
अखिलेश ही नहीं, मुलायम सिंह पर भी दबाव बनाते थे आजम, नेता जी भी मनाने गए थे रामपुर
आजम खान सपा प्रमुख अखिलेश यादव ही नहीं उनके पिता मुलायम सिंह पर भी दबाव बनाते थे। मुलायम सिंह यादव भी साल 2019 में इसी प्रकार से आजम को मनाने रामपुर आ चुके हैं। दरअसल बुधवार को अखिलेश आजम से मिलने रामपुर पहुंचे थे।
सपा नेता आजम खान का राजनीति में आने के बाद से ही मिजाज अलग रहा है। उनका अंदाज, तेवर, रूठना अक्सर सुर्खियां बनता रहा है। बुधवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ही नहीं बल्कि उनके पिता मुलायम सिंह यादव भी साल 2019 में इसी प्रकार से आजम को मनाने रामपुर आ चुके हैं। दरअसल, रूठकर दवाब बनाना और बात मनवाना...आजम का पुराना शगल रहा है।
आजम खान सार्वजनिक तौर पर अपनी नाराजगी जाहिर करने में भी कभी नहीं चूकते। उनका गुस्सा हमेशा ही सुर्खियों में रहा और पार्टी के लिए कई बार असहज स्थिति पैदा की। 1977 में जनता पार्टी से पहली बार रामपुर से लोकसभा से चुनाव लड़ने और हारने के बाद आजम खान 1985 में मुलायम सिंह यादव से जुड़े। उसके बाद से वह लगातार उनके साथ रहे हैं। बीच में अमर सिंह से विवाद के कारण कुछ समय के लिए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। विषम परिस्थितियों में मुलायम के पीछे चट्टान की तरह खड़े रहने वाले आजम ने एक विश्वस्त सहयोगी के तौर पर अपनी पहचान बनाई।
बात वर्ष 2009 के चुनाव की है। तब अमर सिंह के कहने पर मुलायम सिंह यादव ने रामपुर से जयाप्रदा को लोकसभा चुनाव लड़ा दिया था। इस पर गुस्साए आजम खान पार्टी से अलग हो गए थे, यहां तक कि फिरोजाबाद के उपचुनाव में अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को इसका नुकसान उठाना पड़ा। वह राजबब्बर से चुनाव हार गई थीं। इसके बाद मुलायम उन्हें मनाने के लिए रामपुर आए थे। अमर सिंह से अदावत के चलते आजम को पार्टी से बाहर कर दिया गया था। इसी बीच आगरा में सपा का राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ, जिसमें मुलायम सिंह यादव और कल्याण यादव गले मिले थे, इस पर आजम ने नेताजी पर भी खूब तंज कसा था।
जब आजम ने इस्तीफा उठाकर जेब में रख लिया
आजम खान सपा मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव को कई बार इस्तीफा दे चुके हैं। बुधवार को अखिलेश से मिलने के बाद मीडिया से बातचीत में आजम ने त्याग पत्र देने की आदत को स्वीकार भी किया। एक निजी चैनल पर उन्होंने कहा कि हां, नेताजी को अक्सर इस्तीफा दे देता था। एक बार तो जैसे ही मैंने इस्तीफा दिया, नेताजी ने इस्तीफा मेज पर रखा और सचिव को बुला लिया, उनसे कहा-राज्यपाल से टाइम लो, मैंने पूछा-नेताजी कोई बात हो गई, वह बोले-मैं बार-बार के तुम्हारे इस्तीफे से तंग आ चुका हूं, चलतें हैं सरकार से ही इस्तीफा दे देते हैं। आजम ने कहा कि यह सुनते ही मैंने इस्तीफा मेज से उठाया और जेब में रख लिया।
आजम के पहुंचने पर ही होती थी कैबिनेट
आजम खां का कहना है कि आज वे भले ही हमारे बीच नहीं हैं लेकिन, वह मुझसे बेपनाह मुहब्बत करते थे। जब तक मैं नहीं पहुंचता था, कैबिनेट की मीटिंग शुरू नहीं होती थी। ऐसे रिश्ते थे हमारे उनसे। एक बार मैं नाराज हो गया तो नंगे पांव सीएम मनाने के लिए मुझे आए, ऐसा कोई करेगा अब।
...नाराजगी अपनी जगह पर हैं वफादार
आजम सपा के संस्थापक सदस्य हैं। लिहाजा, सपा और वह एक-दूसरे के पूरक हैं। नाराजगी अपनी जगह है पर, आजम सपा के प्रति हैं वफादार। जब अमर सिंह ने आजम को पार्टी से बाहर निकलवा दिया था, उस वक्त सियासी गलियों में तरह-तरह के कयास लगाए गए लेकिन, आजम ने कोई पार्टी ज्वाइन नहीं की। जेल से बाहर आने के बाद आजम खां ने अखिलेश यादव को लेकर तंज कसे, चर्चा चली की आजम बसपा में जा सकते हैं लेकिन, आजम खां ने मीडिया में साफ कहा-इतना हल्का आदमी नहीं हूं, मेरा चरित्र है, मैं ऐसे सौदा करूंगा...। आजम के इस बयान ने कयासबाजों को खामोश कर दिया।





