
बोले अयोध्या-छुट्टा मवेशी बने आफत, बंदरों और कुत्तों से जीना मुश्किल
Ayodhya News - अयोध्या में आवारा कुत्तों और बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। लोग रात में सो नहीं पा रहे हैं और घरों में भी सुरक्षित नहीं हैं। कुत्तों के हमलों के कारण हर महीने 1500 से अधिक लोग एंटी रैबीज इंजेक्शन...
सरकारी स्तर पर छुट्टा मवेशियों को पकड़कर गोशालाओं में संरक्षित करने की कवायद लगातार चलती रहती है। लेकिन आवारा कुत्तों और बंदरों के आतंक से शहर ही नहीं गांवों में भी हर कोई परेशान है। कुत्तों के झुंड और उनके भौंकने से लोगों की रात की नींद हराम हो जाती है। वहीं शहरी क्षेत्र में बंदरों का आतंक इतना अधिक बढ़ गया है कि कोई अपनी छत पर न तो कपड़े फैला सकता है और न ही सामान हाथ में लेकर चल सकता है। अयोध्या में बंदरों के झुंड श्रद्धालुओं के हाथों से प्रसाद और खाद्य सामग्री को झपट्टा मारकर छीन लेते हैं।

वहीं घरों में जो लोग क्यारियां बनाकर उसमें फूल पौधे लगाते हैं उसे भी बंदर नहीं छोड़ते हैं। लोग चाहते हैं कि वह अपने घर की खाली छतों पर क्यारी बनाकर उसमें खेती कर सकें लेकिन बंदरों के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है। बहुत से लोगों ने बंदरों से बचाव के लिए लाखों रुपए खर्च करके घर की छतों पर जाल लगवा रखे हैं। वहीं आवारा कुत्ते गली मोहल्लों से लेकर सड़कों तक हर समय मंडराते रहते हैं। रात में अगर कोई अपने मोहल्ले की सड़क पर अकेला निकलता है तो कुत्ते उसे दौड़ाकर काट लेते हैं। वहीं छुट्टा मवेशियों के झुंड सड़कों और गलियों में हर समय विचरण करते रहते हैं। हालांकि, छुट्टा मवेशियों को पकड़कर गोशालाओं में डाला जाता है। इससे कुछ राहत कुछ ही दिनों तक रही। फिलहाल जनपद में 15 हजार से अधिक छुट्टा मवेशी सड़क दुघर्टनाओं और फैसलों की बर्बादी की वजह मुख्य वजह बन रहे हैं। वहीं शहरी क्षेत्र में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या लोगों में खौफ पैदा करती रहती है। वहीं सबसे अधिक समस्या बंदरों से है जो घर और बाहर दोनो जगह आतंक का पर्याय बने हुए हैं। अयोध्या। आवारा कुत्ते, छुट्टा सांड़ और सड़क पर घूमते छुट्टा जानवर, घरों में उत्पात मचाते बंदरों से आम जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। आए दिन बंदरों से डर से लोगों को चोटिल होना पड़ रहा है। कुत्तों के काटने की घटनाएं हर रोज हो रही हैं। शहरी आबादी में आवारा कुत्ते कई लोगों को शिकार बना चुके हैं। यही वजह है कि जिला अस्पताल में हर माह 1500 से अधिक लोग एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचते हैं। वहीं छुट्टा जानवर राह चलते लोगों को सींग मारकर घायल करते हैं तो खेतों में फसलों को भी चौपट कर रहे। लोगों का मानना है कि छुट्टा मवेशियों के लिए गोशालाएं तो बनायी गईं हैं। लेकिन आतंक का पर्याय बने बंदरों को पकड़ने और आवारा कुत्तों से निजात दिलाने के लिए भी शहर की सरकार को गंभीर प्रयास करना चाहिए। राजर्षि दशरथ मेडिकल कालेज दर्शननगर, श्रीराम अस्पताल, जिला अस्पताल हैं। इन सभी 57 जगह एंटी रैबीज इंजेक्शन लगता है। कुत्ते काटने पर एक व्यक्ति चार बार एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगता है। पूरे जनपद में नौ से 12 हजार प्रतिमाह एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाया जाता है। किसी