इचौलिया गौ-आश्रय योजना ताले में कैद, धन की बर्बादी
मवई के इचौलिया में सरकारी धन से बने अस्थायी गौ-आश्रय केंद्र का उद्घाटन 2024 में हुआ था, लेकिन यह अब तक चालू नहीं हो पाया है। इस परियोजना पर लगभग 11 लाख रुपये खर्च हुए हैं, फिर भी यह अस्तित्व में नहीं आई है। क्षेत्र के किसान छुट्टा गोवंश से परेशान हैं और फसलें बर्बाद हो रही हैं।

मवई, संवाददाता। रुदौली ब्लाक के ग्राम पंचायत इचौलिया में सरकारी धन से निर्मित अस्थायी गौ-आश्रय केंद्र लापरवाही की भेंट चढ़ गया है। वर्ष- 2024 को गौशाला का लोकार्पण हुआ था, लेकिन अभी तक प्रयोग में नहीं लाया जा सका है और मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ है। लगभग 11 लाख की लागत से इस परियोजना को मूर्त रूप मिला था और राज्य वित्त एवं 15वें वित्त आयोग से लगभग चार लाख रुपए तथा मनरेगा से लगभग सात लाख खर्च होने के बावजूद अस्तित्व में नहीं आ सका है। गौशाला परिसर पूरी तरह उजड़ा है। इस लापरवाही का खामियाजा क्षेत्र के किसान भुगत रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार छुट्टा गोवंश की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। दिन ढलते ही मवेशी सड़कों पर जमा हो जाते हैं जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो रही हैं। किसान रातभर जागकर अपनी मेहनत की फसल बचाने को मजबूर हैं। प्रधान जंग बहादुर बिजली कनेक्शन न होने को संचालन में बाधा बता रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि लोकार्पण से पहले बुनियादी व्यवस्थाएं क्यों नहीं सुनिश्चित की गईं। डेढ़ साल बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता और जवाबदेही नहीं तय की जा सकी।
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