बोले अयोध्या: प्रशिक्षण से हुनर तो निखर रहा रोजगार के अवसर की दरकार

बोले अयोध्या: प्रशिक्षण से हुनर तो निखर रहा रोजगार के अवसर की दरकार

संक्षेप:

Ayodhya News - भारत सरकार ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना शुरू की थी, लेकिन यह योजना अब ठप हो गई है। युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देने के बावजूद उन्हें रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे हैं। कई संस्थाएं प्रशिक्षण कार्यक्रमों से पीछे हट गई हैं और सरकार की ओर से कोई दिशा निर्देश नहीं मिल रहे हैं।

Nov 21, 2025 05:36 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, अयोध्या
share

कम पढ़े-लिखे और स्कूल की शिक्षा बीच में छोड़ देने वाले युवाओं को प्रशिक्षण देकर उनको रोजगार उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार ने जुलाई 2015 में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना शुरू की थी। योजना के तहत पहले पांच वर्ष में एक करोड़ युवाओं को रोजगार मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया था। इस योजना के तहत निजी क्षेत्र की भागेदारी अर्थात पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत कौशल विकास केंद्र खोलकर तीन महीने, छह महीने और एक साल अवधि का प्रशिक्षण शुरू कराया गया था। प्रशिक्षण के लिए युवा का विभाग की ओर से प्रमाण पत्र के लिए रजिस्ट्रेशन किया जाता था और कोर्स पूरा करने के बाद प्रमाणपत्र दिया गया।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

