आवारा कुत्तों के लिए नहीं है एबीसी सुविधा
Azamgarh News - आजमगढ़ में आवारा कुत्तों के आतंक से लोग भयभीत हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जिले में एबीसी केंद्र और प्रशिक्षित टीम की कमी है। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में...
आजमगढ़, संवाददाता। आवारा कुत्तों के आतंक से जनपदवासी भयभीत हैं। आवारा कुत्तों से जिले की सड़कों और गलियों को मुक्त कराने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी अभी तक कोई कवायद शुरू नहीं की गई है। आवारा कुत्तों के लिए जिले में एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर) की सुविधा नहीं है। नगर निकायों में कुत्ते पकड़ने के लिए प्रशिक्षित टीम तक भी नहीं है। प्रशासन की शिथिलता से आवारा कुत्तों के आंतक से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। सुप्रीम कोर्ट ने नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों और गलियों को आवारा कुत्तों से मुक्त कराने का आदेश देते हुए छह हफ्ते का लक्ष्य निर्धारित किया है।

जिले में तीन नगरपालिका, 13 नगर पंचायत के अलावा 22 विकास खंड और आठ तहसील हैं। इनका बजट भी प्रति वर्ष कई सौ करोड़ रुपये है। इसके बाद भी नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की गलियों और मोहल्लों में न तो पालिका के और न ही ब्लाक और तहसीलों के कर्मचारियों की टीम आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए नजर आ रही है। निकायों के पास आवारा कुत्तों को पकड़ने के न तो उपकरण हैं, न ही वाहन और न ही प्रशिक्षित कर्मचारी। वहीं, जिले में एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर (एबीसी) की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। न ही कुत्ते पकड़ने के लिए प्रशिक्षित टीम मौजूद है। नगर के इन मोहल्लों में है आतंक नगर के सिविल लाइंस, रैदोपुर, सिधारी, नरौली, हरबंशपुर, सर्फुद्दीनपुर, रेलवे स्टेशन, बेलइसा, पल्हनी, रोडवेज, मातवरगंज, चौक, पुरानी सब्जी मंडी, कटरा, बदरका, अतलस पोखरा, पांडेय बाजार, ब्रह्म स्थान, पुरानी कोतवाली, तकिया, पहाड़पुर, हर्रा की चुंगी, बिलरियागंज की चुंगी, कोट, दलालघाट, फराश टोला, एलवल काली चौरा आदि मोहल्लों आवारा कुत्तों का आतंक बना हुआ है। सिर्फ नगर क्षेत्र में ही आवारा कुत्तों के काटने की प्रतिदिन 25 से 30 घटनाएं सामने आती हैं। कुत्तों से ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी हैं भयभीत आवारा कुत्तों का आतंक सिर्फ शहर में ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी है। जहानागंज, मुबारकपुर, मेंहनगर, पल्हना, मेहनाजपुर, तरवां, लालगंज, देवगांव, बिंद्रा बाजार, गोसाई की बाजार, मोहम्मदपुर, मार्टीनगंज, दीदारगंज, पवई, सरायमीर, अंबारी, फूलपुर, संजरपुर, रानी की सराय, निजामाबाद, माहुल,अहरौला, बूढ़नपुर, अतरौलिया, रौनापार, लाटघाट, जीयनपुर, महराजगंज, कप्तानगंज, कंधरापुर बाजार के साथ ही आस-पास के गांव से लेकर सड़कों पर आवारा कुत्तों का झुंड हर समय धमा-चौकड़ी करते हुए नजर आ जाएगा। कुंतों के आतंक से बच्चे, वृद्धों के साथ ही महिलाएं घर से बाहर अकेले निकलने में भयभीत रहती हैं। गर्मी और ठंड की शुरुआत में हो जाते हैं आक्रमक सीवीओ मुकेश कुमार ने बताया कि आवारा कुत्ते गर्मी और ठंड की शुरुआत में आक्रामक हो जाते हैं। वे अधिक चिड़चिड़े हो जाते हैं और पर्याप्त भोजन-पानी न मिलने की दशा में आपा खो बैठते हैं। ऐसे में लोगों को बेवजह दौड़ाकर काटते हैं। कुत्तों में शारीरिक और स्वभाव में बदलाव देखने को मिलता है। नतीजतन उनमें गुस्सा और काटने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि गर्मी का मौसम भी कुत्तों को भड़काने में मदद करता है। निकायों में पालतु कुत्तों का भी नहीं कराते हैं रजिस्ट्रेशन शासन के निर्देश के बाद भी जिले के किसी भी निकाय में लोग अपने पालतु कुत्तों का रजिस्ट्रेशन नहीं कराते हैं। यही नहीं, नगरपालिका से लेकर नगर पंचायत तक के अधिकारियों ने भी पालतु कुत्तों का रजिस्ट्रेशन न करने वालों के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं की है। नगर पालिका परिषद आजमगढ़ के ईओ ने बताया कि अभी तक इस संबंध में कोई पहल नहीं शुरू की गई है।

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