
गीता जयंती: वाल्मीकि भवन में सामूहिक रूप से श्रीमद्भागवत गीता का हुआ पारायण
Ayodhya News - अयोध्या में गीता जयंती के अवसर पर महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता केवल हिंदूओं के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक है। गीता ने अर्जुन को युद्ध में कर्तव्य का बोध कराया। इस अवसर पर अनेक विद्वानों ने गीता का पाठ किया और भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं को महत्व दिया।
अयोध्या । श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अध्यक्ष व मणिराम दास छावनी के पीठाधीश्वर महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता सिर्फ हिंदूओं नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानव जाति का मार्ग दर्शन करती है। गीता भारतीय संस्कृति की आधारशिला है। हिन्दू शास्त्रों में गीता का सर्वप्रथम स्थान है। यह उदगार उन्होंने वाल्मीकि भवन में आयोजित गीता जयंती के अवसर पर व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि गीता में वह उपदेश है जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को दिया था। यह ग्रंथ मनुष्यों को उनके कर्तव्य का बोध कराती है । उन्होंने कहा कि महानायक योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के मुखारविंद से निकली श्रीमदभागवत गीता वर्तमान जगत के लिए अनुकरणीय मूलमंत्र है।

मोहग्रस्त अर्जुन को भगवान श्रीकृष्ण ने मोक्षदा एकादशी पर दिया था उपदेश: इसके पहले वाल्मीकि भवन मे हजारों की संख्या मे ब्रह्मचारी बटुकों व वैदिक विद्वान आचार्यों ने श्रीमद् भगवद्गीता का सस्वर पारायण किया। इन सभी को मणिराम छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन ने सम्मानित किया । इस दौरान उन्होंने कहा कि महाभारत युग में जो कुछ घटित होता है, उसके आधार पर कहा जा सकता है कि तत्कालीन समाज में मानवीय व्यवहार के अधिकांश मानक ध्वस्त हो चले थे। पाण्डवों के साथ अन्याय हुआ, यह बात जानते तो बहुत लोग थे ,पर उनके समर्थन में आने का साहस मुट्ठी भर लोगो ने किया और यही से असत्य, कदाचार, पापाचार अनाचार को जड़ मूल से समाप्त करने का पांचजन्य फूंककर श्रीमद भगवदगीता का जन्म हुआ । उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने मात्र 45 मिनट में मोहग्रस्त अर्जुन मे 701 श्लोकों द्वारा लोकहित में ज्ञान का संचार कर समाज को भयमुक्त करने वाला जो मंत्र दिया उस महामंत्र रूपी गीता में कहा अर्जुन तुम कहते हो युद्ध से हानि होगी, कुल -धर्म, जाति -धर्म सब नष्ट होगा जायेगा । यह क्यों नही सोचते कि लोक -हित का क्षेत्र कुल और जाति-हित से बड़ा होता है । इस अवसर पर श्रीमणिराम दास छावनी ट्रस्ट के सचिव कृपालु राम दास "पंजाबी बाबा", राम नाम बैंक के प्रबंधक पुनीत राम दास, महापौर गिरीश पति त्रिपाठी, विहिप मीडिया प्रभारी शरद शर्मा, संत जानकी दास, रामरक्षा दास, आनन्द शास्त्री, बलराम दास, सूर्य मणि त्रिपाठी , पंडित अनिरुद्ध शुक्ल, संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य राधेश्याम मिश्र, प्रधानाचार्य इंद्रदेव मिश्र, राम शंकर द्विवेदी, जगदीश जोशी, राजेंद्र पांडेय, विश्वनायक पंडित, धनंजय मिश्र, उमेश पांडेय, दीपक शास्त्री, महंत तुलसीदास नव्य न्यायाचार्य, महंत रामकृष्ण दास, विनय शास्त्री, विमल दास, भाजपा नेता विनोद गुप्ता व रोहित सिंह सहित अन्य मौजूद रहे। श्री कृष्ण मानवता के मार्गदर्शक हैं, सच्ची मनुष्यता उनके सानिध्य में हुई परिपक्व: अयोध्या। गीता जयंती के अवसर पर प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य राधेश्याम शास्त्री ने आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के क्रम में कहा कि जैसा भाव वैसे भगवान।भगवान के प्रेम में अपने-आप को खो देना ही सच्चा प्रेम है। हमारी आंखों की पुतली में वही चीज दिखाई देती है, जो सामने होती है। गोपियां सब जगह श्यामसुन्दर के दर्शन करती हैं। उन्होंने कहा कि भगवान से प्रेम की साधना जितनी सरल है उतनी ही कठिन भी। सच्चा साधक इस अलौकिक प्रेम की साधना में ऐसा सराबोर हो जाता है कि उसे संसार के राग-प्रपंच सुहाते ही नहीं। आचार्य प्रवर ने कहा कि संस्कार शास्त्रों में मिलते हैं,श्रृंगार बाजार में होता है, बाजारबाद की आत्म निर्भरता ने व्यक्ति को वहिर्मुखी बना दिया है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की कोई भी छाया हमारे चित्त पर नहीं पड़ी है। जिस दिन पड़ जायेगी गोपी गोप बनना ही पड़ेगा। इस मौके पर व्यवसायी नागरमल व विभोर मल ने व्यास पीठ का पूजन किया। ----

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