समितियों और संस्थाओं के माध्यम से संचालित यह योजना कुछ वर्ष तक जोरशोर से चली लेकिन बाद में बेपटरी हो गई। सरकार ने प्रशिक्षण में पंजीकरण के माध्यम से प्रशिक्षण दिलाये जाने और प्रशिक्षित लोगों के रोजगार हासिल होने का आंकड़ा तो दुरुस्त कर लिया गया लेकिन युवाओं को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। ‘हिन्दुस्तान’ ने इस मामले को पहले भी प्रमुखता से उठाया था,लेकिन कई माह बीतने के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से कदम आगे नहीं बढ़ाया गया। बोले अयोध्या: प्रशिक्षण से हुनर तो निखर रहा रोजगार के अवसर की दरकार अयोध्या। सरकार की महत्वाकांक्षी कौशल विकास मिशन योजना के तहत जनपद में शहर से लेकर देहात तक एक दर्जन से ज्यादा संस्थान का संचालन शुरू हुआ था। किया जा रहा था। इन संस्थानों में रोजी रोजगार से जुड़े विभिन्न पेशे के लोगों को उनके पेशे से संबंधित तकनीकी जानकारी के साथ आश्रित बेरोजगार युवाओं को तकनीकी कौशल प्रदान किया जा रहा था। हालांकि यह महत्वाकांक्षी योजना जिले में कई माह से ठप पड़ी है। अभी सरकार की ओर से इस संबंध में कोई दिशा निर्देश नहीं मिला है। कहने का मतलब यह है कि विभागीय भाषा में अभी कोई लक्ष्य तय नहीं किया गया है। योजना को आगे चलाना है अथवा नहीं। इच्छुक अभ्यर्थियों को उनके पेशे से जुड़ी तकनीकी जानकारी का प्रशिक्षण दिया जाना है कि नहीं । प्रशिक्षण के लिए प्रवेश लिया जाना है कि नहीं। योजना संचालित भी होगी तो कितने संस्थाओं को अनुदान दिया जाएगा। यह सब अभी पर्दे के पीछे है। विभाग को सरकार से कौशल विकास मिशन के तहत दिए जाने वाले प्रशिक्षण के लिए लक्ष्य की दरकार है। वह भी तब जब वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 के समाप्त होने में केवल चार माह बचे हैं। वहीं तकनीकी कौशल हासिल कर अपने उन्नययन की आस लिए बैठे लोग भी इंतजार में हैं। केंद्र सरकार की ओर से लागू स्किल इंडिया मिशन की तर्ज पर कौशल विकास मिशन का श्रीगणेश किया गया था। मिशन के तहत युवाओं को विभिन्न प्रकार के व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान कर तकनीकी रूप से दक्ष बना बाजार के अनुरूप तैयार करना था। यह योजना विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं तथा प्रशिक्षण पार्टनरों के माध्यम से शुरू की गई थी तथा योजना के तहत निर्माण इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हार्डवेयर,फूड प्रोसेसिंग, फर्नीचर, हैंडीक्राफ्ट, ज्वेलरी निर्माण, लेदर टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर प्रशिक्षण समेत 40 प्रकार का पेशागत प्रशिक्षण दिया जा रहा था। मिशन के पीछे सरकार की मंशा पात्र युवाओं को उनके परंपरागत अथवा पसंद के व्यवसाय में प्रशिक्षित कर तकनीकी ज्ञान प्रदान करना था जिससे वह कुशल और अर्ध कुशल श्रमिक की परिभाषा से निकल कुशल की श्रेणी में आए तथा उनकी मजदूरी-मानदेय बढ़े और वह अपना स्वरोजगार शुरू कर सकें तथा उद्योग को भी बढ़ावा मिल सके। राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क के आधार पर संचालित इस प्रशिक्षण में समाज के कमजोर वर्ग महिलाओं, दिव्यांग और अल्पसंख्यकों के उन्नययन लिए आरक्षण का भी प्रावधान किया गया था। केन्दों पर संचालित पाठ्यक्रम में 30 फीसदी सीट महिलाओं और 20 फीसदी अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित थी। कौशल विकास मिशन के तहत अनुबंध पर संचालित प्रशिक्षण केदो में तीन माह,छह माह और एक वर्षीय कोर्स का संचालन शुरू किया गया था। शहर से लेकर गांव तक प्रशिक्षण केंद्र इस कौशल विकास मिशन अभियान के तहत वर्ष 2015 में शुरू इस योजना में जिले में प्रशिक्षण केंद्रों और प्रशिक्षणार्थियों दोनों की तादाद कम रही,हालांकि बाद में इनकी तादाद बढ़ी और शहर से लेकर देहात क्षेत्र तक कौशल विकास मिशन से जुड़े प्रशिक्षण केंद्र खुले।इन प्रशिक्षण केंद्रों में क्षेत्र के औद्योगिक स्थान और लघु उद्योगों में काम करने वाले अकुशल श्रमिकों के साथ परंपरागत पेशे से जुड़े लोगों को भी प्रशिक्षण दिया गया। सरकार की इस महत्वाकांक्षी कौशल विकास मिशन योजना का लाभ उठाकर तमाम लोगों ने अपने व्यवसाय और कारोबार को आगे बढ़ाया तथा प्रशिक्षित लोगों को संस्थानों में वेतन अथवा मानदेय बढ़ोतरी का लाभ मिला। योजना के तहत सरकार की ओर से संबंधित संस्था को प्रशिक्षण शुल्क और पाठ्यपुस्तकों व अन्य प्रशिक्षण-संबंधी स्टेशनरी की लागत की प्रतिपूर्ति की जाती थी। प्रशिक्षण की निर्धारित अवधि पूरी होने पर मूल्यांकन के लिए परीक्षा कराई जाती थी और उत्तीर्ण अभ्यर्थी को प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता था। साथ ही प्रशिक्षार्थी को अमूमन आठ हजार और पंजीकृत श्रमिक के खुद प्रशिक्षण हासिल करने पर अकुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के बराबर राशि की प्रतिपूर्ति का नियम है। कार्यरत श्रमिक के परिवार का सदस्य भी योजना में प्रवेश का पात्र है,बशर्ते श्रमिक का अंशदान अद्यतन हो। पंजीकृत श्रमिक के लिए उम्र सीमा 18-35 वर्ष,जबकि आश्रित पुत्र की अधिकतम आयु 21 वर्ष तय थी। वहीं आश्रित पत्नी व अविवाहित पुत्री के लिए कोई आयु सीमा नहीं रखी गई है। प्रवेश के लिए श्रम