Ayodhya Ram Mandir: श्रीराम यंत्र स्थापना पूजन में शामिल हुईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राम लला के दर्शन किए
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नवरात्रि के पहले दिन अयोध्या पहुंचीं और राम मंदिर में पूजा-अर्चना की। उन्होंने दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र पूजन में हिस्सा लिया। और राम लला के दर्शन किए। करीब 5 घंटे प्रवास के बाद वह मथुरा के लिए रवाना होंगी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नवरात्रि के पहले दिन आज अयोध्या के राम मंदिर पहुंची हैं। इस दौरान वे दूसरे तल पर राम परिवार दरबार में स्थापित किए जा रहे श्रीराम यंत्र के पूजन में शामिल हुईं। और राम लला के दर्शन किए। इससे पहले उन्होने राम मंदिर परिसर देखा और दुर्गा माता मंदिर में पूजा-अर्चना की। इससे पहले, राष्ट्रपति करीब साढ़े 10 बजे अयोध्या एयरपोर्ट पहुंचीं। यहां राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया। अयोध्या में करीब 5 घंटे रुकने के बाद वह दोपहर 3 बजे मथुरा के लिए रवाना होंगी।
मथुरा में राष्ट्रपति इस्कॉन और प्रेम मंदिर में दर्शन करेंगी। शुक्रवार यानी 20 मार्च को वह प्रेमानंद महाराज से मुलाकात करेंगी। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद राष्ट्रपति का यह दूसरा अयोध्या दौरा है। इससे पहले वह 1 मई 2024 को अयोध्या आई थीं, तब उन्होंने हनुमानगढ़ी और राम मंदिर में दर्शन-पूजन किया था।
कांची कामकोटि शंकराचार्य ने राम मंदिर ट्रस्ट को दिया
आपको बता दें राम मंदिर के दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र और श्रीराम नाम स्वर्णांकित रजत पट्टिका का सप्त दिवसीय अनुष्ठान के उपरांत यथास्थान पर स्थापित कर दिया गया है। राष्ट्रपति के पूजन के बाद इस सप्त दिवसीय अनुष्ठान की पूर्णाहुति हवन के साथ होगी। पंच धातु से निर्मित व प्राण प्रतिष्ठित श्रीराम यंत्र कांची कामकोटि शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी विजयेन्द्र सरस्वती ने राम मंदिर में स्थापित कराने के लिए ट्रस्ट को प्रदान की थी। इसके पहले श्रीराम यंत्र को कांची मठ में पूजा-अर्चना के बाद तिरुपति देवस्थानम ले जाया गया। यहां दोबारा पूजन के बाद पूरे देश में रथयात्रा के जरिए यहां लाया गया था।
कांचीपुरम के मठ में तैयार हुआ राम यंत्र
तीर्थ क्षेत्र के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि ने बताया कि दूसरे तल पर राम नाम मंदिर भी स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास महाराज ने श्रीराम चरित मानस में स्पष्ट किया है कि प्रभु श्रीराम से बढ़कर उनके नाम की महिमा है। उन्होंने बताया कि यह पट्टिका चांदी में निर्मित है और साढ़े फिट की है। इसके मध्य में श्रीराम नाम। स्वर्ण से अंकित किया गया है। राम यंत्र को कांचीपुरम (तमिलनाडु) स्थित मठ में तैयार किया गया। इसके बाद इसे कांचीपुरम से तिरुपति (आंध्र प्रदेश) लाया गया। फिर रथयात्रा के जरिए 10 दिन पहले इसे अयोध्या पहुंचाया गया। राम यंत्र का वजन 150 किलो है। इस पर सोने की परत चढ़ाई गई है।
आपको बता दें बारह मार्च से चल रहे श्रीराम यन्त्र पूजन के सातवें दिन बुधवार को गतपत्यादि आवाह्नित देवताओं का पूजन, श्रीराम यन्त्रार्चन, प्रायश्चित आहुति एवं पूर्णाहुति दी गई। पहले दिन बारह मार्च को प्रथम बेला में प्रायश्चित पूजन,दसविधि स्नान एवं जलयात्रा,द्वितीय बेला में पंचांग पूजन तथा मण्डप प्रवेश हुआ। तेरह मार्च को वास्तु पूजन, अग्निस्थापन, मण्डप पूजन, नवग्रहादि मण्डपस्थ देवताओं का पूजन एवं श्रीराम यन्त्र पूजन हुआ।
द्वितीय बेला में पुरुषसूक्त एवं श्री सूक्त से यज्ञाहुतियां उत्तर पूजन एवं आरती हुई। इसके बाद के दिनों में आह्वानित देवताओं का पूजन, श्रीराम यन्त्रार्चन,पुरुष एवं श्री सूक्त से यज्ञाहुतियां एवं उत्तर पूजन का क्रम चलता रहा। आज प्रायश्चित आहुति व पूर्णाहुति दी गई।


