DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   उत्तर प्रदेश  ›  आजमगढ़  ›  कृषि कानूनों के विरोध में संगठनों ने मनाया काला दिवस
आजमगढ़

कृषि कानूनों के विरोध में संगठनों ने मनाया काला दिवस

हिन्दुस्तान टीम,आजमगढ़Published By: Newswrap
Wed, 26 May 2021 11:10 PM
कृषि कानूनों के विरोध में संगठनों ने मनाया काला दिवस

आजमगढ़। संवाददाता

सरकार द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए किसान संगठन आंदोलनरत है। बुधवार को यह आंदोलन शुरू हुए छह माह पूरे हो गए। ऐसे में प्रदर्शनकारी किसान और समर्थन देने वाली समाजवादी पार्टी ने इसे काला कानून करार देते हुए वापस लेने की मांग की है। साथ ही किसानों के पैदावार का दो गुना मूल्य देने को कहा।

समाजवादी पार्टी के निवर्तमान जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने बुधवार को पार्टी कार्यालय में कहा कि 6 महीने से देश में किसान, मोदी सरकार द्वारा कृषि कानून के विरोध में धरना प्रदर्शन व मॉग कर रहे हैं। यह कानून किसानों के लिए काला कानून है। किसान चाहते हैं कि सन् 1955 का आवश्यक वस्तु अधिनियम कानून समाप्त न किया जाय। किसानों की जमीन प्ॉूजीपतियों के हाथ गिरवी रखने वाले कानून कान्ट्रैक्ट फार्मिंग को खत्म किया जाय। न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानून बना कर किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिया जाय। हवलदार यादव ने कहा कि किसानों को उनकी पैदावार का दो गुना मूल्य दिया जाय। लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार पूॅजीपतियों के दबाव में आकर यह काला कानून वापस लेने के लिए तैयार नहीं है। देश में किसान संगठनों ने आज का दिन काला दिन मनाने का फैसला लिया। सपा किसानों के आन्दोलन व मॉगों के समर्थन में है। हवलदार ने कहा कि इस समय डीजल, विद्युत, खाद, यन्त्रों के बढ़ते मूल्य के कारण खेती म्ॉहगी होती जा रही है। किसान परेशान है। वे खेती के बदौलत अपने परिवार का भरण पोषण नहीं कर पा रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में किसानों के मॉगों का माना जाना गॉव, किसान व देशहित में है।

संबंधित खबरें