जुलजनाह और अलम का निकाला गया जुलूस
कस्बे के सिरादी का पूरा मोहल्ले में गुरुवार को अजाखाना जहरा से मजलिस के बाद शबीह ज़ुलजनाह और अलम के साथ जुलूस निकाला गया। जुलूस कदीमी रास्तों से होता

सरायमीर। कस्बे के सिरादी का पूरा मोहल्ले में गुरुवार को अजाखाना जहरा से मजलिस के बाद शबीह ज़ुलजनाह और अलम के साथ जुलूस निकाला गया। इस दौरान उलेमाओं ने पहली मजलिस को संबोधित किया। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार दो मोहर्रम को हजरत इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) अपने अहलेबैत और साथियों के साथ कर्बला की सरजमीं पर पहुंचे थे। यही वह ऐतिहासिक दिन था, जहा से इंसानियत, न्याय और सच्चाई की रक्षा के लिए संघर्ष शुरू हुआ। जिसने दुनिया को हमेशा के लिए कुर्बानी और सब्र का अनूठा संदेश दिया। पहली मजलिस में मौलाना मासूम असगर मारुफी ने कहा कि इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) ने सत्ता या दुनिया की लालच में नहीं, बल्कि इस्लाम की मूल शिक्षाओं, इंसाफ, अमन और इंसानी मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज बुलंद की थी। जुलूस में तकरीर करते हुए सैयद जीशान अली आजमी ने कहा कि कर्बला का वाकया सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए सबक है। इमाम हुसैन की कुर्बानी हमें सत्य, न्याय, भाईचारे, धैर्य और मानवता की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में डटे रहने का सबक देती है। जुलूस में अंजुमन मासूमिया मुबारकपुर, अंजुमन गुलशने इस्लाम मित्तुपुर, अंजुमन इमामिया अमिलो, अंजुमन जाफरिया रजिस्टर्ड जलालपुर ने नौहा मातम किया। संचालन आसिफ बिस्वानी और मोहम्मद हुसैन सरायमीरी ने किया.
मोहर्रम को लेकर हुई पीस कमेटी की बैठक
माहुल। स्थानीय पुलिस चौकी में गुरुवार को पीस कमेटी की बैठक हुई। जिसकी अध्यक्षता चौकी प्रभारी माहुल यश सिंह पटेल ने की। पीस कमेटी की बैठक में साफ-सफाई, बिजली और पानी को लेकर चर्चा हुई। थानाध्यक्ष अहरौला मंतोष सिंह ने कहा कि शिया समुदाय द्वारा मनाए जाने वाला मोहर्रम नेकी और शहादत का पवित्र पर्व है। हजरत इमाम हुसैन की शहादत भी इसी के लिए हुई। उन्होंने कहा कि इसमें जो भी जुलूस होगा, उसमें किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र का प्रदर्शन और नई परंपरा की शुरुआत प्रतिबंधित है। थानाध्यक्ष ने लोगों से त्योहार में होने वाली समस्याओं और शांति सुरक्षा के मामले में जानकारी ली। नगर अध्यक्ष लियाकत अली ने कहा कि नगर की साफ-सफाई के लिए मोहर्रम पर विशेष व्यवस्था रहेगी。