भी अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन की कमी नहीं है। प्रदेश सरकार की ओर से गोवंश को संरक्षित करने के लिए गोशालाएं बनवा दी हैं, जहां हजारों गोवंश संरक्षित किये गए हैं। इसके बावजूद सड़कों पर छुट्टा जानवरों के जमघट लगे रहते हैं। लेकिन इनके बंदरों और आवारा कुत्तों के आतंक से लोगों को किस तरह से निजात मिलेगी, इस बड़ी समस्या के प्रति शहर की सरकार और शासन की ओर से अभी तक न तो कोई गाइड लाइन जारी हुई है और न ही इनसे निपटने के लिए कोई स्थायी समाधान की ओर से कदम बढ़ा है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर बनाने का निर्देश दिया गया है। लेकिन नगर निगम के पास अभी कोई शेल्टर नहीं है। निगम के ही लोगों की माने तो गोवंश को तो संरक्षित किया जा सकता है। लेकिन आवारा कुत्तों को संरक्षित करना और उन्हें शेल्टर होम में रखना बड़ी चुनौती है। शहर में 25 हजार से अधिक एक अनुमानित संख्या में आवारा कुत्ते हैं। यदि इन्हें पकड़ा भी जाए तो इनको रखने के लिए 40 से 50 शेल्टर होम बनाने होंगे। एक शेल्टर होम में यदि 500 कुत्ते रखे जाएं तो इसके लिए शहर से बाहर कम से कम एक शेल्टर के लिए एक एकड़ जमीन की जरूरत होगी। यह भी एक चुनौती होगी कि यदि कुत्तों को एक साथ शेल्टर में रखा जाता है तो उनके भोजन, दवा इलाज के साथ शेल्टर होम की साफ सफाई करना असमान्य समस्या को पैदा कर सकती है। आवारा कुत्तों से शहर के हर गली मोहल्लों में डरे सहमे रहते हैं बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग:अयोध्या नगर निगम क्षेत्र अन्तर्गत शहर के लगभग हर गली मोहल्लों के अंर्तगत 10 से 15 कुत्तों का झुंड रहता है। इससे साफ है कि एक झुंड में रहने से इनका आतंक भी तेज गति से बढ़ जाता है। जो यदि किसी पर हमला करते है तो एक प्लानिंग के तहत करते है। वही इनके झुंड की संख्या भी लगातार बढ़ती ही जा रही है। इन पर लगाम लगाना बेहद जरुरी हो गया है। अन्यथा इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते है। चौंक , रिकाबगंज, सिविल लाइन, नियावा, अंगुरीबाग, नजरबाग, हसनू कटरा, दिल्ली दरवाजा, इमामबाड़ा, राठ हवेली, नवगढ़, कश्मीरी मोहल्ला, अलीगढ़, साहेबगंज, रीडगंज, जमुनियाबाग, हैदरगंज, पुरानी सब्जी मंडी, सुभाषनगर, मोतीबाग, अशफाक उल्ला कॉलोनी, बजाजा, टकसाल , ठठरियां, देवकाली, वजीरगंज, नेवातीपुरा, नाका , रामनगर, रेलवे कॉलोनी, कौशलपुरी, नवीन मंडी, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, गद्दोपुर, अबूसरस्य, सआदतगंज के अलावा नगर निगम क्षेत्र के दर्जनों मोहल्लों और कॉलोनिया ऐसी हैं जिनके लगभग हर गली में आवारा कुत्ते मिलते है, जो झुंड बनाकर रहते है। रात में इनका दबदबा रहता है। मोहल्लों में अनजाने लोगों पर हमला करते है तो अकेले नहीं करते है बल्कि कई कुत्ते एक साथ हमला करते है। ऐसे में डाग बाइट से बचना संभव नहीं हो पाता है। रहने की तंगी और खाने की परेशानी बनाती है आवारा कुत्तों को आक्रामक:सीएमओ कार्यालय में तैनात जिला महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद श्रीवास्तव के मुताबिक जिले में सीएचसी 14 और पीएचसी 29 और सात अरबन पीएचसी हैं। पशु चिकित्साधिकारी और जिला नोडल अधिकारी डॉ.