बोले अयोध्या...काम चलाऊ व्यवस्था में ठगे जा रहे उपभोक्ता

Mar 14, 2026 04:53 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, अयोध्या
share

Ayodhya News - भारत में ई-कॉमर्स के विस्तार के बीच उपभोक्ता संरक्षण से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतिशोध आयोग में एक साल से अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई है और दो साल से महिला सदस्य का पद भी खाली है। उपभोक्ता शिकायतों का निस्तारण समय पर नहीं हो रहा, जिससे उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बोले अयोध्या...काम चलाऊ व्यवस्था में ठगे जा रहे उपभोक्ता

दिनों दिन बाजार विस्तार ले रहा है। देश दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। ई-कॉमर्स में गांव गली तक अपनी पहुंच बना ली है। मगर बाजार के फैलाव में उपभोक्ता का संरक्षण सिकुड़ता जा रहा है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतिशोध आयोग में साल भर से अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो पाई और दो साल से महिला सदस्य का पद खाली है। तंत्र की लापरवाही से न्याय की आशा लेकर आने वाले उपभोक्ता को तारीख पर तारीख के हवाले होने को मजबूर होना पड़ रहा है। पेश है बोले हिन्दुस्तान टीम की एक रिपोर्ट... अयोध्या। उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण के लिए चार दशक पूर्व उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम लागू किया गया था।

