राम मंदिर के चढ़ावा में चोरी के आरोपों पर पहला बड़ा ऐक्शन, जांच शुरू, इन्हें मिला जिम्मा

अयोध्या, संवाददाता
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अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा में चोरी के आरोपों पर गुरुवार को पहला बड़ा ऐक्शन हुआ है। पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव की ओर से मामला उठाने के बाद से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय रामजन्मभूमि के नवीन भवन में ही चार दिनों से मौजूद हैं।

राम मंदिर के चढ़ावा में चोरी के आरोपों पर पहला बड़ा ऐक्शन, जांच शुरू, इन्हें मिला जिम्मा

अयोध्या में राम मदिर के चढ़ावे की चोरी और हेरफेर के आरोपों को लेकर पहला बड़ा ऐक्शन लिया गया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच की जिम्मेदारी सेना के रिटायर अधिकारी को सौंपी गई है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद से सेना अधिकारी परिसर के एक विभाग में प्रभारी के रूप में कार्य करते रहे थे। दूसरी तरफ श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पिछले चार दिनों यानी आठ तारीख से कारसेवकपुरम स्थित अपने कमरे में नहीं गए हैं। वह रामकोट स्थित ट्रस्ट के नवीन भवन में ही ठहरे हैं और यहीं से सारी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।

चार दिनों पहले ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने चढ़ावा में चोरी का मामला उठाया था। तब चंपत राय ने बयान जारी कर किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार कर दिया था। इसके बाद भी अखिलेश यादव का हमला जारी रहा। इसी बीच बुधवार को यहां तैनात रहे विहिप नेता और पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने भी कई सालों से चढ़ावा में चोरी का सनसनीखेज आरोप लगा दिया। इसके बाद अयोध्या के संत भी दो गुटों में बंटे नजर आए। चौतरफा जांच की मांग उठने लगी।

श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के गहने और रुपए के हेरफेर को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद सहित भाजपा के शीर्ष पदाधिकारियों के माथे पर भी चिंता की लकीरें बढ़ गई। इसी के बाद मीडिया रिपोर्ट के आधार पर आरोपों की जांच करने के लिए शीर्ष नेतृत्व ने ट्रस्ट को ही जिम्मेदारी सौंप दी। सूत्र बताते हैं कि हेरफेर के मामले में जांच शुरू हो गई है। राम जन्मभूमि में कार्यरत सेना के एक रिटायर्ड अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सूत्र बताते हैं कि पहले दिन उन्होंने सभी फाइलों को इकट्ठा करने का काम शुरू किया है। शुक्रवार को सीसीटीवी कैमरे की जांच प्रस्तावित है। वहीं दूसरी तरफ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय रामकोट स्थित ट्रस्ट के नवीन कार्यालय से सारी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। कारसेवकपुरम में वह भोजन करने और सोने के लिए कई दिनों से नहीं गए। लेकिन ट्रस्ट के एक दूसरे पदाधिकारी ने गुरुवार की सुबह रामकोट की परिक्रमा की है। प्रतिदिन परिक्रमा करने वाले लोगों ने उनसे कुछ जानकारी चाही लेकिन उन्होंने कुछ बताने से इनकार कर दिया।

चढ़ावे में हेरफेर के आरोपों के बाद दो धड़ों में बंटे संत कुछ हुए मुखर

मीडिया रिपोर्ट के आधार पर रामनगरी के संत-महंत दो धड़ों में बंट गए हैं। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के शिष्य और मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने मुखर होकर मीडिया के माध्यम से जांच कराने की मांग की है लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि जो जैसा करेगा उसका फल उसे निश्चित वैसा ही मिलेगा। भगवान दंड देंगे।

