राम मंदिर में नौकरियों के लिए कमीशन भी खाया? अनिल मिश्रा पर शिकंजा कसने की तैयारी में SIT!
अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले में पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा पर शक गहरा गया है। क्योंकि मिश्रा ने मंदिर में 125 लोगों को अपनी सिफारिश पर नौकरी दिलाई थी, अब SIT को इसमें कमीशनखोरी का भी शक है।

अयोध्या के राम मंदिर में चंदे की चोरी और हेराफेरी का मामला अब काफी बड़ा होता जा रहा है। इस मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा पर शक की सुई गहराती जा रही है। पुलिस ने जब पकड़े गए आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की, तो इस पूरे घोटाले में अनिल मिश्रा का नाम मुख्य आरोपियों के तौर पर सामने आया।
आपको बता दें कि अनिल मिश्रा और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने पिछले हफ्ते ही अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। इस मामले की जांच कर रही स्पेशल टीम (SIT) इन दोनों से पहले भी पूछताछ कर चुकी है।
नौकरी के बदले कमीशन का खेल?
जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। पता चला है कि मंदिर में काम करने वाले ज्यादातर कर्मचारियों को अनिल मिश्रा की सिफारिश पर ही रखा गया था।
सूत्रों के मुताबिक, मंदिर के कम से कम 125 कर्मचारियों को अनिल मिश्रा की पैरवी पर नौकरी मिली थी, जिनमें उनके कुछ रिश्तेदार भी शामिल हैं।
अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या इन नौकरियों को दिलाने के बदले कमीशन (घूस) लिया गया था?
इसके अलावा, अनिल मिश्रा की संपत्तियों की भी जांच हो रही है कि ट्रस्टी बनने के बाद उनकी कमाई और प्रॉपर्टी कितनी बढ़ी। मामले में गिरफ्तार दो आरोपी (अनुकल्प और लवकुश) भी अनिल मिश्रा के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं।
चाबी हाथ में और कैमरों से बचाव: ऐसे होती थी चोरी
पुलिस ने अब तक इस मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें सीसीटीवी फुटेज में पैसों की हेराफेरी करते हुए पकड़ा गया था। पूछताछ में चोरियों का जो तरीका सामने आया, वह हैरान करने वाला है।
गिरफ्तार आरोपियों में से एक, टिन्नू यादव के पास मंदिर के उस कमरे (काउंटिंग रूम) की चाबी थी जहां चंदे के पैसे गिने जाते थे। दूसरी चाबी बैंक वालों के पास होती थी। आरोप है कि टिन्नू ने बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर साठगांठ की और आसानी से चोरी को अंजाम दिया।
आरोपियों ने बताया कि अनिल मिश्रा से करीबी होने के कारण मंदिर में उनकी चेकिंग करने की हिम्मत कोई नहीं करता था। खुद अनिल मिश्रा भी कई बार पैसे गिनने के काम में बैठते थे।
आरोपियों को अच्छी तरह पता था कि कमरे में कैमरे कहां-कहां लगे हैं। पैसों की गड्डी पार करने के लिए वे एक खास तरीका अपनाते थे- एक आदमी कैश उठाता था और बाकी लोग उसके चारों तरफ खड़े होकर उसे कैमरों की नजर से छिपा लेते थे। इसके बाद उन पैसों को बाथरूम में छिपा दिया जाता था और मौका मिलते ही बाहर निकाल लिया जाता था।
कैसे गिने जाते हैं चंदे के पैसे?
नियम के मुताबिक, मंदिर में आने वाले नकद चंदे को गिनने की जिम्मेदारी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की है। इसके लिए एक प्राइवेट एजेंसी के 14 लोगों की टीम काम करती है, जिसमें 11 बैंक के कर्मचारी होते हैं और 3 मंदिर ट्रस्ट के सदस्य होते हैं। लेकिन इस कड़े पहरे के बावजूद, आपसी मिलीभगत से चंदे के पैसों पर डाका डाला जा रहा था।
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Shubham Sharmaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


