
जेल से निकलते ही पुराने अंदाज में लौटे आजम खां, शुरू हो गई शेरो-शायरी, बसपा में जाने पर भी बोले
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां 23 महीने बाद मंगलवार की सुबह सीतापुर जेल से बाहर आ गए। बाहर आते ही उनका पुराना वाला शायराना अंदाज दिखाई दिया। जेल के अंदर से ही कार में बेटे के साथ बाहर आए आजम ने पत्ता-पत्ता, बूटा-बूटा हाल हमारा जाने… गाकर मीडिया के सवालों का जवाब दिया।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां 23 महीने बाद मंगलवार की दोपहर सीतापुर जेल से बाहर आ गए। बाहर आते ही उनका पुराना वाला शायराना अंदाज दिखाई दिया। जेल के अंदर से ही कार में बेटे के साथ बाहर आए आजम ने अपने हाल को बयां करते हुए पत्ता-पत्ता, बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है… कहकर अपनी बात शुरू की। बसपा में जाने की अटकलों पर भी दो टूक जवाब देकर कई चर्चाओं पर विराम लगा दिया। आजम खां को पिछले हफ्ते हाईकोर्ट ने जमानत दी थी। इसके बाद सोमवार की शाम उनका परवाना जेल पहुंचा और चालान आदि जमा करने की औपचारिकता पूरी करने के बाद रिहा कर दिया गया।
आजम खां ने मीडिया से बात करते हुए बसपा में जाने की अटकलों पर कहा कि जो लोग अटकलें लगा रहे हैं वही इस बारे में कुछ बता पाएंगे। जेल में तो मेरी किसी के मुलाकात नहीं होती थी। किसी को कोई राफ्ता ही नहीं था। जेल से फोन करने की भी मुझे इजाजत नहीं थी। पहले तीन साल और अब दो साल यानी पांच साल तो देश दुनिया से बिल्कुल अलहदा रहा।
यूपी में योगी सरकार आने के बाद आजम खां पर एक के बाद एक 72 मुकदमे दर्ज हुए और जेल में जाना पड़ा। जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार ने उनसे कोई बदला लिया है? इस पर आजम ने कहा कि बदला तो वहां होता है जहां किसी के साथ बुरा किया हो। मैंने तो दुश्मनों के साथ भी बहुत अच्छा सलूक किया है। पूरी सरकार में कोई नहीं कह सकता कि मेरी कलम से किसी के साथ नाइंसाफी हुई है।
दस साल पहले वाला चिर-परिचित अंदाज
सपा के दिग्गज नेता आजम खां दस साल पहले वाले अपने चिर-परिचित अंदाज में दिखाई दिए। उन्होंने हमेशा की तरह सफेद कुर्ता और काली वास्केट पहनी हुई थी। आंखों पर काला चश्मा भी लगा था, लेकिन उनकी ख़ास काली टोपी उनके सिर पर नहीं दिखाई दी। सफेद इनोवा में सवार होकर वह लगभग 12.18 पर जेल से बाहर निकले। उन्होंने हमेशा की तरह हाथ हिलाकर अपने समर्थकों का अभिवादन किया। जब तक भीड़ दिखाई दी, वह हाथ हिलाते रहे। चेहरे पर हल्की मुस्कुराहट भी आती रही।
फिलहाल तो आजम खां की सेहत और अंदाज़ में कोई कमी नहीं दिखाई दी। उन्हें देखने के लिए समर्थकों की भीड़ जुटी रही। वह अपनी कार में आगे की ओर बैठे। पीछे उनका बेटा अदीब आजम व दो करीबी बैठे नजर आए।
हाईवे पर 10 मिनट रुके, समर्थकों से मिले
जिला जेल के पास पुलिस ने आजम की गाड़ी में ब्रेक नहीं लगने दिया लेकिन गाड़ी शहर कोतवाली की सीमा से पार होते ही रुक गई। कांशीराम कालोनी के पास हाईवे पर आजम का काफिला करीब 10 मिनट तक रुका रहा। इस दौरान वह गाड़ी से नहीं उतरे लेकिन उनको सैकड़ों समर्थकों ने घेर लिया। उन्होंने सभी का अभिवादन किया।
जिला जेल से निकलते समय आजम केवल एक सफेद रंग की इनोवा गाड़ी से थे लेकिन कांशीराम कालोनी के पास रुकते समय उनके काफिले में 50 से ज्यादा लग्जरी गाड़ियां शामिल हो गईं। इस दौरान आजम खान जिन्दाबाद के नारे भी लगे। वह करीब 10 मिनट के बाद ही वहां से रामपुर के लिए रवाना हो गए।
गौरतलब है कि आजम खां को योगी सरकार के दौरान दो बार जेल में रहना पड़ा है। पहली बार उन्हें 27 महीने और दूसरी बार 23 महीने तक जेल में बिताने पड़े। मई 2022 में जमानत पर रिहा होने के बाद आजम खां केवल 17 महीने ही बाहर रह सके थे। इसके बाद उन्हें फिर से 2023 में जेल जाना पड़ा।
आजम के बाहर आते ही बयानबाजी भी तेज हो गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आजम खां की रिहाई को न्याय और समाजवादियों की जीत बताया है। कहा कि आजम खान जी की रिहाई उनके और उनके परिवार और हम सब के साथ-साथ, उन सब लोगों के लिए राहत और ख़ुशी की बात है जो ‘इंसाफ़’ में ऐतबार करते हैं। न्याय में विश्वास को बनाए रखने के लिए अदालत का दिल से शुक्रिया।
अखिलेश ने कहा कि आज फ़र्ज़ी मुकदमे करने वालों को भी ये सबक मिल गया है कि हर ‘झूठ’ की एक मियाद होती है और हर ‘साज़िश’ की भी। जो लोग सामाजिक सौहार्द के प्रतीक होते हैं, भाजपा को वो कभी अच्छे नहीं लगते हैं। आज़म खान जी एक बार फिर से हर उपेक्षित, पीड़ित, दुखी, अपमानित के साथ खड़े होकर, भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों के द्वारा किये जा रहे जनता के दमन के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएंगे और हमेशा की तरह देश-प्रदेश की भावनात्मक एकता के प्रतीक बनकर, समाजवादी मूल्यों और सिद्धांतों के साथ, सामाजिक न्याय के संघर्ष की राह पर आगे बढ़ते जाएंगे!

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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