592 मरीजों के भर्ती का दावा, मिले केवल 40, आयुष्मान योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

Mar 10, 2026 07:21 am ISTYogesh Yadav लखनऊ, विशेष संवाददाता
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लखनऊ के निजी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के नाम पर चल रहे बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ है। नेशनल और स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट की संयुक्त छापेमारी में पाया गया कि शान्या स्कैन हॉस्पिटल ने कागजों पर 592 मरीजों का दावा किया था, लेकिन मौके पर केवल 40 मरीज ही मिले।

592 मरीजों के भर्ती का दावा, मिले केवल 40, आयुष्मान योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

UP News: तमाम अस्पताल आयुष्मान योजना के नाम पर फर्जीवाड़े से बाज नहीं आ रहे हैं। नेशनल एंटी फ्रॉड यूनिट और स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट की संयुक्त कार्यवाही में इस संबंध में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में राजधानी लखनऊ के कई निजी अस्पतालों की कलई खुल गई है। जिस अस्पताल द्वारा 592 मरीजों का दावा किया गया था, मौके पर सिर्फ 40 ही मरीज मिले। कहीं ड्यूटी डॉक्टर नहीं थे तो कहीं उस जांच की सुविधा ही अस्पताल में नहीं थी, जिसका दावा किया गया था।

आयुष्मान भारत योजना के तहत किए जा रहे इलाज और दावों में गड़बड़ी की आशंका पर लखनऊ के कई निजी अस्पतालों की जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। लखनऊ स्थित शान्या स्कैन हॉस्पिटल ने 592 मरीजों को भर्ती दिखाते हुए दावा किया था जबकि निरीक्षण में केवल 40 मरीज ही भर्ती मिले। अस्पताल प्रबंधन इस पर कोई स्पष्ट जवाब भी नहीं दे सका। अस्पताल में बेड के बीच की दूरी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिली। अन्य कई कमियां थीं।

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जांच में सामने आया कि अस्पताल ने योजना के तहत मरीजों को पेट स्कैन और कीमोथेरेपी के लिए भर्ती दिखाया, जबकि वास्तव में केवल पेट स्कैन ही किया गया था। अस्पताल के पास कुल 28 बेड हैं, लेकिन उसके मुकाबले कहीं अधिक मरीजों को भर्ती दिखाया गया। इस मामले में अस्पताल को विस्तृत नोटिस जारी किया गया है।

अद्भुत हॉस्पिटल के निरीक्षण में भी गंभीर कमियां सामने आईं। अस्पताल के आईसीयू वार्ड में संक्रमण नियंत्रण के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। तीन ड्यूटी डॉक्टर होने चाहिए थे लेकिन निरीक्षण के समय कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। ओम साई हॉस्पिटल ने योजना के तहत 10 बेड दर्शाते हुए पंजीकरण कराया था, लेकिन मौके पर केवल पांच बेड ही मिले। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में कोई पूर्णकालिक ड्यूटी डॉक्टर और ओटी टेक्नीशियन भी मौजूद नहीं थे।

कहीं डॉक्टर गायब तो कहीं मरीज

अर्जुनगंज स्थित पुष्पांजली हॉस्पिटल के निरीक्षण में पोर्टल पर नौ मरीज दर्ज पाए गए, लेकिन मौके पर केवल एक ही आयुष्मान लाभार्थी मौजूद था। अस्पताल में कोई एमबीबीएस डॉक्टर नहीं मिला और दवाइयों का रखरखाव भी अव्यवस्थित मिला। वहीं शताब्दी हॉस्पिटल का संचालन भूमिगत बेसमेंट में किया जा रहा था। अस्पताल में आयुष्मान योजना से संबंधित हेल्प डेस्क नहीं था और योजना के टीएमएस पोर्टल के संचालन के लिए कोई प्रशिक्षित स्टाफ भी उपलब्ध नहीं मिला। अर्जुनगंज स्थित मेडी हेल्थ हॉस्पिटल में भी निरीक्षण के दौरान केवल एक एमबीबीएस डॉक्टर ड्यूटी पर थे। बायोमेडिकल वेस्ट का प्रमाणपत्र समाप्त हो चुका था और फायर एनओसी भी जारी नहीं की गई थी।

गड़बड़ी मिलने पर होगा निलंबन-डीइंपैनलमेंट

इन मामलों में राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित अस्पतालों को विस्तृत नोटिस जारी किया है। साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने मुख्य चिकित्साधिकारियों को भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि योजना से जुड़े अस्पतालों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मंडल स्तर पर विशेष टीमें गठित कर जांच अभियान चलाया जा रहा है। यदि जांच में अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो संबंधित अस्पतालों के खिलाफ निलंबन और डि-इम्पैनलमेंट की कार्रवाई की जाएगी।

Yogesh Yadav

लेखक के बारे में

Yogesh Yadav

योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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