
बोले अयोध्या:कर्ज मंजूरी हो और आसान बैंकों में न अटकी रहे फाइल
Ayodhya News - सरकार ने युवाओं को स्व रोजगार दिलाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत 21 से 40 वर्ष के युवाओं को ब्याज-मुक्त ऋण दिया जा रहा है। इसके अलावा, जिला उद्योग केंद्र द्वारा योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। महिलाओं को प्राथमिकता दी जाती है, और 4000 आवेदकों ने इस वर्ष आवेदन किया है।
सरकारी नैकरियों की दिनोंदिन घटती संख्या के कारण युवाओं को स्व रोजगार दिलाने और कारोबार में लगे लोगों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ओर से विभिन्न योजनाओं की शुरुआत की गई है। प्रधाममंत्री रोजगार योजना का दायरा बढ़ाया गया है और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना का संचालन किया जा रहा है। ज्यादातर योजनाओं को अमली जामा पहनाने और विभिन्न विभागों तथा ऋण प्रदाता बैंकों से समन्वय से बनाने की जिम्मेदारी जिला उद्योग केंद्र को सौंपी गई है। पेश है बोले टीम की एक रिपोर्ट... बाराबंकी। जिला उद्योग केंद्र से मुख्य रूप से सूक्ष्म,लघु मध्यम उद्यम के लिए वित्त पोषण तथा अनुदान की योजना चलाई जा रही है।
जिसमें मुख्यमंत्री युवा उद्यम योजना के तहत युवाओं को ज्यादा लाभ मिल रहा है। वर्तमान में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत युवाओं को अपना खुद का उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सीएम युवा उद्यम योजना चलाई जा रही है। योजना के तहत पात्र युवाओं को पांच लाख तक का ब्याज-मुक्त और गारंटी-मुक्त ऋण प्रदान किया जाता है, जिसमें परियोजना लागत का 10 फीसदी मार्जिन मनी सब्सिडी के रूप में दिया जाता है। पात्रता आयु वर्ग 21 से 40 वर्ष,शैक्षणिक योग्यता न्यूनतम 8वीं पास और किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से कौशल प्रशिक्षण प्रमाण पत्र या डिग्री-डिप्लोमा रखा गया है लेकिन इंटरमीडिएट को प्राथमिकता दी जाती है। योजना के तहत अधिकतम पांच लाख रूपये का वित्त पोषण कराया जाता है। जिला उद्योग केंद्र के तहत संचालित इन योजनाओं में महिलाओं के लिए कोई अलग से कोटा का निर्धारण नहीं किया गया है लेकिन लाभार्थियों के चयन में महिला आवेदकों को प्राथमिकता दी जाती है। योजना का लाभ लेने के लिए पात्र आवेदन को यूपी युवा साथी पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण करना होता है और विभाग से उद्यम पंजीकरण नंबर हासिल करना होता है। आवेदक को अपने ईमेल आईडी और पासवर्ड से लॉगिन की सुविधा मिलती है और फिर पोर्टल पर उपलब्ध उद्यमी मित्र योजना के पंजीकरण फॉर्म को भरना पड़ता है। इसके बाद आवेदन ऑनलाइन सीधे जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र को मिलता है तथा केंद्र की ओर से आवेदन का परीक्षण और साक्षात्कार के बाद इसे स्वीकृत कर संबंधित बैंक शाखा को अग्रसारित कर दिया जाता है। बैंक शाखा की ओर से परीक्षण कर ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों पर ऋण स्वीकृति कर वितरित किया जाता है। योजना के संबंध में ज्यादातर आवेदकों की शिकायत बैंक की ओर से ऋण न स्वीकृत करने की रहती है। महिला समूह बनाकर व्यवसाय शुरू करने के लिए बैंक की ओर से वित्तपोषण किया जाता है। हालांकि दिए गए ऋण की वसूली सुनिश्चित करने के लिए बैंको की ओर से ऋण की रकम को धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है। शासन की सख्ती के बाद बैंकों की ओर से समूहों को वित्त पोषण तेज किया गया है और निजी बैंक भी इस दिशा में सक्रिय हुए हैं, लेकिन समूहों का टर्न-ओवर कम होने के कारण उनको अपेक्षित वित्तीय मदद मिलने में परेशानी होती है। आंकड़ों पर गौर करें तो जिला उद्योग केंद्र की ओर से कागजात और पात्रता में कमी होने के अलावा सामान्य मामलों में आवेदन के अस्वीकृति के मामले कम ही आते हैं। मुख्य चुनौती बैंक से वित्त पोषण की ही होती है। ज्यादा से जयदा आवेदकों को योजनाओं के तहत वित्त पोषण कराने और अनुदान का लाभ दिलाने के लिए जिला प्रशासन के माध्यम से योजना के प्रगति की समीक्षा कराई जा रही है और बैंको को ज्यादा से ज्यादा योजनाओं पर वित्त पोषण के लिए कहा जा रहा है। योजनाओं को सफल बनाने के लिए शासन की ओर से सभी संबंधित विभागों और संस्थाओं को लक्ष्य दिया गया है तथा निगरानी समीटिशन के माध्यम से सभी को जिम्मेदार बनाया गया है। जिला उद्योग केंद्र की ओर से भी सीधे बैंकों से संवाद और पत्राचार किया जाता है। