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25 नवंबर, 2020|5:25|IST

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परक्यूपाइन कटर डालकर कटान रोकने का प्रयास

परक्यूपाइन कटर डालकर कटान रोकने का प्रयास

1 / 4गंगा के जलस्तर में भले ही गिरावट होने लगी है, लेकिन अभी तक बाढ़ का खतरा टला नहीं है। नदी खतरे के निशान से 1.55 मीटर ऊपर बह रही है। बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित उसहैत क्षेत्र के गांव...

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2 / 4गंगा के जलस्तर में भले ही गिरावट होने लगी है, लेकिन अभी तक बाढ़ का खतरा टला नहीं है। नदी खतरे के निशान से 1.55 मीटर ऊपर बह रही है। बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित उसहैत क्षेत्र के गांव...

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3 / 4गंगा के जलस्तर में भले ही गिरावट होने लगी है, लेकिन अभी तक बाढ़ का खतरा टला नहीं है। नदी खतरे के निशान से 1.55 मीटर ऊपर बह रही है। बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित उसहैत क्षेत्र के गांव...

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4 / 4गंगा के जलस्तर में भले ही गिरावट होने लगी है, लेकिन अभी तक बाढ़ का खतरा टला नहीं है। नदी खतरे के निशान से 1.55 मीटर ऊपर बह रही है। बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित उसहैत क्षेत्र के गांव...

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गंगा के जलस्तर में भले ही गिरावट होने लगी है, लेकिन अभी तक बाढ़ का खतरा टला नहीं है। नदी खतरे के निशान से 1.55 मीटर ऊपर बह रही है। बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित उसहैत क्षेत्र के गांव हैं।

सहसवान के गंगा महावा-बांध पर कटान नहीं रुक रहा है। बाढ़ खंड द्वारा परक्यूपाइन कटर तैयार कर कटान स्थल पर डाले जा रहे हैं। ऐसे करने से पानी की चाल धीमी हो जाती है और कटान कम हो जाता है। पहाड़ों पर बारिश के बाद नरौरा बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद गंगा नदी में उफान आ गया था, लेकिन अब दो दिन से यह उफान कम हो गया है। पानी भी अब सामान्य की तरह डिस्चार्ज किया जा रहा है। मंगलवार को नरौरा बैराज से 1,13,217 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। इधर, उसहैत क्षेत्र के गांव असमयारफतपुर के खेतों का कटना गंगा नदी में जारी है। अबतक करीब 300 बीघा भूमि नदी की आगोश में समां चुकी है। बाढ़ पीड़ित गंगा में कटते खेत देख काफी चिंतित हैं। जटा, कटरा सादतगंज पर धीमी गति से कटान जारी है, जबकि पथरामई बांध से गंगा नदी बिल्कुल सटकर बह रही है। इससे लगातार बांध को खतरा बना हुआ है। बाढ़ खंड के एई जयंती प्रसाद द्वारा बांध की निगरानी करायी जा रही है। एक्सईएन केपी सिंह वर्मा ने बताया कि गंगा के जलस्तर में गिरावट हो रही है। डैम से भी रोजाना घटाकर पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है। स्थिति पूरी तरह से सामान्य है। जिन स्थानों पर कटान हो रहा है वहां सुरक्षात्मक कार्य जारी है।

तीन गांव जलमग्न

उसहैत के तीन गांव कोनका नगला, चेतराम नगला, ग्योड़ी नगला में अब तक पानी भरा हुआ है। गांव के लोग घरों की छतों पर शरण लिए हैं। खाना, पीना सब बाढ़ के चलते खुले आसमान के नीचे हो रहा है। गांव में तीन-तीन फिट तक पानी भरा है।

घरों से नहीं निकल पा रहे ग्रामीण

उसहैत के ही गांव कमलू नगला, बेहटी, भकरी, बल्ले नगला बाढ़ के पानी से चारों ओर से घिरे हैं। ग्रामीण गांव पानी से घिरे होने के चलते कहीं जा नहीं पा रहे हैं। घरों में उपलब्ध राशन सामग्री से ही काम चला रहे हैं।

फर्रूखाबाद के गांवों में दहलीज तक पानी

गंगा पार के गांव कमलईयापुर, रैपुरा, कदम नगला, जटा, प्रेमी नगला, जसवंत नगला, ठकुरी नगला में घरों तक पानी पहुंच गया है। इसके चलते ग्रामीण परेशान हैं। फर्रूखाबाद के गांव शेखपुर, इकलहरा, बिहारीपुर, शाहपुर, बौरा, पथरामई पार वाली आदि गांवों की स्थिति भी खराब है।

सड़क कटने से हादसे का डर

इकलहरा पर सड़क कटने से मुश्किल बढ़ गई है। यहां से निकलते वक्त वाहन फंस जाते हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत बाइक से गुजरने वालों को होती है। सड़क पार करने के दौरान हादसे का डर बना रहता है। जटा जाने वाले रपटा पुल के ऊपर से दो फिट ऊंचाई में पानी बह रहा है। ऐसे में पुल क्षतिग्रस्त होने का भी खतरा बढ़ गया है।

रामगंगा के जलस्तर में वृद्धि

रामगंगा के जलस्तर में वृद्धि जारी है। नदी चितरी, सिमरिया, नवादा मधुकर गांव से सटकर बह रही है। चापरकौरा पर कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड द्वारा बंदोबस्त पूरा कर लिया गया है। जलस्तर बढ़ने से हर्रामपुर समेत कई गांवों के खेतीहार इलाके में बाढ़ का पानी भर जाएगा। एई वसीम रजा ने बताया कि इलाके में मूवमेंट जारी है। अभी कहीं पर कटान नहीं हो रहा है।

इतना डिस्चार्ज पानी

नरौरा-1,13,217 क्यूसेक

बिजनौर-50,346 क्यूसेक

हरिद्वार-85,092 क्यूसेक

कछला गेज आज की स्थित-163.55 मीटर

सामान्य गेज- 162.00 मीटर

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  • Web Title:Attempt to stop erosion by putting percupine cutter