Ayodhya News: जान की परवाह किए बगैर सैकड़ों को मौत के मुंह से खींच लाए अन्नू मांझी
Ayodhya News: सरयू नदी में नाव चलाने वाले अन्नू मांझी की कहानी साहस और सेवा की मिसाल है। उन्होंने 10 साल की उम्र से नाव चलाना शुरू किया और 50 वर्षों में सैकड़ों लोगों की जान बचाई। उनके बेटे कुलदीप भी इसी राह पर चल रहे हैं। अन्नू का मानना है कि उनकी पूजा दूसरों की जान बचाने में है।

Ayodhya News: अयोध्या, संवाददाता। सरयू नदी में नाव चलाने वाले अन्नू मांझी की कहानी साहस और सेवा की मिसाल है। मात्र 10 साल की उम्र में नाव चलाना शुरु करने वाले अन्नू 50 वर्ष से अधिक गए हैं, लेकिन आज भी उनका काम जारी है। पिछले चार दशकों में उन्होंने सरयू में डूबते सैकड़ों लोगों की जान बचाई है। अच्छे कार्य के लिए उन्हें जिले के शीर्ष अधिकारियों द्वारा दर्जनों बार सम्मानित किया जा चुका है। उनका 26 वर्षीय बेटा कुलदीप भी उनके नक्शे कदम पर चल रहा है। अन्नू बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें नदी से लगाव था। 40 वर्ष पहले उन्होंने सरयू में नाव चलाने का काम शुरू किया उस समय उनके अलावा कोई और यह कार्य नही करता था क्योंकि नदी में सैर करने को लोग जान जोखिम में डालने के बराबर समझते थे।
लेकिन धीरे-धीरे यात्रियों के साथ नाव की संख्या बढ़ने लगी। उन्होंने बताया कि नाव चलाते-चलाते सरयू की गहराई का अंदाजा हो चुका है। 10 साल की उम्र से ही उन्होंने सरयू में डूबने वालों को बचाने लगे थे। धीरे-धीरे उन्हें लोग उन्हें रखवाले नाम से पुकारने लगे। स्थानीय लोगों की मुताबिक जब अन्नू अगर नाव में मौजूद हैं तो उनकी निगाहें चारो तरफ घूमती रहती हैं। जैसे वे किसी को डूबते देखते हैं तत्काल छलांग लगा देते हैं। वह कहते हैं जब तक हाथ पांव में ताकत है सरयू नदी में डूबते को बचाता रहूंगा ,यही उनकी पूजा है। उन्होंने बताया कि कितने लोगों की उन्होंने जान बचाई है कभी उसकी सूची नहीं बनाई। बताते हैं कि सप्ताह में लगभग दो लोगों को मौत के मुंह से जरूर खींच जरूर लाते हैं। उनसे सीख लेकर बृजेश, गोरख, टुली और नीलू मांझी सहित कई अन्य युवा भी यह साहसिक कार्य कर रहे हैं।