उन्होंने जांच प्रक्रिया पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा है कि जांच करने वाले ही बेईमान होंगे तो जांच कैसे होगी। इस बयान का समर्थन कई संत-महंतों ने मुंह बंद कर और सिर हिला कर किया है। उन्हें लगता है कि अगर वह कुछ बोलेंगे तो इससे सरकार की छवि धूमिल होगी। वहीं दूसरी तरफ भाजपा विरोधी खेमे के साधु संत खुले रूप से ट्रस्ट की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं।

आरोपों की जांच होनी चाहिए: विनय कटियार

राम मंदिर आंदोलन के अग्रणी पंक्ति के नेता और पूर्व सांसद विनय कटियार ने कहा है कि जांच होनी चाहिए इसमें कोई आपत्ति नहीं है। इस विषय पर गंभीरता से चिंतन और मंथन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि केवल इसी कारण से उन्हें आज अयोध्या आना पड़ा है। अगर पीएमओ ने रिपोर्ट मांगी है तो वह यहां आनी चाहिए। उन्हें लगता है कि कुछ लोग इस तरह के हैं जिन्होंने गड़बड़ किया है। इस बात पर ट्रस्ट को चिंतन और मंथन जरूर करना चाहिए।

श्रीराम जन्मभूमि परिसर से हटाए जाएंगे सिंगल लॉक के दानपात्र

राम मंदिर में सिंगल लॉक दानपात्र अब हटाए जाएंगे। चढ़ावे की धनराशि निकालने के लिए एसबीआई प्रबंधन ने इन्हें खुलवाने से साफ मना कर दिया है। बैंक प्रबंधन के निर्देश के मुताबिक बैंक कर्मचारियों ने भी इसके लिए हाथ खड़े कर दिए हैं। हालांकि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट भी इसके लिए राजी हो गया है। ऐसे में सिंगल लॉक के दानपात्रों को हटाकर डबल लाक दानपात्र रखने की तैयारी शुरू हो गई है।

इस बीच हिरासत में रखे गए सभी संदिग्ध लोगों को इस सख्त हिदायत के साथ घर जाने की इजाजत दी गई है कि पूरे मामले की जांच में सहयोग करेंगे और किसी भी परिस्थिति में बिना सूचना शहर से बाहर नहीं जाएंगे।

चर्चा यह भी है कि ट्रस्ट द्वारा तत्काल कानूनी कार्रवाई न किए जाने पर शीर्ष नेतृत्व ने भी नाराजगी व्यक्त की है, इसीलिए जिन संदिग्धों के बैंक खातों से रिकवरी की गई है, उनको लेकर मंथन हो रहा है। उधर, विहिप के पूर्व पदाधिकारी और राम मंदिर में कार्य कर चुके महिपाल सिंह का बयान सोशल मीडिया में ट्रेंड कर रहा है। इसे विपक्ष वायरल कर रहा है, जिस पर लोग टिप्पणियां कर रहे हैं।

मोबाइल टैपिंग के डर से ट्रस्ट कर्मी नहीं उठा रहे फोन

राम मंदिर में चढ़ावे की धनराशि की कथित हेराफेरी के मामले को लेकर उठे बवंडर से परेशान ट्रस्ट अपने ही कर्मचारियों पर भरोसा नहीं कर पा रहा है। ट्रस्ट ने सभी कर्मचारियों को सख्त हिदायत देते हुए उनके मोबाइल सर्विलांस पर डालने की चेतावनी जारी कर दी है। ट्रस्ट की इस सख्ती से कर्मचारियों ने फोन उठाना ही बंद कर दिया है। जरूरी होने पर व्हाइट ऐप कॉल कर रहे हैं।

उधर, चढ़ावे में हेराफेरी से संबंधित सभी सूचनाएं अंदर से ही बाहर आई हैं। मीडिया में सभी सूचनाएं परिसर के अंदर से ही लीक की गईं। इन अपुष्ट खबरों को जब सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पोस्ट कर सार्वजनिक किया तो मामला बढ़ गया। इसके कारण तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपतराय ने वीडियो बयान जारी किया। उसके बाद से मामले ने तूल पकड़ लिया था।

Yogesh Yadav

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योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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