राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के लिए एसआईटी को मिला और समय, जांच का दायरा भी बढ़ा
Ram Mandir Controversy: राम मंदिर चढ़ावा चोरी का जांच में जुटी एसआईटी को और समय मिल गया है। एसआईटी अब 15 जुलाई तक अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंप सकती है। इसके साथ ही जांच का दायरा भी बढ़ा दिया गया है। जमीनों की खरीद में हुई धांधली के आरोपों की भी जांच शुरू हो गई है।

Ram Mandir Controversy: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच कर रही एसआईटी को फाइनल रिपोर्ट के लिए और समय मिल गया है। मामले की जांच का दायरा भी बढ़ा दिया गया है। ऐसे में एसआईटी के अनुरोध पर शासन ने और समय दिया है। सूत्रों के अनुसार एसआईटी को अब 15 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट देनी है। पहले यह रिपोर्ट 30 जून तक सौंप देनी थी। एसआईटी के प्रमुख बनाए गए लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने दोनों सदस्यों आईजी किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरत्न के साथ अपनी रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को सौंपी थी। प्रारंभिक रिपोर्ट में भी एसआईटी ने मामले की विस्तृत जांच के लिए अतिरिक्त समय और अधिकारियों की मांग की थी।
प्रारंभिक रिपोर्ट में ही बड़ी गड़बड़ियों का संकेत
चढ़ावा चोरी का मामला आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर सीएम योगी ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी को एक हफ्ते में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों में अंतिम रिपोर्ट सौंपनी थी। 15 जून से एसआईटी ने अयोध्या पहुंचकर मामले की जांच भी शुरू कर दी थी। एक हफ्ते में प्रारंभिक रिपोर्ट भी शासन को मिल गई थी। रिपोर्ट में मामले को बेहद गंभीर और कई अनियमितताओं की ओर इशारा था। गणना से लेकर पूरी प्रक्रिया में तमाम गड़बड़ियों की ओर इशारा किया गया था। इसी के बाद एफआईआर हुई और गणना में लगे आठ कर्मचारियों की गिरफ्तारी के साथ 80 लाख रुपयों की बरामदगी भी हुई।
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। मौके की स्थिति 150 से अधिक लोगों से पूछताछ, सीसीटीवी और मौजूदा व्यवस्था को रिपोर्ट का हिस्सा बनाया गया है। सबकी भूमिका का उल्लेख है लेकिन अभी सीधे तौर पर किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। फाइनल रिपोर्ट में हर व्यक्ति की जवाबदेही तय हो सकती है।
क्यों बढ़ा जांच का दायरा और समय
एसआईटी जांच के बीच ही सीएम योगी ने अयोध्या पहुंचकर ऐलान किया कि किसी के पास मामले से जुड़े कोई तथ्य हो तो जांच टीम को दे सकता है। एसआईटी दूध का दूध, पानी का पानी करेगी। सीएम योगी के ऐलान के बाद आप सांसद संजय सिंह एसआईटी से मिले और राम मंदिर के निर्माण के लिए हुई जमीनों की खरीद में भी घोटाले का आरोप लगाया। संजय सिंह ने कई दस्तावेज भी एसआईटी को सौंपे। इससे मामला और गहरा गया। इन दस्तावेजों से साफ हो गया कि गड़बड़ी कई सालों से चल रही थी। ऐसे में एसआईटी को पूरी जांच गहराई से करने के लिए और समय की जरूरत महसूस होने लगी।
लगातार पूछताछ और सीसीटीवी की पड़ताल से खुली परतें
राम मंदिर में जांच के दौरान एसआईटी ने गणना में लगे करीब डेढ़ सौ लोगों से बारी बारी से पूछताछ की। पूरी प्रक्रिया को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय भी समझने की कोशिश की। इसके साथ ही सीसीटीवी की जांच की तो चौंकाने वाले मामले सामने आए। बीच-बीच में कई फुटेज डिलीट मिले। सूत्रों के अनुसार सीसीटीवी से साफ हो गया कि लगातार वहां से चोरी हो रही थी। कभी सीसीटीवी के सामने कर्मचारी खड़े हो जाते थे तो कभी फुटेज की बिना चिंता किए भी चोरी हुई थी।
प्रारंभिक रिपोर्ट में गिनती प्रक्रिया पर सवाल
एसआईटी ने 23जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप थी। प्रारंभिक रिपोर्ट में एसआईटी ने मंदिर में चढ़ावा गिनती की प्रक्रिया के साथ ही निगरानी पर सवाल उठाए थे। सूत्रों का कहना है कि जांच में कई कर्मचारियों के साथ बड़े अधिकारियों पर संदेश जताया गया था। एसआईटी ने ही कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की सिफारिश की थी।
सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने जांच में पाया है कि दान राशि की गणना की कोई पारदर्शी व्यवस्था नहीं थी। दान आने के बाद जो लोग उसकी गिनती करते थे, उनके नाम और सघन चेकिंग को लेकर भी कोई प्रक्रिया तय नहीं थी। एसआईटी ने पाया कि पूरी प्रक्रिया यानी दान आने, मंदिर से निकाले जाने से लेकर उसकी गिनती किए जाने के दौरान भी कोई गंभीर निगरानी व्यवस्था नहीं थी।
एसआईटी प्रमुख ने क्या कहा था
एसआईटी प्रमुख विजय विश्वास पंत ने प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद कहा था कि जांच से संबंधित फिलहाल जो रिपोर्ट सौंपी गई है वह प्रारंभिक निष्कर्षों पर आधारित है। कई तथ्यों एवं दस्तावेजों का परीक्षण किया जाना बाकी है। मामले की गहन जांच जारी है। अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में लगभग 10 से 15 दिन का अतिरिक्त समय लग सकता है। इसके बाद विस्तृत एवं अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी।
एसआईटी ने 15 से 20 जून छह दिनों तक अयोध्या के राम मंदिर परिसर में ही अपनी जांच प्रक्रिया को अंजाम दिया था और लखनऊ लौट गई थी। माना जा रहा था कि प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के बाद फिर एसआईटी अयोध्या आएगी। हालांकि अभी तक वह लखनऊ से दोबारा अयोध्या नहीं गई है। माना जा रहा है कि वहां से लाए गए दस्तावेजों और पैन ड्राइव में लाए गए सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की जा रही है।