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष अभी तक सीएम युवा उद्यमी योजना के तहत कुल चार हजार आवेदकों ने आवेदन किया है, जिसमें से जिला उद्योग केंद्र की ओर से 3500 आवेदन स्वीकृत कर वित्त पोषण के लिए संबंधित बैंकों को भेजे गए। विभाग के आकड़ों के मुताबिक इनमें से आधे 1700 आवेदकों को विभिन्न योजनाओं पर परियोजना लागत के सापेक्ष ऋण स्वीकृत किया जा चुका है। स्वरोजगार शुरू करने के इच्छुक युवाओं का कहना है कि जिला उद्योग केंद्र की विभिन्न योजनाओं में परियोजना लागत अभी काफी कम है। विभाग की ओर से ज्यादातर पारंपरिक और कुटीर उद्योग पर वित्त पोषण किया जा रहा है जबकि उद्योग और कारोबार की देश-दिशा काफी बदल गई है। बाजार में बड़े कारोबारियों का उत्पाद सस्ता होने के कारण उनको बाजार में टिके रहने के लिए कड़ी मशक्क्त करनी पड़ रही है। कोई दोना पत्तल बना रहा तो कोई बुन रहा रस्सी:जिला उद्योग केंद्र की सीएम युवा उद्यमी योजना का लाभ लेकर जनपद के विभिन्न तहसीलों और ब्लाकों में महिला-पुरुष युवाओं ने स्वरोजगार शुरू किया है। इस स्वरोजगार के माध्यम से अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। साथ ही आसपास के जरूरतमंदों को रोजगार भी दे रहे हैं। कल्याण बरौली अरवत निवासी अंकित कनौजिया से योजना के तहत पांच लाख रुपया का ऋण लेकर दोना-पत्तल बनाने की छोटी मशीन लगाई है। दो अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। हैदरगंज निवासी मालती यादव ने दो लाख 24 हजार रूपये के वित्त पोषण से सिलाई-कढ़ाई सेंटर शुरू किया है और क्षेत्र की युवतियों को रोजगार का अवसर दे रही हैं। मया बाजार क्षेत्र के हैदरपुर जगदीशपुर नगहरा निवासी सोनी वर्मा ने पांच लाख की परियोजना लागत से प्लास्टिक रस्सी बुनाई की मशीन लगाई है। जबकि शहर के अमानीगंज क्षेत्र निवासी शिवम पांडेय ने पांच लाख की लागत की परियोजना से प्लास्टिक कंटेनर और बीकापुर के तेंदुआमाफी पारा पांडेय का पुरवा निवासी प्रियांशु यादव ने पांच लाख से अगरबत्ती-धूपबत्ती के निर्माण का कार्य शुरू किया है। ओडीओपी योजना के तर्ज पर किया जाए वित्त पोषण:युवा उधमियों का कहना है कि मशीनरी से लेकर कच्चे माल और श्रम शक्ति की दर में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। मुख्यमंत्री युवा उद्यम योजना स्वरोजगार के लिए आशा की किरण लेकर आई है और इससे अपना व्यवसाय खड़ा करने में मदद भी मिल रही है। सीएम युवा उद्यमी योजना के तहत अधिकतम वित्त पोषण अर्थात ऋण की राशि काफी कम है और अनुदान भी कम ही मिल पा रहा है। इससे ज्यादा अच्छी व्यवस्था तो प्रधानमंत्री रोजगार योजना में थी। युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए शुरू इस योजना में 25 लाख रूपये तक का वित्त पोषण किया जाता था। एक अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 तक के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में नए सूक्ष्म उद्यमों को स्थापित करने के लिए सहायता प्रदान की जा रही है। विनिर्माण क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों में रोजगार सृजन को बढ़ावा देना और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के माध्यम से कर्मचारियों को दो किश्तों में 15,000 रुपये तक और नियोक्ताओं को अतिरिक्त कर्मचारियों के रोजगार पर 3,000 रुपये प्रति माह प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता और सब्सिडी के तहत विनिर्माण क्षेत्र में अधिकतम 50 लाख और सेवा-उद्योग क्षेत्र में अधिकतम 20 लाख की परियोजना लागत पर लागत का 15 फीसदी अधिकतम 7,500 के सब्सिडी की व्यवस्था है। साथ ही व्यवसाय शुरू करने के लिए 15 से 20 दिनों का प्रशिक्षण दिलाया जाता है। प्रदेश की एक जनपद एक उत्पाद योजना में कारीगरों,श्रमिकों,उद्यमियों को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान कर स्वरोजगार को बढ़ावा देने इ लिए समुचित व्यवस्था की गई है।