बाजार के बदलते स्वरूप और इस अधिनियम की खामियों को देखते हुए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 लागू किया गया। 20 जुलाई 2020 को नया उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-2019 प्रभावी होने के बाद जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम का नाम बदलकर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग हो गया। साथ ही उपभोक्ता विवादों के समाधान के लिए तीन स्तरीय अर्ध न्यायिक तंत्र जिला आयोग,राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग प्राविधान किया गया। जिला और राज्य आयोगों में एक जैसे मामलों की भीड़ शुरू हुई तो जिला आयोग, राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग के अधिकार क्षेत्र नियम 2021 के तहत जिला आयोग के लिए 50 लाख,राज्य आयोग 50 लाख से 2 करोड़ और राष्ट्रीय आयोग के लिए 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का आर्थिक आधार तय किया गया। वर्ष 2020 में कचहरी में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतिशोध आयोग का कार्यालय स्थापित हुआ। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम- 2019 के प्राविधान के मुताबिक हर शिकायत का जल्दी से जल्दी निस्तारण किया जाना था और जहां शिकायतकर्ता के संबंधित सामान के विश्लेषण या जांच की जरूरत न हो,वहां विपक्षी पार्टी को नोटिस प्राप्त होने की तारीख से तीन महीने के भीतर फैसला लिया जाना था। जबकि विश्लेषण या जांच की जरूरत से जुड़े मामलों का पांच माह में निस्तारण करना होता है। त्वरित निस्तारण के लिए शिकायतों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दर्ज कराने के लिए ई-दाखिला पोर्टल लागू किया गया है। इसी ई-दाखिल में ई-नोटिस,केस से संबंधित दस्तावेज डाउनलोड करने का लिंक और वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई का लिंक,विपक्षी पार्टी की ओर से लिखित जवाब दाखिल करने,शिकायतकर्ता की ओर से प्रत्युत्तर दाखिल करने तथा मैसेज और ईमेल से सूचना दिए जाने की व्यवस्था की गई है। इतना ही नहीं उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण के लिए जागो ग्राहक,जागो अभियान चलाया जा रहा है और समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जाने की व्यवस्था है।मगर जमीनी हालात इसके इतर है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतिशोध आयोग को कचहरी परिसर में कार्यालय और न्यायालय भवन ही नहीं,बल्कि आवश्यक स्टाफ भी उपलब्ध कराया गया है। फर्नीचर से लेकर सभी आवश्यक संसाधन की उपलब्धता है और वर्ष 2020 के जुलाई माह में लोक निर्माण विभाग की ओर से इस कार्यालय और न्यायालय भवन का जीर्णोद्धार व मरम्मत कराई गई थी तथा अभी कुछ दिन पूर्व कचहरी के अन्य कार्यालय भवनों के साथ इसकी भी रंगाई-पुताई कराई गई है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपभोक्तओं के मामलों की सुनवाई के लिए अध्यक्ष समेत तीन सदस्यीय समिति के गठन का प्राविधान है। आयोग का अध्यक्ष सेवनिवृत्त जनपद न्यायधीश स्तर का न्यायिक अधिकारी होता है और उसके सहयोग के लिए एक महिला तथा एक अन्य सदस्य की शासन की ओर से तैनाती की जाती है। आयोग की ओर से बहुमत के आधार पर फैसला लिया जाता है। मगर दो वर्षों से शासन की ओर से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतिशोध आयोग में किसी महिला सदस्य का चयन ही नहीं किया गया। आयोग के अध्यक्ष पद पर भी एक साल से किसी की तैनाती नहीं हो पाई। वर्तमान में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतिशोध आयोग अंबेडकरनगर के अध्यक्ष सेवानिवृत्त जिला जज दयाराम यहां का अतिरिक्त कार्य देख रहे हैं और उनकी तैनाती साप्ताहिक की गई है। शासन की लापरवाही के कारण आयोग का कोरम पूरा न होने से मामलों के निस्तारण में विलंब हो रहा है और अधिकतम पांच माह में मामले का निस्तारण होने के बावजूद साल भर का समय लग जा रहा है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतिशोध आयोग में वर्तमान में 950 मामले लंबित चल रहे हैं। एक जनवरी से अब तक कुल 25 उपभोक्ताओं ने ही अपनी शिकायत दर्ज कराई है और दो सदस्यीय आयोग की ओर से इस वर्ष अब तक केवल 36 पुराने निस्तारण किया जा सका। उपभोक्ता विवादों को तेज और सौहार्दपूर्ण तरीके से निपटाने के लिए अधिनियम में उपभोक्ता विवादों को दोनों पक्षों की सहमति के साथ मध्यस्थता के लिए भेजने का प्राविधान है। जिससे न सिर्फ विवाद में शामिल पक्षों का समय और पैसा बचे,बल्कि लंबित मामलों की संख्या को भी कम किया जा सके। इसी के तहत समय-समय पर आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से भी उपभोक्ता से जुड़े मामलों का निस्तारण कराया जा रहा है।उपभोक्ता अधिकारों की जानकारी के अभाव में ठगे जा रहे लोग: बाजार के बढ़ते विस्तार और ऑनलाइन सेवाओं के दौर में उपभोक्ताओं की समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं,लेकिन जागरूकता के अभाव में अधिकांश लोग शिकायत दर्ज नहीं करा पाते। ई-कॉमर्स, फूड डिलीवरी, बिजली बिल, घरेलू उपकरणों की गारंटी और मोबाइल सेवाओं से जुड़ी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कई मामलों में उपभोक्ताओं को समय पर समाधान भी नहीं मिल पाता। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि ऑनलाइन खरीदारी में कई बार खराब या अलग सामान मिलने की शिकायतें रहती हैं, लेकिन उपभोक्ता फोरम तक पहुंचने की प्रक्रिया की जानकारी कम होने से लोग परेशान होकर चुप बैठ जाते हैं। वहीं फूड डिलीवरी और ट्रैवल एजेंसियों से जुड़ी शिकायतें भी बढ़ रही हैं। प्रभात वर्मा का कहना है कि ऑनलाइन खरीदारी में गड़बड़ी होने पर उपभोक्ताओं को कंपनी के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उपभोक्ताओं ने बताया कि बिजली बिल और मोबाइल सेवाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान में भी देरी होती है। कई लोग शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया से अनजान हैं। उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों और शिकायत निवारण व्यवस्था की जानकारी दी जानी चाहिए, तभी उन्हें राहत मिल सकेगी। जानकारों के अनुसार उपभोक्ता सुरक्षित उत्पाद, सही जानकारी, विकल्प चुनने, सुने जाने और निवारण का अधिकार रखते हैं। किसी भी तरह की समस्या होने पर जिला उपभोक्ता आयोग या ई-दाखिल पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज की जा सकती है।