गाजर घास का सफाया कर देगा ‘मैक्सिकन बीटल’
Azamgarh News - किसानों के लिए मुसीबत बनी गाजर घास का सफाया अब विशेष कीट करेंगे। खरपतवार अनुसंधान निदेशालय जबलपुर के वैज्ञानिकों ने ‘मैक्सिकन बीटल’ कीट खोजा है। इस की

आजमगढ़, संवाददाता। किसानों के लिए मुसीबत बनी गाजर घास के नियंत्रण के लिए अब विशेष कीट ‘मैक्सिकन बीटल’ का सहारा लिया जाएगा। खरपतवार अनुसंधान निदेशालय, जबलपुर के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह कीट कृषि विभाग के माध्यम से किसानों को नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। इसके प्रभाव से दो से तीन माह में परिणाम दिखने लगेंगे। गाजर घास, जिसे पार्थेनियम, चटक चांदनी और कांग्रेस घास के नाम से भी जाना जाता है, किसानों के लिए लगातार समस्या बनी हुई है। यह न केवल फसलों के उत्पादन को प्रभावित करती है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। इसकी जड़ों से निकलने वाले विषैले तत्व फसलों की वृद्धि रोकते हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसके संपर्क में आने से त्वचा रोग, एलर्जी और सांस संबंधी बीमारियां भी हो सकती हैं। जानकारी के अनुसार, यह घास 1950 के दशक में अमेरिका से आए लाल गेहूं के साथ भारत में पहुंची थी और पहली बार 1955 में महाराष्ट्र के पुणे में देखी गई थी। वर्तमान में यह जनपद सहित पूरे क्षेत्र में फैल चुकी है। इस समस्या के समाधान के लिए वैज्ञानिकों ने ‘मैक्सिकन बीटल’ नामक विशेष कीट विकसित किया है, जो केवल गाजर घास को ही खाता है और किसी अन्य फसल, पौधे, पशु या मानव को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता। यह जैविक नियंत्रण तकनीक पर आधारित है, जो पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित मानी जा रही है और मिट्टी, जल तथा जलवायु पर इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। केवीके लेदौरा के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एलसी वर्मा ने बताया कि यह कीट केवल गाजर घास को नष्ट करता है और किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगा। उन्होंने बताया कि किसान इस तकनीक के माध्यम से गाजर घास से प्रभावी रूप से निजात पा सकते हैं।
इस तरह से काम करता है मैक्सिकन बीटल कीट
गाजर घास का जीवन चक्र लगभग तीन महीने का होता है। एक पौधा 5000 से 30000 तक नए पौधे पैदा कर सकता है। वहीं मैक्सिकन बीटल कीट एक बार में लाखों अंडे देता है। यह कीट गाजर घास को खाकर तेजी से उसका सफाया कर देते हैं। दो से तीन महीने में प्रभाव साफ दिखाई देने लगता है। इस कीट से बिना किसी रसायनिक दवा का प्रयोग करे घास से निजात मिलेगी।
किसानों को इस तरह से मिलेगा यह कीट
किसान सीधे खरपतवार अनुसंधान निदेशालय जबलपुर से संपर्क कर सकते हैं। यह कीट किसानों को नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है। डाक के माध्यम से भी भेजा जाता है। विशेष डिब्बों में पैक किया जाता है, जिसमें हवा का प्रबंध होता है। कॉरपोरेट सेक्टर के लिए यह कीट 5 रुपये प्रति कीट की दर से भी उपलब्ध है।
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