
मध्यम वर्गीय व्यापारियों को बजट से मिली बड़ी राहत
Azamgarh News - आजमगढ़ में आम बजट 2026-27 पर नौकरी पेशा लोगों में निराशा है क्योंकि टैक्स स्लैब में कोई छूट नहीं दी गई। वहीं, मध्यम वर्ग को राहत मिली है। किसानों को भी कोई खास लाभ नहीं मिला और एमएसपी की मांग को नजरअंदाज किया गया। राजनीतिक दलों ने बजट पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं दी हैं।
आजमगढ़, संवाददाता। आम बजट 2026-27 में टैक्स स्लैब में छूट का दायरा न बढ़ने से नौकरी-पेशा लोगों में मायूसी रही। वहीं केंद्र सरकार ने बजट में मध्यम वर्गीय वर्ग को बड़ी राहत दी है। टीडीएस और इनकम टैक्स को सरलीकरण बनाए जाने से व्यापारियों ने बजट को सराहा है। आम बजट में कपड़े, लेदर आइटम, सिंथेटिक फुटवियर, चमड़े के उत्पाद, कैंसर-शुगर समेज 17 जीवन रक्षक दवाएं ड्यूटी फ्री करने, मोबाइल बैटरियां, सोलर ग्लास आदि सस्ते होने, टीसीएस इंटरेस्ट रेट कम करने और इनकम टैक्स को सरलीकरण बनाए जाने से मध्यम वर्गीय परिवार के साथ व्यापारियों को राहत मिली है। वहीं, घरेलू और खाद्य सामग्रियों के दाम में कोई राहत न मिलने से गृहणियों को निराशा हाथ लगी है।
व्यापारियों ने कहा कि महंगाई पर सरकार का कोई विशेष फोकस नहीं रहा। टैक्स स्लैब में छूट का दायरा नहीं बढ़ाने से नौकरी पेशा लोगों के चेहरे पर मायूसी छा गई। कैंसर, शुगर से जुड़ी 17 दवाएं, सात दुर्लभ बीमारियों की दवाएं सस्ती होने, दवाओं और मेडिकल डिवाइज पर कस्टम ड्यूटी घटाने से मरीजों को इलाज में राहत मिलने की उम्मीद है। वित्तमंत्री ने युवाओं के लिए शिक्षा से रोजगार और उद्यम का ऐलान कर लुभाने का प्रयास किया है। गृहणियों ने कहा कि महंगाई बढ़ती जा रही है। घरेलू और खाद्य पदार्थों के दामों में सरकार ने कोई रियायत नहीं दी। आम बजट पर किसानों की प्रतिक्रिया किसानों के लिए कई योजनाओं की घोषणा की गई है। आय दोगुना करने के लिए पारंपरिक खेती से हटकर रोजगार परक व्यवसाय पर फोकस किया गया है। मगर एमएसपी पर कानूनी गारंटी को कोई प्रावधान नहीं किया गया है। उपज का दाम निर्धारित नहीं किया गया है, जबकि किसान लंबे समय से एमएसपी की मांग करते आ रहे हैं। -रामकुमार यादव, किसान नेता। खाद, बीज और सिंचाई के संसाधनों की महंगाई के चलते आम बजट में किसानों को उम्मीद थी। किसान सम्मान निधि की राशि में बढ़ोत्तरी होने से कुछ हद तक राहत मिल सकती है। मगर बजट में इस योजना को जगह ही नहीं दिया गया है। अलबत्ता बजट में किसान क्रेडिट कार्ड की ऋण सीमा को बढ़ा कर बड़े किसानों को कुछ राहत देने का प्रयास किया गया है। क्योंकि छोटे किसान ऋण के जाल में फंसना नहीं चाहते हैं। -रामनयन यादव ,किसान नेता। खेती करने के लिए सबसे पहले खेतों की जोताई और फसलों की सिंचाई के लिए डीजल की जरूरत पड़ती है। इसके बाद खाद और बीज की जरूरत पड़ती है। खाद, बीज और डीजल की बढ़ती जा रही महंगाई से बजट में किसानों को अपेक्षित राहत देने का प्रयास नहीं किया गया है। हालांकि डिजिटल खेती सराहनीय कदम है। -जमुना यादव। आम बजट में गेहूं,धान, मक्का,गन्ना, सरसों ,सब्जी आदि की परंपरागत खेती से अलग हट कर किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाओं को लागू किया गया है। खेती से जुड़ कर किसान डेयरी, मुर्गी पालन, बागवानी आदि