
अयोध्या दीपोत्सव : डेढ़ लाख से अधिक दीयों से रोशन हुआ राम मंदिर, योगी ने जलाया पहला दीप
Ayodhya Deepotsav: दीपोत्सव पर रविवार को अयोध्या राम मंदिर सहित सम्पूर्ण श्रीराम जन्मभूमि परिसर दिव्य प्रकाश से आलोकित हो उठा। राम मंदिर डेढ़ लाख से अधिक दीयों से रोशन हुआ। पहला दीप सीएम योगी ने प्रज्ज्वलित किया।
चौदह वर्षों के वनवास के बाद लंका विजय कर अयोध्या लौटे प्रभु श्री राम के आगमन की खुशी में आयोजित होने वाले दीपोत्सव पर रविवार को राम मंदिर सहित सम्पूर्ण श्रीराम जन्मभूमि परिसर दिव्य प्रकाश से आलोकित हो उठा। राम मंदिर व राम दरबार सहित परकोटे के सभी मंदिरों, शेषावतार मंदिर व कुबेर टीला स्थित कुबेरेश्वर नाथ महादेव मंदिर में देशी घी के दीपक जलाए गए वहीं पूरे परकोटे की दीवारों, सप्त मंडपम व कुबेर टीला में मोम के दीपक जलाए गए। इसी तरह से जन्मभूमि पथ, चारों प्रवेश द्वारों के अतिरिक्त पंचवटी व अन्य स्थानों पर सरसों के तेल के दीपक जलाए गए। राम मंदिर डेढ़ लाख से अधिक दीयों से रोशन हुआ। पहला दीप सीएम योगी ने प्रज्ज्वलित किया।

10 कुंतल फूलों से सुसज्जित हुई रंगोली
इसके पहले करीब सवा पांच बजे राम मंदिर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामलला का दर्शन पूजन किया और फिर रामलला के समक्ष सबसे पहले स्वयं दीपक प्रज्ज्वलित किया। यह वह पल था जब अमावस्या की काली घटाएं पूरे वातावरण को अपने आगोश में समेटने को आतुर थीं, ठीक उसी पल दीप प्रज्ज्वलित कर चतुर्दिक रोशनी का विस्तार कर परिसर को प्रकाशमान कर दिया गया। सम्पूर्ण दीपों के प्रज्ज्वलित होने के साथ परिसर में मौजूद स्वयंसेवकों ने उत्साह और उल्लास में जय श्रीराम का उद्घोष किया। यह उद्घोष लगातार श्रद्धालुओं के बीच भी प्रतिध्वनित होता रहा।
अलग-अलग स्थानों पर नयनाभिराम रंगोली सजाई गई
पूरे मंदिर परिसर को कृत्रिम व प्राकृतिक फूलों की लड़ियों से सुसज्जित किया गया। इसके अलावा राम मंदिर व राम दरबार समेत अलग-अलग स्थानों पर नयनाभिराम रंगोली सजाई गई। इस रंगोली को आकर्षक बनाने के लिए सुंदर फूलों के संयोजन से सजाया गया था। बताया गया कि रंगोली निर्माण के लिए करीब दस कुंतल फूलों का प्रयोग किया गया। इस कार्य में अवध विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट्स के छात्र छात्राओं की विशेष भूमिका रही। इस मौके पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपतराय, तीर्थ क्षेत्र के न्यासी डा अनिल मिश्र व मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव ने पर्व की बधाई देते हुए स्वागत किया।
श्रद्धापूर्वक मनाई गई हनुमंत लला की जयंती
कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को छोटी दीपावली मनाई जाती है। इस अवसर पर अयोध्या सहित उत्तर भारत में हनुमान जयंती मनाने की परम्परा है। इसी परम्परा के क्रम में राम मंदिर में भी पहली बार हनुमान जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस मौके पर परकोटे की दक्षिणी भुजा में नवनिर्मित हनुमान मंदिर में गोधूलि बेला में विराजित भगवान के श्रीविग्रह का अभिषेक पूजन कर भव्य शृंगार किया गया और सूर्यास्त के ठीक पहले प्राकट्य की आरती उतारी गयी। इसी तरह से विराजमान रामलला के अस्थाई मंदिर में विराजित हनुमान जी के श्रीविग्रह का अभिषेक पूजन यज्ञमंडप में वैदिक आचार्यों द्वारा किया गया। इस मौके पर यहां चल रहे नवाह्न पारायण की पूर्णाहुति भी हो गयी।
हनुमानगढ़ी में मध्यरात्रि में हनुमान जी महाराज का प्राकट्य
हनुमान जी अयोध्या धाम के राजा हैं। उन्हें यह दायित्व स्वयं प्रभु राम से प्राप्त है। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के पर्व पर उनकी जयंती मनाई जाती है। अयोध्या के प्रधान मंदिरों में हनुमानगढ़ी सबसे प्रमुख है। अखिल भारतीय श्रीपंच रामानंदीय निर्वाणी अखाड़ा का यह मुख्यालय भी है और यहां वैष्णव परम्परा के पांच सौ साधु-संत निवास करते हैं। इसी कड़ी में हनुमान जयंती के अवसर पर अखाड़े का वार्षिकोत्सव भी मनाया जाता है। इस वार्षिकोत्सव में सम्पूर्ण अखाड़े का वैभव भी दर्शित होता है, इसके साक्षी लाखों भक्त बने।
मध्यरात्रि ठीक 12 बजे भगवान के प्राकट्य की आरती उतारी गई
छोटी दीपावली के अवसर पर आयोजित होने वाली इस जयंती के दौरान पूरे हनुमानगढ़ी परिसर को केले के पत्तों व आम्रपल्लवों के वंदनवारों से सुसज्जित किया गया। इसके साथ ही पूरे किले के परिसर को विद्युत झालरों से रोशन कर मंदिर में जहां देशी घी के दीपक जलाए गए, वहीं सीढ़ियों पर भी सरसों के तेल के असंख्य दीपों की शृंखला सजाई गई। मध्यरात्रि ठीक 12 बजे भगवान के प्राकट्य की आरती उतारी गयी और सम्पूर्ण नभ मंडल जयघोष से गुंजायमान हो उठा। इस दौरान गद्दी नशीन महंत प्रेम दास, सागरिया पट्टी महंत ज्ञानदास,उज्जैनिया पट्टी महंत संतराम दास, बसंतिया पट्टी महंत राम चरन दास व हरिद्वारी पट्टी एवं निर्वाणी अखाड़ा के श्रीमहंत मुरली दास ने आराध्य का दर्शन किया। प्राकट्य के इन क्षणों में आराध्य का झलक पाने के लिए आतुर श्रद्धालु भी एक दूसरे पर टूट पड़ रहे थे। उधर परम्परा के अनुसार हनुमान जी की प्रधानता के मंदिरों में गोधूलि बेला में जयंती मनाते जाने के बाद अलग-अलग महंतों की टोलियां हनुमानगढ़ी में बधावा लेकर पहुंचे और अपनी-अपनी भेंट आराध्य को समर्पित की।





