राम मंदिर ट्रस्ट में जगह के लिए आधा दर्जन संतों में होड़, शामिल करने के लिए प्राथमिकता भी तय
राम मंदिर दान चोरी के मामले के बाद दो सदस्यों के इस्तीफे और एक पद पहले से खाली है। इन पदों पर दावेदारी के लिए आधा दर्जन संतों में होड़ लगी है। ट्रस्ट ने इन पदों पर नि नियुक्ति के लिए प्राथमिकता भी तय कर रखी है।

राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यकारिणी की बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है। यह बैठक मणिराम छावनी में अपराह्न चार बजे से होगी। इसके पहले अपराह्न तीन बजे उसी स्थल पर एक अन्य बैठक होनी है। इसमें ट्रस्ट के रिक्त पदों पर नई नियुक्तियां यानी निर्वाचन किया जाना है। इसमें तीन नियमित/स्थाई ट्रस्टियों का मनोनयन होगा। इनके लिए संगठन से जुड़े पदाधिकारियों के अतिरिक्त आधा दर्जन संतों के नामों पर भी विचार विमर्श हो रहा है। सूत्रों की मानें तो ट्रस्ट में अयोध्यावासियों को प्राथमिकता मिलेगी, जिससे ट्रस्ट के कार्यों में अधिकतम सहयोग मिल सके।
बताया गया कि बाहरी व्यक्तियों के ट्रस्टी बनाए जाने पर वह यदा-कदा ही समय दे सकेंगे। फिलहाल जिन तीन ट्रस्टियों को नामित किया जाना है, वह तीनों पद अयोध्या के निवासी थे। ऐसी स्थिति में इन पदों पर स्थानीय सहयोगियों को ही प्राथमिकता दी जा सकती है। संगठन से जुड़े विशेष नामों पर गोपनीय ढंग से चर्चा की जा रही है। संतों के नामों पर भी मंथन चल रहा है।
राज परिवार के सदस्य का नाम पहले से प्रस्तावित
इनमें अयोध्या राज परिवार के सदस्य और साहित्यकार यतीन्द्र मिश्र का नाम निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेन्द्र दास प्रस्तावित कर चुके हैं। यतीन्द्र दिवंगत नरेश के बेटे और राम मंदिर ट्रस्ट के सहयोगी भी हैं। संतों में जिन नामों को प्रमुखता दी जा रही है, उनमें मणिराम छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, अयोध्या के मनीषी और हनुमत निवास के महंत मिथिलेश नंदिनी शरण, श्रीराम वल्लभा कुंज अधिकारी और एडवर्ड विवेचनी सभा अध्यक्ष स्वामी राजकुमार दास, रामकथा कुंज पीठाधीश्वर डा. रामानंद दास, रंगमहल पीठाधीश्वर महंत रामशरण दास शामिल हैं। यह सभी संत रामानंदीय वैष्णव हैं।
इसके अलावा एक अन्य नाम कोशलेश सदन पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर का भी है। यह भी वैष्णव आचार्य हैं, लेकिन रामानुजीय परम्परा में दक्षिण भारतीय उपासना पद्धति में निष्णात है। राम मंदिर आंदोलन के अग्रिम पंक्ति के संतों में भी उनका नाम शामिल है। शेष सभी राम मंदिर आंदोलन के सहभागी रहे हैं।
निर्मोही अखाड़ा के पंचों में अयोध्या शाखा की महंताई पर छिड़ा विवाद
वहीं, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी और निर्मोही अखाड़े के अयोध्या शाखा के महंत दिनेन्द्र दास को लेकर खड़ा हो गया है। अखाड़े के पंचों ने पांच जुलाई 2026 को दिल्ली में बैठक कर उन्हें अयोध्या शाखा के महंत पद से हटाने का प्रस्ताव स्वीकृत करने का ऐलान किया है। यह ऐलान तब हुआ है जबकि 22 जुलाई की बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन की प्रक्रिया पर मंथन किया जा रहा है। फिलहाल इस ऐलान के विपरीत ट्रस्टी महंत दिनेन्द्र दास ने पूरी कार्यवाही को फर्जी बताया है। उनका कहना है कि पंचों को गुमराह कर हस्ताक्षर करा लिए गए और फिर कथित प्रस्ताव लिखा गया है, जिसका कोई अर्थ नहीं है। वह वर्तमान में महंत पद पर आसीन हैं और पंचों का बहुमत उनके पक्ष में है।
उन्होंने बताया कि शीघ्र ही वह यहां पंचों की बैठक बुलाकर स्थिति स्पष्ट कर देंगे। उनका कहना है कि अखाड़े के सरपंच और डाकौर गुजरात के महंत राजा रामचंद्राचार्य हमारे दीक्षा गुरु हैं। उनकी अवस्था 103 वर्ष के करीब हो चुकी है। उनके मुख्तार कार्तिक चोपड़ा हैं, जो शुरू से मुस्लिम पक्ष के साथ समझौते के लिए प्रयासरत थे। सुप्रीम कोर्ट की ओर से आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय समिति के समक्ष भी इन लोगों ने समझौते का प्रयास किया था मगर सफल नहीं हुए।