पर जोर दिया गया है। बजट में खेती से जुड़े इस तरह के व्यवसाय से किसानों की आय में इजाफा हो सकता है। जिले में बड़े किसान ही इस व्यवसाय से जुड़ कर फायदा ले सकते हैं। कम जोत के किसान भूमि के अभाव में पिछड़ जाएंगे। - रामशब्द निषाद। बजट पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया भाजपा ने बजट को सराहा, विपक्ष ने किसान विरोधी बताया आजमगढ़। केंद्र सरकार के बजट पर राजनीतिक दलों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। सत्तारूढ दल भाजपा जिला अध्यक्ष ने बजट को सराहा। गरीबों, किसानों, युवाओं को समर्पित बजट बताते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी। जबकि विरोधी दलों ने कहा कि बजट से किसानों और मध्यम वर्ग को निराश होना पड़ा है। केंद्रीय बजट भारत के वैभवशाली विकास की समग्रता का स्वर्णिम अभिलेख है। किसान के समृद्धि के प्रतीक बजट में किसानों को परंपरागत खेती से हट कर मुर्गी पालन,डेयरी आदि व्यवसाय से भी जोड़ा गया है। इस योजना से किसानों की आय में और बढ़ोत्तरी होगी। युवाओं के भावी भविष्य की दिशा तय करने वाले अनुपम बजट से देश में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। -ध्रुव सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष आजमगढ़। केंद्रीय बजट गरीबों,किसानों, युवाओं को समर्पित बजट है। इस बजट से देश की अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी। यह बजट सर्वस्पर्शी, सर्वसमावेशी, सबके कल्याण के लिए ‘सबका साथ सबका विकास’ व ‘अन्त्योदय से सर्वोदय’ की भावना के साथ बनाया गया है। यह केवल एक आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि विकसित भारत के संकल्प का सशक्त घोषणा पत्र है। - विनोद राजभर, भाजपा जिलाध्यक्ष लालगंज। केंद्रीय बजट पूरी तरह से जनविरोधी और दिशाहीन है। यह बजट ‘ऊंची दुकान, फीका पकवान’ साबित हुआ है। जिसमें न मध्यम वर्ग को वास्तविक राहत मिली है और न ही युवाओं के लिए रोजगार का कोई ठोस प्रावधान है। किसानों को एमएसपी पर भरोसा दिया गया है। महंगाई, बेरोजगारी और आम जनता की समस्याओं पर सरकार की चुप्पी साफ दिखाती है। बजट जनता के लिए नहीं, बल्कि चंद पूंजीपतियों के हित में बनाया गया है। -कौशल कुमार सिंह ‘मुन्ना राय‘,अध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी। केंद्रीय बजट पूरी तरह से खोखला है। कारपोरेट समर्थक बजट में किसानों के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। दलितों, पिछड़ों, मजदूरों के हितों को नजर अंदाज कर दिया गया है। गरीबों और मजदूरों पर अब महंगाई का और बोझ बढ़ेगा। नौजवानों के लिए भी यह बजट निराशाजनक है। उनके लिए रोजगार पर कोई ठोस एलान नहीं किया गया है। -हवलदार यादव ,समाजवादी पार्टी जिला अध्यक्ष। दलितों, पिछड़ों और दबे कुचले समाज का बजट से कोई फायदा नहीं होने वाला है। इन वर्गों के उत्थान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। पूर्व सरकारों की तरह ही इस सरकार ने भी पूंजीपतियों के हितों को देखते हुए बजट बनाया है। किसानों ,नौजवानों को ठगने का काम किया गया है। किसानों की लंबे समय से एमएसपी की मांग को भी ठुकरा दिया गया है। -अरविंद कुमार, बसपा जिला अध्यक्ष

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