सवा लाख श्रीराम नाम मंत्रों से यज्ञकुंड में दी जा रही आहुतियां
Ayodhya News - अयोध्या। संवाददाता श्रीशनि संकटमोचन मंदिर में चल रहे श्रीराम महायज्ञ के अवसर पर श्रीराम

अयोध्या। संवाददाता श्रीशनि संकटमोचन मंदिर में चल रहे श्रीराम महायज्ञ के अवसर पर श्रीराम नाम के सवा लाख मंत्रों से आहुतियां डाली जाएंगी। इस नौ दिवसीय महायज्ञ में प्रतिदिन वैदिक मंत्रोच्चार से आहुतियों के साथ श्रीमद वाल्मीकि रामायण व श्रीराम चरित मानस का नवाह्न पारायण भी चल रहा है। वैदिक आचार्यों के अलावा फिजी व आस्ट्रेलिया से आए श्रद्धालु गण भी श्रीराम चरित मानस का नवाह्न पारायण में सहभागी बने हैं। यज्ञाचार्य सीताराम दास ने बताया कि महायज्ञ की पूर्णाहुति 22 जनवरी को होगी। इस अवधि में सवा लाख मंत्रों के जप के हवन भी पूर्ण होगा। उधर महायज्ञ के साथ चल रही रामकथा में अन्तरराष्ट्रीय कथा व्यास महंत लल्लन दास ने भगवान राम के जन्म के उपरांत अनुजों सहित उनके नामकरण के कथा प्रसंग को भगवान की नाम महिमा के साथ विस्तार दिया।
उन्होंने बताया कि महाराज दशरथ के आग्रह पर गुरु वशिष्ठ जी ने सभी का नामकरण उनके गुणों के आधार पर किया। आचार्य प्रवर ने गुरु वशिष्ठ के हवाले से मानस की चौपाई जो आनन्द सिन्धु सुखरासी,सीकर ते त्रैलोक सुपासी, सो सुख धाम राम अस नामा, अखिल लोक दायक विश्रामा.."। आचार्य प्रवर ने कहा कि भगवान राम जो आनन्द के समुद्र और सुख की राशि है, जिसके एक कण से तीनों लोक सुखी होते है,उनका नाम राम है । उन्होंने कहा कि राजा दशरथ के सबसे बड़े पुत्र जो स्वयं में सुख का भवन और संपूर्ण लोकों को शान्ति देने वाले है। उन्होंने बताया कि राम शब्द दो बीजाक्षरों अग्नि और अमृत बीज से मिलकर बना है। यह अक्षर दिमाग, शरीर और आत्मा को शक्ति प्रदान करते हैं। व्यास पीठ का पूजन आरती फिजी की माता मान कुमारी व संयोजक पं. दवेन्द्र शर्मा के अलावा आस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड निवासी शर्मिला शर्मा, तुलसी राम शर्मा, फिजी की माता मान कुमारी, मोहनील चन्द, रेशमा मिश्रा, दुरपती मिश्रा, हषिभ मिश्रा व सुनील मिश्रा शामिल रहे।

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