लक्ष्मी नारायण मिश्र का जीवन प्रेरणादायी : डीएम
Azamgarh News - आजमगढ़ में जिला एकीकरण समिति और जिला प्रशासन ने पं. लक्ष्मी नारायण मिश्र की 123वीं जयंती मनाई। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने उनके साहित्य और नाटकों की प्रशंसा की, जो स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण रहे। कार्यक्रम में उनके पौत्र ने अतिथियों को सम्मानित किया।

आजमगढ़, संवाददाता। जिला एकीकरण समिति एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को आधुनिक हिंदी नाटक के जनक एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. लक्ष्मी नारायण मिश्र की 123वीं जयंती का आयोजन किया गया। नगर पालिका तिराहा स्थित उनकी प्रतिमा पर लोगों ने माल्यार्पण किया। इस मौके पर जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने कहा कि आजमगढ़ ऋषि-मुनियों और साहित्यकारों की धरती है। हिंदी नाटक के जनक एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. लक्ष्मी नारायण मिश्र का विश्वस्तरीय काव्य, कालजयी नाटक एवं कहानी के साथ-साथ एकांकी पर मानो एकाधिकार रहा। उनके नाटक सिंदूर की होली, रासक्ष का मंदिर, सन्यासी समेत लगभग 100 एकांकी नाटक साहित्य तत्कालीन भ्रष्ट व्यवस्था का जीवंत उदाहरण थे।
8 अगस्त 1942 को अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में भी इस कलमकार ने न सिर्फ लेखनी को गति दी, बल्कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से स्वतंत्रता आंदोलन में अपना योगदान दिया। उनके साहित्य तत्कालीन समाज के साथ-साथ वर्तमान समाज के लिए भी काफी प्रेरणादायी होंगे। कार्यक्रम के अंत में स्व. मिश्र के पौत्र आशुतोष मिश्रा ने अतिथियों को पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी परीक्षित खटाना, साहित्यकार प्रेमीजी, प्रो. वेद प्रकाश उपाध्याय, प्रो. इंद्रजीत, डॉ. गिरिजेश, डॉ.जयप्रकाश, अधिवक्ता शत्रुघ्न सिंह, प्रमोद सिंह, सेंट्रल बार के मंत्री राणा अजेय सिंह, सिविल बार के पूर्व मंत्री जगदंबा पांडेय आदि उपस्थित रहे।

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