व्यक्ति के विकास में संगीत और कला महत्वपूर्ण : डीएम
आजमगढ़ के हरिहरपुर संगीत महाविद्यालय में ग्रीष्मकालीन अभिरुचि कार्यशाला का समापन हुआ। जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने संगीत एवं कला के महत्व को बताया। कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने कार्यक्रम की सराहना की। विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र दिए गए और उनकी प्रतिभा की प्रशंसा की गई।

आजमगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। हरिऔध कला केंद्र में संचालित हरिहरपुर संगीत महाविद्यालय में मंगलवार को एक माह से आयोजित ग्रीष्मकालीन अभिरुचि कार्यशाला का समापन हुआ। इस मौके पर मुख्य अतिथि जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने कहा कि संगीत एवं कला व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने हरिहरपुर संगीत महाविद्यालय द्वारा जनपद में संगीत एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। साथ ही विद्यार्थियों को निरंतर अभ्यास एवं समर्पण के साथ अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता
अध्यक्षता कर रहीं भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय लखनऊ की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने कहा कि संगीत भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है और ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं में कला एवं संस्कृति के प्रति रुचि विकसित करने के साथ-साथ उनकी रचनात्मक क्षमताओं को भी निखारते हैं। उन्होंने कार्यशाला में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों की प्रतिभा और समर्पण की प्रशंसा करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम के दौरान कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले सभी विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
समारोह का उद्घाटन
भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ की घटक इकाई हरिहरपुर संगीत महाविद्यालय, आजमगढ़ में आयोजित एक माह की ग्रीष्मकालीन अभिरूचि कार्यशाला का समापन समारोह मंगलवार को अत्यंत भव्य एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह का उद्घाटन भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह, जिलाधिकारी रवींद्र कुमार तथा महाविद्यालय की नोडल अधिकारी डाॅ. पूनम श्रीवास्तव द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां
कार्यक्रम के प्रारम्भ में महाविद्यालय की नोडल अधिकारी डाॅ. पूनम श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया। इसके उपरांत कार्यशाला में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों ने शास्त्रीय एवं लोक संस्कृति से जुड़े विविध रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया।
कार्यशाला की विशेषताएँ
एक माह तक संचालित इस ग्रीष्मकालीन अभिरुचि कार्यशाला में लगभग 250 विद्यार्थियों ने सहभागिता करते हुए संगीत एवं नृत्य की विभिन्न विधाओं में प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यशाला के अंतर्गत प्रतिभागियों को शास्त्रीय गायन, सुगम संगीत, लोकगीत, हारमोनियम, तबला, ढोलक, कथक नृत्य एवं लोकनृत्य का व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक प्रशिक्षण विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा प्रदान किया गया।
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