
समिति में शामिल न होने वाले किसान डीएपी के लिए परेशान
संक्षेप: Ayodhya News - अयोध्या में किसान खरीफ और रबी सीजन के दौरान डीएपी उर्वरक की कमी से परेशान हैं। समितियों पर लंबी कतारों के बावजूद किसानों को डीएपी नहीं मिल रही है। कुछ समितियों में केवल सदस्यों को डीएपी दी जा रही है,...
अयोध्या,संवाददाता। एक तरफ जहां खरीफ कि सीजन में धान की फसल में यूरिया डालने के लिए किसानों को साधन सहकारी समितियों पर लंबी लंबी लाइनें लगाने के बाद भी यूरिया खाद कई दिनों के बाद मिल पा रही थी वहीं रबी सीजन के बुवाई के शुरुआती दौर में ही किसानों को डीएपी के लिए भटकना पड़ रहा है। इस समय किसान खेतों में आलू,सरसो व चने की बुवाई में लगे हुए हैं लेकिन सबसे जरूरी डीएपी उर्वरक बाजारों से नदारद है। किसान डीएपी के लिए साधन सहकारियों समितियों का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन वहां से भी उनको डीएपी नहीं मिल पा रही है।
कुछ समितियों पर डीएपी नहीं होने से सचिवों द्वारा किसानों को एनपीके खाद खरीदने के लिए कहा जा रहा है। किसानों का कहना है कि जिन समितियों पर डीएपी है भी वह सिर्फ वहां सदस्यता ग्रहण कर चुके किसानों को ही दिया जा रहा है। किसान विजय कुमार ने बताया कि जानकारी के अभाव में हमारे जैसे कई किसान अभी तक समितियों के सदस्य नहीं बन पाए हैं। ऐसे किसान डीएपी न मिलने से निजी दुकानदारों के यहां डीएपी के लिए चक्कर लगा रहे हैं। निजी दुकानदारों के यहां डीएपी न होने से उन्हें बिना खाद के ही बैंरग लौटना पड़ रहा है। वहीं निजी दुकानदारों का कहना है कि उर्वरक कंपनिया एक बोरी डीएपी के साथ दो बोरी एनपीके लेने की शर्त पर ही डीएपी दे रहे हैं। यदि हम लोग एनपीके खरीद भी लें तो किसान एनपीके लेना नहीं चाहते। एनपीके की बिक्री कम होने के चलते पूंजी फंसी रह जाती है इसी लिए हम लोग डीएपी नहीं ला पा रहे हैं। इस मामले में उपनिदेशक कृषि डॉ.पीके कनौजिया ने बताया कि समितियों पर डीएपी के साथ एनपीके का स्टाक मौजूद है। एनपीके डीएपी से बेहतर होती है क्योंकि इसमे तीन तत्व होते हैं। इस लिए किसानों को बेझिझक एनपीके का प्रयोग करना चाहिए। रही बात समिति पर सिर्फ सदस्यों को ही खाद मिल रही है तो मैं इसे दिखवाता हूं। ऐसे किसान जो समिति के सदस्य नहीं बने है उनको भी डीएपी उपलब्ध कराई जाएगी। ----

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