विवेक शुक्ल कहते हैं कि कुत्ते के आक्रामक होने का एक कारण उनके लिए स्पेस और खाने की परेशानी है। ऐसे स्थान पर जहां पहले से ही कुछ डॉग्स हैं, वहां उनके लिए रहने और खाने का कम्पिटिशन बढ़ जाता है। उन्हें दूसरे कुत्तों से लड़ना पड़ता है। कुत्ते कॉलोनियों में ही रहते थे, लेकिन अब उन्हें सोसायटियों में घुसने भी नहीं दिया जाता है। जब कोई कुत्ता अंदर जाने का प्रयास करता है तो सिक्यॉरिटी गार्ड डंडा मारकर उसे भगा देते हैं। अक्सर बच्चे और बड़े भी किसी कुत्ते के पास आने पर उसे मारकर भगाते हैं। इंसानों के इस व्यवहार से कुत्तों में हमारे प्रति घृणा भर जाती है। वे इंसानों को अपना दुश्मन समझने लगते हैं और झुंड में होने पर हमला कर देते हैं। इस तरह की घटनाएं अक्सर बच्चों के साथ ज्यादा होती हैं। झुंड का लीडर किसी बच्चे को देखकर उस पर हमला करता है और बाकी डॉग्स उसे फॉलो करते हैं। नगर निगम की बैसिंह गौशाला में क्षमता से अधिक गोवंश हैं संरक्षित:नगर निगम की बैसिंह गौशाला में इस समय 4600 से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। जबकि यहां केवल 3600 गोवंश को रखे जाने की क्षमता है। यही वजह है कि पकड़े जाने के बाद भी छुट्टा मवेशी शहर की सड़कों पर विचरण करते दिखते हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के खेतों में पहुंचकर लगी फसलों को नष्ट कर रहे हैं। किसान फसलों की रखवाली में दिन-रात जुटे रहते हैं। इसके बावजूद भी अपनी गाढ़ी कमाई की फसलों को नहीं बचा पा रहे हैं। गांवों में आवारा पशुओं का आतंक कुछ ज्यादा ही है। इन झुंडों में अधिकांश जानवर ¨हसक हो चुके हैं। बताते हैं कि रात को खेतों में अवारा पशुओं के झुंड आ जाते हैं। फसलों को चरकर व पैरों से रौंदकर चले जाते हैं। सुरक्षा के लिए खेत के चारों ओर तारों की बाड़ लगा रखी है, लेकिन पशुओं के झुंड तारों के बाड़ को लांघकर खेतों में घुस जाते हैं। हाल ही में इस मामले को लेकर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक फरमान जारी किया है। निर्देश दिये गए हैं कि अधिकारी छुट्टा घूमने वाले पशुओं को गौशाला तक पहुंचाएं। बोले लोग सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद गांव से लेकर शहर तक छुट्टा गोवंश घूम रहे हैं जिनसे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। लेकिन जिम्मेदार इस गंभीर मुद्दे पर भी अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। इन्द्रसेन प्रदेश सरकार को प्रत्येक ग्राम पंचायत मे एक गोशाला निराश्रित पशुओं के लिए खोलनी चाहिए साथ ही उसकी निगरानी के लिए एक राजपत्रित अधिकारी की व्यवस्था करे तभी इनके आंतक से राहत मिल सकती है। अमरजीत यादव गांव की सड़क हो,शहर की सड़क हो या राजमार्ग हो हर जगह छुट्टा गोवंशों का जमावड़ा लगा रहता है। रात्रि मे ये सड़क पर ही बैठे रहते है जिसके कारण आए दिन वाहन दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। आलोक कुमार छुट्टा गोंवंश से अभी तक किसान ही परेशान थे लेकिन अब पूरे जनपद मे राहगीर भी परेशान हैं। जिम्मेदार अधिकारी दुर्घटना होने के बाद या शिकायत होने पर पकड़ने का अभियान चलाते हैं कुछ दिन बाद फिर वैसे हो जाता है। अशोक कुमार फोटो 4 हमारी आलोकपुरी कॉलोनी में आवारा कुत्ते और बंदर इतने हो गए हैं कि घर से निकलना मुश्किल हो गया है l सबसे अधिक परेशानी बंदरों से है जो छत पर पड़े कपड़े उठा ले जाते हैं और अगर घर के आंगन में कोई पौधा लगाते हैं तो उसे भी बंदर नोच कर फेंक देते हैं l घर के अंदर भी बंदरों