इनवाइसिव वेंटीलेटर की जरूरत है। मगर यहां एक भी नहीं है इसीलिए गंभीर मरीजों को सैफई मेडिकल कालेज व अलीगढ़ मेडिकल कालेज को रेफर किया जा रहा है। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं और भटक रहे हैं लेकिन मेडिकल कालेज प्रशासन को इसकी चिंता नहीं है। अगस्त के बाद सितंबर में पत्र प्राचार्य को दिया गया लेकिन सुधार अभी तक नहीं हुआ है। इस जानकारी को मेडिकल कालेज प्रशासन छिपाये हुए है और किसी भी स्तर पर अधिकारियों के सामने जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया। इसका खुलासा तो इमरजेंसी एवं ट्रामा समिति की बैठक के बाद विचार किया गया। नौ सितंबर को प्राचार्य को दिया गया। पत्र के बाद से दो महीने हो गए हैं लेकिन हालत जस की तस बने हुए हैं। इस मामले में प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। मॉनीटर भी खराब राजकीय मेडिकल कालेज के आकस्मिक विभाग में 30 मॉनीटर की व्यवस्था है। मगर यहां मरीजों को सभी पर उपचार नहीं मिलता है यह 30 संख्या केवल अधिकारी व जनप्रतिनिधियों को दिखावा के लिए हैं। अगर हकीकत में देखेंगे तो सिर्फ पांच ही मॉनीटर संचालित है। राजकीय मेडिकल कालेज की आकस्मिक चिकित्सा विभाग की बैठक वाली रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि 30 में से सिर्फ 05 संचालित हैं बाकी बंद हैं जबकि जरूरत सभी के संचालित होने की है। डिजिटल बीपी मशीन, ईसीजी का संकट राजकीय मेडिकल कालेज में कर्मचारी व डाक्टर परेशान हैं यहां डिजिटल मशीनी बीपी की नहीं है ईसीजी मशीन भी खराब है। मेडिकल कालेज के डाक्टरों की रिपोर्ट के मुताबिक यहां डिजिटल बीपी मशीन व पल्स ऑक्सीमीटर उपलब्ध नहीं है। जिसकी वजह से दिक्कत होती है। वहीं वर्तमान में तीन ईसीजी मशीन हैं जिसमें से दो मशीन खराब है और एक संचालित है।

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