'परिस्थितियों से लोहा लेकर कांटों के पथ पर फूल खिलाए'
Ayodhya News - अयोध्या के दिव्यांग बच्चों ने अपनी अक्षमताओं को चुनौती के रूप में लिया है और सरकारी व प्राइवेट नौकरियों में सफलता प्राप्त की है। मुस्कान पुनर्वास केंद्र में उन्हें शिक्षा दी जाती है, जिससे वे समाज में अपने योगदान को महसूस कर सकें। आज कई दिव्यांग बच्चे विभिन्न कंपनियों में कार्यरत हैं और अपने परिवार की सेवा कर रहे हैं।

- सरकारी से लेकर प्राइवेट जॉब तक में लोहा मनवा रहे हैं दिव्यांग अयोध्या। अक्षमताओं से क्षमता पैदा कर, विकलांग से दिव्यांग कहाए । परिस्थितियों से लोहा लेकर ही, कांटों के पथ पर फूल खिलाए। दिव्यांगों ने शारीरिक कमी को चुनौती के रूप में लेकर बता दिया की हिम्मत और हौसला हो तो तरक्की के आड़े कोई रोड़ा नही बन सकता है। कुछ ऐसा ही जिले के दिव्यांग बच्चों ने हौसले से उड़ान भरी तो पूरी दुनिया ही मुट्ठी में कर ली। इन्होंने बता दिया है शारीरिक रूप से यह संपूर्ण नहीं है लेकिन जज्बे से सभी बुलंद हैं। राम धाम में मुस्कान पुनर्वास केंद्र है यहां दिव्यांगों को शिक्षित कर समाज के साथ खड़ा करने का गुर सिखाया जाता है,जिससे वह परिवार के ऊपर बोझ न समझे बने।
आज दिव्यांग जन दिवस के एक दिन पहले मंगलवार को एक कार्यक्रम के दौरान इन्होंने अपने क्रियाकलापों को परिभाषित कर बताया तो लोग दंग रह गए। उदाहरण के तौर पर धनंजय त्रिपाठी अमेजान कंपनी, सौरभ होटल जॉब, अनूप पांडे बिग बास्केट कंपनी, रजनीश यादव और अनिल यादव अमेजॉन कंपनी में कार्यरत हैं। अवलेश मिश्रा इंटर पास कर इन दिनों गोंडा में जिला पंचायत में कार्यरत हैं। मानसिक रूप से दिव्यांग कोमल नृत्य में निपुण हैं यह स्पष्ट बोल नहीं सकती किंतु समझती सब कुछ हैं। इसी तरह दर्जनों दिव्यांगों ने अलग-अलग क्षेत्र में अपने को स्थापित किया है। मुस्कान पुनर्वास केंद्र की निदेशक डॉ रानी अवस्थी कहती हैं कि इस तरह के बच्चों को केवल सहयोग करने की जरूरत होती है बाकी वह अपनी प्रतिभा के बल पर आगे बढ़ते रहते हैं। बच्चे सुन नहीं सकते बोल नहीं सकते फिर भी वह बहुत ही बुद्धिमान होते हैं। यह चेहरे की भाषा को पढ़ लेते हैं। इनके साथ भेदभाव नहीं सामान्य व्यवहार करना चाहिए। यह बहुत हुनरमंद होते हैं। बताती हैं कि पांच वर्षों के भीतर केवल अमेजॉन में ही 80 के लगभग बच्चे काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पढ़ाई पूरी कर ये होटल मैनेजमेंट की ट्रेनिंग प्राप्त करके तीन स्टार एवं फाइव स्टार होटलो में भी काम कर रहे हैं। दिव्यांग बच्चों नौकरी करके माता-पिता की सेवा कर रहे हैं प्रबंधक राघवेंद्र अवस्थी बताते हैं कि दिव्यांग बच्चे नौकरी करके माता-पिता की सेवा कर रहे हैं। कोई भी शरीर से कमजोर बच्चा बेकार नहीं घूम रहा है । सभी पढ़ाई के बाद स्वयं के पैरों पर खड़े हैं। ये इशारों में कहते हैं कि एक बार मुझे आजमा कर तो देखें हमें अवसर तो दें ,मेरी प्रतिभा को पहचानों हम वह सब कर सकते हैं जो की एक सामान्य व्यक्ति करता है। हम शांत दुनिया के लोग हैं। जन्म से कोई आवाज तो नहीं सुनी किंतु अपने प्रति भावों को बखूबी समझते हैं।
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