राम मंदिर के चढ़ावे की कई साल से हो रही चोरी, पूर्व लेखा प्रभारी का दावा, बताया- कैसे होता था खेल

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अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी के आरोपों के बीच यहां पर लेखा प्रभारी रहे महिपाल सिंह ने सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे वहां खेल हो रहा था। इसकी शिकायत श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी की गई। इसके बाद उन्हें ही यहां से हटा दिया गया था। 

राम मंदिर के चढ़ावे की कई साल से हो रही चोरी, पूर्व लेखा प्रभारी का सनसनीखेज दावा, घपला पकड़ा तो किया आउट

अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी का मामला समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की तरफ से उठाने के बाद सियासत भी गरमाई हुई है। भाजपा और मंदिर ट्रस्ट प्रबंधन ने आरोपों से भले ही इनकार कर दिया है लेकिन खुद को मंदिर का पूर्व लेखा प्रभारी होने का दावा करने वाले महिपाल सिंह ने कई सनसनीखेज खुलासे करते हुए अखिलेश यादव के आरोपों को हवा दे दी है। महिपाल के अनुसार मंदिर के चढ़ावे में चोरी कई साल से हो रही है। महिपाल ने यहां पर खुद चोरी पकड़ी थी। इसकी शिकायत श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी की। इसके बाद महिपाल को ही वहां से हटा दिया गया था। उन्होंने बताया कि कैसे वहां पूरा खेल हो रहा था।

महिपाल सिंह ने यूट्यूब चैनलों को इंटरव्यू देते हुए राम मंदिर के चढ़ावे और दान की चोरी कैसे होती रही है, इसके बारे में विस्तार से बताया है। राजस्थान के रहने वाले पूर्व बैंक अधिकारी महिपाल को यहां का लेखा प्रभारी बनाया गया था। वह जनवरी 2021 से मार्च-अप्रैल 2022 तक यहां रहे। महिपाल ने बताया कि मंदिर परिसर में दान राशि की गणना के लिए विशेष कक्ष बनाया गया था। वहां सीसीटीवी कैमरे भी लगे थे। इसके बाद भी कुछ लोगों की मिलीभगत से खेल हो रहा था।

महिपाल के अनुसार गिनती प्रक्रिया में दो बैंक अधिकारी रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप के साथ ट्रस्ट द्वारा नियुक्त 14 कर्मचारी नोटों की छंटाई करते थे। गणना के दौरान नोटों की गड्डिया बनाई जातीं। फिर दस-दस गड्डियों को एक साथ बांधकर रखा जाता था। बैंक के अधिकारी गड्डियों में कई बार 10 की जगह 12 या 13 गड्डियां रख देते थे। जबकि वाउचर केवल 10 गड्डियों के आधार पर तैयार किया जाता था। इन्हें एक बॉक्स में रखा जाता था। सीसीटीवी में मामला न पकड़ा जाए इसके लिए गिनती इस तरह से होती थी लगे दस ही गड्डियां हैं।

इन बक्सों में अतिरिक्त गड्डियां रोज बाहर लेकर जाई जाती थीं और उनका बंदरबाट होता था। एक दिन संदेह होने पर जब नोटों का बॉक्स खुलवाया गया तो लगभग पांच लाख रुपये अतिरिक्त पाए गए। इस संबंध में उन्होंने चंपत राय को भी जानकारी दी। इसके बाद भी चोरी करने वालों पर कोई ऐक्शन नहीं हुआ। उन्हें ही हटाकर किसी अन्य को वहां लगा दिया गया। यहीं नहीं, उन्हें हटाने से पहले पिछले सात-आठ महीनों के सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट करा दिए गए। महिपाल ने कहा कि उस समय महेंद्र व्यास जी को भी उस समय बताया था। अभी दो तीन दिन पहले उनका फोन भी आया कि मैंने जो मामला उस समय उठाया था, अब सब सामने आ रहा है।

सोना-चांदी का भी हिसाब-किताब नहीं

महिपाल सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि परिसर में श्रद्धालुओं द्वारा सोना, चांदी और अन्य धातुएं दान करने के लिए कई दान-पात्र रखे गए थे। यह सामग्री एक बड़े कंटेनर में एकत्र की जाती थी, जिसे बाद में ले जाया जाता था। महिपाल के अनुसार इनका भी कोई हिसाब किताब नहीं दिखाई दिया। आंतरिक स्तर पर इसकी कोई रसीद नहीं बनाई जाती थी। इस बारे में उन्होंने पूछा भी था तो बताया गया कि केवल फोटो खींचकर भेजने का निर्देश मिला है। हालांकि कार्यालय में सीधे जमा किए गए दान की विधिवत रसीद दी जाती थी। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में किसी प्रकार की जांच होती है तो वह पूरा सहयोग करने को तैयार हैं।

कुछ अन्य व्यक्तियों पर भी उगाही के आरोप

महिपाल सिंह ने बयान में कुछ अन्य व्यक्तियों पर भी वित्तीय अनियमितताओं और कथित धन उगाही के आरोप लगाए हैं। उन्होंने बकायदे लोगों का नाम लेते हुए कई आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित पक्षों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आरोपों की सत्यता किसी सक्षम जांच या आधिकारिक जांच-पड़ताल के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

Yogesh Yadav

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योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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