कार्यालय,तहसीलदार कार्यालय,खंड विकास अधिकारी आदि के यहां निर्धारित प्रारूप पर किया जा सकता है। महात्वाकांक्षी योजना हो रही बेपटरी अयोध्या। वर्तमान समय में यह महत्वाकांक्षी योजना बेपटरी हो गई है। प्रशिक्षण केंद्रों का संचालन करने वाली समितियों और संस्थाओं ने अपना हाथ खींच लिया है अथवा उनके अनुबंध का नवीनीकरण नहीं हुआ है। संचालित केंद्रों से बोर्ड और फर्नीचर समेत अन्य व्यवस्थाएं हटा दी गई हैं और इन स्थानों पर दूसरा कारोबार शुरू हो गया है। वर्तमान में युवाओं को कोशल तथा तकनीकि का प्रषिषण देने के जिम्मा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं के पास ही रह गया है। जहां परंपरागत और वर्तमान की मांग के अनुरूप आधुनिक उपकरणों और कोर्सों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मगर प्रशिक्षण हासिल युवओं के समक्ष क्षेत्रीय स्तर पर श्रमिकों और कौशल के मन का अभाव तथा अपना रोजगार शुरू करने के लिए पूजी के रूप में ऋण प्राप्‍त करने में आने वाली दिक्क्त है। योजना से जुड़े युवाओं का कहना है कि शुरू में योजना का टेलिकॉम कंपनियों की मदद से मैसेज भेजवा जोर-शोर से प्रचार-प्रसार किया गया। प्रशिक्षण से जुड़ने के लिए योजना के तहत मोबाइल कंपनियों ने मैसेज भेज फ्री ट्रोल नंबर दिया था। जिस पर मिस कॉल के बाद फोन आता था और आईवीआर सुविधा से जोड़ पूरी जानकारी लेकर कौशल विकास योजना के सिस्‍टम में सुरक्षित कर ली गई। इसी डाटा के आधार पर निवास स्‍थान के आस-पास ट्रेनिंग सेंटर से जोड़ा गया था। मगर प्रशिक्षण हासिल करने के बाद नौकरी और रोजगार की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। प्रमुख कारण यह ही है कि उद्योग और कारोबार का लगातार केन्द्रीयकरण होता जा रहा है। प्रशिक्षण के बाद भी रोजगार न मिलने से होती है समस्या अयोध्या। प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके छात्रों का कहना है कि हर माता-पिता का सपना होता है कि कौशल प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद उसके बच्चे को नौकरी मिल जाए लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। युवाओं को रोजगार देने के लिए विभिन्न कंपनियां जनपद भर में कैंप लगाती हैं लेकिन बेरोजगार युवाओं की भारी संख्या के चलते सबको रोजगार देना संभव नहीं हो पाता है। इसके साथ ही कंपनियों की मनमानी के चलते अधिकांश युवक दो चार माह के बाद ही नौकरी छोड़ कर चले आते हैं और दूसरी नौकरी की तलाश में शहरों की खाक छानते रहते हैं। फिर भी योग्यता के अनुसार न तो नौकरी मिल पाती है और न ही तनख्वाह मिल पाती है। फिर भी मजबूरी में प्राइवेट नौकरी करनी पड़ती है। युवक सरकारी नौकरी के चाहत में तकनीकि पढ़ाई करने की तरफ रुख कर रहे हैं। आज के युवा आईटीआई के अंतर्गत कराये जाने वाले विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं इसके एवज में मोटी फीस भी भरते हैं। लेकिन समय पर भर्ती न निकलने पर उन्हें हताशा ही हाथ लगती है। आईटीआई से इलेक्ट्रानिक्स ट्रेड में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे आशीष कुमार ने बताया कि आईटीआई करने के बाद रेलवे में आवेदन करने का भरपूर मौका मिलता था लेकिन निजीकरण के चलते अब भर्तियां ही कम निकलती हैं। इनकी भी सुनिए स्वरोजगार सबसे बड़ा क्षेत्र बनकर उभर रहा है। चुनौती और दुशवारियां तो इस क्षेत्र में भी है लेकिन सघर्ष तो करना ही है। सरकार को गांव-क्षेत्र में घर के आसपास ही प्रशिक्षण की व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए। - -दीपांकर कुमार सामान्य ज्ञान के साथ विषय की पढ़ाई तो जरूरी है। उससे ज्यादा जरूरी है, भविष्य में रोजगार अथवा स्वरोजगार योग्य कौशल की। इसलिए तकनीकि ट्रेड में प्रवेश करवा प्रशिक्षण हासिल कर रहा हूं। - आदर्श यादव आज हर क्षेत्र में कंप्यूटर का प्रयोग हो रहा है। टर्नर से प्रशिक्षण हासिल कर रहा हूं और संस्थान में आधुनिक मशीनों से इसका प्रैक्टिकल कराया जा रहा है। जिससे बाजार की मांग और चुनौती से पार पाया जा सके। - नीरज आज भी अदालतों में फैसले बोलकर लिखवाये जाते हैं। ऐसा नहीं है कि परंपरागत पाठ्यक्रमों की डिमांड नहीं है। हां,समय काल के हिसाब से बदलाव होते रहते हैं। पहले पेन्सिल का इस्तेमाल होता था मगर आज डिजिटल पेन का दौर है। - दिनेश कुमार दौर के हिसाब से पेशागत जरूरतों में बदलाव हुआ है लेकिन अभी भी कई क्षेत्रों में इसकी अच्छी मांग है। आधुनिक पाठ्यक्रंम और उपकरण तथा तकनीकि का प्रयोग शुरू हुआ है। ट्रिपल सी सर्टीफिकेट की भी मांग बनी हुई है। - विजय यादव पढ़ाई का लक्ष्य तो नौकरी हैं जिससे अपना और परिवार का भरण-पोषण हो सके। सरकारी-गैर सरकारी सभी क्षेत्रों में कौशल की ही मांग है। इसलिए राजकीय औद्योगिक प्रषिक्षण संस्थान के मशीनिष्ट ग्राइंडर ट्रेड में प्रवेश लिया है। - कृष्णा यादव बोले जिम्मेदार कौशल विकास मिशन योजना के तहत जिले में प्रशिक्षण केंद्र का संचालन किया जा रहा था। इसके लिए हर साल शासन से लक्ष्य निर्धारित किया जाता है, मगर इस बार अभी तक कौशल विकास प्रशिक्षण का शासन से कोई लक्ष्य नहीं आया है। रोजगार दिलाने के लिए लगातार मेले का आयोजन किया जा रहा है। - इंजीनियर अरुण कुमार, नोडल और प्रधानाचार्य राजकीय आईटीआई