फैशन और यूज एंड थ्रो के दौर में चल रहा गारंटी की जगह वारंटी का फार्मूला:तकनीकी के विस्तार के साथ बाजार का स्वरूप भी बदल रहा है। हर दिन नई तकनीक के उपकरण और सामान बाजार में आ रहे हैं। सामानों का भाव और मांग घट बढ़ रही है। माल और शोरूम के इस दौर में क्वालिटी और कीमत से ज्यादा फैशन की मांग हो रही है,जिसके कारण लोगों के खरीदारी का ट्रेंड भी प्रभावित हुआ है। बाजार भी इसका फायदा उठा रहा है। छोटी-मोटी दुकान-प्रतिष्ठान से लेकर शोरूम और माल में आपको कपड़ों से लेकर अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं की दुकान पर फैशन के दौर में गारंटी की इच्छा न करें का बोर्ड अथवा बैनर दिख जाएगा। संबंधित उत्पाद को लेकर कोई शिकायत आने पर दुकानदार इसी का हवाला देकर हीलाहवाली करने लगता है। हालांकि जानकार कहते हैं कि यह उसके लिए भी फैशन जैसा है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण कानून उसको कहीं से बचत प्रदान नहीं करता। ऐसे मामलों को भी उपभोक्ता विवाद प्रतिशोध आयोग में खींचा जा सकता है।वर्तमान में बाजार में सबसे ज्यादा चकाचौंध डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स की है। इस क्षेत्र में लगातार नवाचार हो रहा है और बदलती तकनीकी के साथ उत्पाद का मूल्य भी गिर रहा है। वहीं लांच होने वाले उत्पाद को महंगे मूल्य पर बाजार में उतारा जा रहा है। भारी डिमांड और तकनीक में बदलाव के कारण कंपनियां ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को यूज एंड थ्रो के आधार पर बाजार में उतार रही है। उपभोक्ता संरक्षण कानून से खुद को बचाने के लिए कंपनियों ने गारंटी की जगह वारंटी का फार्मूला ईजाद कर लिया है। इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों मोबाइल घड़ी फ्री टीवी समेत अन्य की मरम्मत आदि का कार्य संबंधित कंपनियों की ओर से ठेके पर एजेंसियों को दे दिया गया है। अब तो विभिन्न पार्ट के सुरक्षा के नाम पर अतिरिक्त धन वसूली की जा रही है। उपभोक्ता विवाद प्रतिशोध आयोग के सुनवाई और निस्तारण की रफ्तार काफी धीमी होने के कारण उपभोक्ताओं का मोह भंग हो रहा है। वैसे भी बाजार के मनोविज्ञान से प्रभावित उपभोक्ता हर इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद को यूज एंड थ्रो के नजरिए से ही देखा है और इससे संबंधित शिकायत को चुनौती देने से कतराता है। वहीं उपकरणों में लगातार उन्नयन भी चुनौती की राह में बाधा खड़ा करता है। उपभोक्ताओं का कहना है कि नीचे से ऊपर तक सब तरफ केवल मल्टीनेशनल कंपनिया और पूंजी पत्तियों का प्रभुत्व चल रहा है। आज के दौर में किसके पास इतनी फुर्सत है कि जिला उपभोक्ता विवाद प्रतिशोध आयोग से लेकर राष्ट्रीय आयोग तक लड़ाई लड़े।बोले उपभोक्ता-:ऑनलाइन खरीदारी के मामलों में कई बार उपभोक्ताओं को खराब या गलत सामान मिल जाता है। शिकायत करने पर कंपनियां तुरंत सुनवाई नहीं करतीं। ऐसे में उपभोक्ताओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। जागरूकता बढ़े और शिकायतों का त्वरित निस्तारण होना चाहिए।-आशीष कुमारबिजली बिल और मोबाइल सेवाओं से जुड़ी शिकायतें अक्सर सामने आती हैं। कई बार उपभोक्ताओं को दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। समय पर समाधान न मिलने से लोगों में असंतोष बढ़ता है। विभागों को शिकायतों के निस्तारण में तेजी लानी चाहिए।-विवेक कुमारआज के समय में ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी सेवाओं का उपयोग तेजी से बढ़ा है। लेकिन गड़बड़ी होने पर उपभोक्ता कहां शिकायत करें, इसकी जानकारी कम होती है। लोगों को उपभोक्ता फोरम और ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था के बारे में बताया जाना चाहिए।-अनुपम जायसवालउपभोक्ताओं को अपने अधिकारों की पूरी जानकारी होना जरूरी है। सुरक्षित उत्पाद,सही जानकारी और शिकायत का निवारण हर उपभोक्ता का अधिकार है। जागरूकता कार्यक्रम बढ़ाए जाएं तो लोग ठगी और धोखाधड़ी से बच सकते हैं। सरकार को इस दिशा में और प्रयास करने चाहिए।-प्रदीप कुमारशहरी क्षेत्र के उपभोक्ता तो कुछ जागरुक हैं। लेकिन गांव के उपभोक्ताओं की स्थिति इस मामले में काफी दयनीय है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग सामान खराब होने पर दुकानदार के पास जाते हैं लेकिन उसके द्वारा न नुकुर करने पर चुप होकर घर बैठ जाते हैं।-आजादजनपद में बोर्ड का गठन न होने से काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। अपील करने के बाद काफी लंबा समय लग जाता है निर्णय आने में इससे उपभोक्ताओं को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है।-डब्ल्यू गुप्ताविगत तीन माह में कुल 25 उपभोक्ताओं ने उपभोक्ता फोरम में न्याय के लिए अपील की है। इससे ये पता चलता है कि उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के बारे में सही जानकारी ही नहीं है। जानकारी देने के लिए प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है।-गंगा प्रसाद शर्माबोले जिम्मेदार: इस बारे में जिला फोरम के अधिवक्ता राम शंकर तिवारी का कहना है कि आयोग का गठन तो कर दिया गया लेकिन अध्यक्ष और इसके सदस्य की नियुक्ति में लापरवाही बरती जा रही है, जिसके कारण उपभोक्ताओं को इस अदालत का लाभ नहीं मिल पा रहा।

Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।