से कोई सुरक्षित नहीं है, बच्चों और बड़ों को मौका पाते ही दौड़ाकर काट लेते हैं। अनूप दुबे मोहल्ले में बंदरों और कुत्तों के आतंक के कारण घर से निकलना अत्यधिक मुश्किल हो जाता है क्योंकि ये सड़क पर बच्चों तथा अन्य लोगों को अपना शिकार बना लेते है अतः शासन-प्रशासन से यह उम्मीद है कि जल्द ही इन बंदरों और कुत्तों को अयोध्या से मुक्त करने का कष्ट करें। सचिन त्रिपाठी हमारी कॉलोनी में बंदरों का काफ़ी आतंक है। घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। मेरे मकान के द्वितीय तल पर दिन भर बंदरों का जमावड़ा रहता है, उन्हें भागने का प्रयास करने पर बेहद आक्रामकता के साथ काटखाने दौड़ते हैं। बंदरों के कारण मेरा परिवार डरा - सहमा रहता है। शासन - प्रशासन से मेरी अपील है कि उपर्युक्त समस्या का संज्ञान लेते हुए शीघ्र यथोचित निराकरण किया जाए। डॉ नंदराम, असिस्टेंट-प्रोफेसर बंदर, कुत्तों और छुट्टा जानवरों का अयोध्या शहर में आतंक फैला हुआ हैl नियावा क्षेत्र में तो बन्दर आक्रामक होकर लोगों को काटा करते हैंl राहगीरों और स्थानीय निवासियों को परेशान करने के साथ घरों मे भी अंदर चले जाते है। गाड़ियों के शीशे बोनट और छत पर कूद कर नुकसान कर देते हैं। जानवरों की संख्या अधिक होने के कारण स्थानीय निवासी परेशान हो रहे हैं l शिवम पांडे अधिवक्ता बंदरों के लिए अभ्यारण की व्यवस्था कराई जानी चाहिए। दिन-प्रतिदिन इनकी संख्या बढ़ती चली जा रही है। आक्रामक होकर लोगों को घायल कर रहे हैं। इसके बचाव के उपाय जरूरी हैं। स्थिति दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। पंकज आर्य बंदरों के आतंक के कारण स्थानीय लोग भी सहमे हुए हैं । बच्चों को अकेले घर से बाहर भेजने में भी डर लगता है कुछ दूरी पर ही स्कूल होने के बावजूद वह नहीं जा पाते हैं। क्योंकि बंदर बच्चों को देखकर उन्हें काटने के लिए दौड़ते हैं। जिससे गिरकर भी बच्चे घायल हो जाते हैं। संदीप सिंह जिस तरह कुत्तों के जनसंख्या रोकने के लिए सरकार द्वारा उपाय किए जा रहे हैं इस तरह बंदरों की जनसंख्या को रोकने के लिए भी उपाय जरूरी है क्योंकि आने वाले समय में यह बहुत बड़ी दिक्कतों का कारण हो जाएंगे। इनकी जनसंख्या रोकने के इंतजाम अभी से जरूरी हैं। आशुतोष सक्सेना रामनगरी से सटे गांव के लोग भी बंदरों की बढ़ती संख्या से परेशान हैं। किसान सब्जियों और फलों की खेती नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि फल बड़े होने के पहले ही बंदर उन्हें नष्ट कर दे रहे हैं। कई किसानों को रात में भी खेतों में सोना पड़ रहा है। यह समस्या लगभग एक दशक से बढ़ गई है। सुनील सिंह बोले जिम्मेदार आवारा कुत्तों को पकड़कर बंधयाकरण किया जा रहा है। एक सर्वे में करीब 22 हजार से अधिक आवारा कुत्तों की संख्या सामने आई थी। इनमें से 15 हजार कुत्तों का बंध्याकरण कराया जा चुका है। इसके अलावा पागल कुत्तों का इलाज किया जाता है जब तक कि वह ठीक नहीं होते हैं। फिलहाल नगर निगम की बैसिंह गौशाला में जो एबीसी सेंटर हैं उसमें 19 कुत्तों को रखा गया है। कुत्तों के लिए शेल्टर बनाने का अभी कोई शासनादेश नहीं है। बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग से कहा गया है। वन विभाग अपने जाल लगाकर बंदरों को पकड़ने का कार्य करता है। भारत, अपर नगर आयुक्त

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