इसमें परियोजना 25 लाख तक की परियोजना लागत पर 25 फीसदी मार्जिन मनी व 25 से 50 लाख तक 20 फीसदी अथवा 6.25 लाख मार्जिन मनी तथा 50 लाख से डेढ़ करोड़ तक 10 फीसदी अथवा 10 लाख और डेढ़ करोड़ से अधिक की परियोजना लागत पर 10 फीसदी अथवा 20 लाख तक अनुदान का प्राविधान है। जिसके कारण जिले में क्रेसर उद्योग को बल मिला है। बोले लोग-3 छपाई का काम शुरू किया है। जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत आवेदन किया था। केंद्र से आवेदन स्वीकृत होने के बाद बैंक से पांच लाख रूपये का ऋण मिला है। इस ऋण से व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिली है। कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए पूंजी की व्यवस्था हो गई। -जितेंद्र प्रजापति काफी दिनों से शहर में कारोबार कर रहा हूं। महंगाई बढ़ने के साथ कारोबार में लागत बढ़ती जा रही है। अपने कारोबार को विस्तार देने के लिए रकम की जरूरत है। जानकर लोगों ने मुख्यमंत्री युवा उद्यम योजना के बारे में बताया है। ऑनलाइन आवेदन करना है जिसके लिए आवश्यक कागजात एकत्र कर रहा हूँ। -राकेश मौर्या घर पर खाली बैठी थी। परिवार के भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में दिक्क्त आ रही थी। जिसके लिए कुछ कारोबार करने को सोचा और जिला उद्योग केंद्र में आवेदन किया था। आवेदन स्वीकृत होने के बाद बैंक से ऋण मिला है और छोटे स्तर की धागा फैक्ट्री शुरू की है। आसपास की महिलाओं के साथ काम चल रहा है। -शारदा सिंह छोटा-मोटा काम धंधा शुरू करने के लिए जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से परियोजना बनाकर आवेदन किया था। पूजा-पाठ से जुडी सामग्री के निर्माण के लिए प्रदेश सरकार की योजना के तहत वित्तीय मदद मिली है। जिससे कारोबार शुरू किया है। परिवार के भरण-पोषण का खर्चा निकल जा रहा है। -कृपा सिंधु तिवारी छोटा-मोटा कारोबार भी शुरू करने में लाखों का खर्चा आ रहा है। मशीन से लेकर सब कुछ महंगा होता जा रहा है। जिसके कारण स्वरोजगार शुरू करने के लिए पूंजी बड़ी समस्या साबित हो रही है। सीएम युवा उद्यम योजना के तहत कारोबार शुरू करने के लिए शुरुआती मदद हासिल हो जा रही है। -दीपक कुमार पारंपरिक पेशा से जुड़े लोगों को सामने खुद को समय के साथ ढ़ालने की चुनौती है। हर काम-धंधे में मशीनों का प्रयोग बढ़ता जा रहा है और नए-नए संसाधन की जरूरत पड़ रही है। जिसको खरीदने के लिए ऋण ही एकमात्र सहारा है। बैंक वाले सीधे लोन देने के लिए तैयार नहीं होते। जिला उद्योग केंद्र से फ़ैल पास करवा लेने पर ऋण मिल जाता है। -पुदुन राम सरकार की ओर से तमाम योजना चलाई जा रही है लेकिन सभी में उम्र की सीमा तय है। हमारी यंत्र 45 से ऊपर हो गई है। ऐसे में हम जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से सरकारी योजना के तहत ऋण और अनुदान के लिए आवेदन नहीं कर सकते। स्थानीय बैंक से वित्त पोषण के लिए बातचीत चल रही है। -प्रेम लाल बोले जिम्मेदार: इस बारे में उपायुक्त, उद्योग अमरेश कुमार पांडे का कहना है कि जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से मुख्यमंत्री युवा उद्यम योजना के अलावा अन्य योजनाओं से वित्त पोषण और अनुदान दिलाया जाता है। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के साथ अन्य में परीक्षण की व्यवस्था कराई जाती है। लाभार्थियों से नियमित संपर्क और संवाद के माध्यम से उनकी समस्याओं को जाना-समझा जाता है और उनका निराकरण कराया जाता है। ज्यादा से ज्यादा स्वीकृत लाभार्थियों को ऋण मिल सके और उनका कारोबार शुरू हो, इसके लिए बैंकों से प्रभावी पैरवी कर ऋण स्वीकृत कराया जा रहा है।

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