
कोहरे में ड्राइव के दौरान ये गलतियां ना करें; यमुना, लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर कुहासा का कहर जारी
यूपी में कोहरे के कहर से हादसों में अचानक तेजी आ गई है। अगर आप यमुना, लखनऊ-आगरा या पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर सफर करने जा रहे हैं तो सुरक्षित रहने के लिए सामान्य होने वाली गलतियों से बचना बेहद जरूरी है। सफर शुरू करने से पहले 'यूपीडा' या वेदर ऐप्स पर विजिबिलिटी रिपोर्ट जरूर चेक करें।
उत्तर प्रदेश में कड़ाके की सर्दी के साथ ही घने कोहरे (कुहासा) का दौर चल रहा है। प्रदेश के सबसे व्यस्त और हाई-स्पीड कॉरिडोर कहे जाने वाले यमुना एक्सप्रेसवे, लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर इस समय दृश्यता (विजिबिलिटी) शून्य से 10 मीटर के बीच रह गई है। ऐसे में इन रास्तों पर सफर करना किसी चुनौती से कम नहीं है। कोहरे के दौरान छोटी-सी लापरवाही बड़े हादसे का सबब बन सकती है। उत्तर प्रदेश सरकार और यूपीडा ने कोहरे के मद्देनजर एक्सप्रेसवे पर स्पीड लिमिट भी 120 घटाकर 80 किलोमीटर प्रतिघंटा भी कर दी है।
अगर आप इन एक्सप्रेसवे पर सफर करने जा रहे हैं तो सुरक्षित रहने के लिए सामान्य होने वाली गलतियों से बचना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही यमुना, लखनऊ-आगरा और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर सफर शुरू करने से पहले 'यूपीडा' या वेदर ऐप्स पर विजिबिलिटी रिपोर्ट जरूर चेक करें। अगर संभव हो तो रात और तड़के सफर करने से बचें। याद रखें, आपकी सुरक्षा आपके हाथों में है। रफ़्तार के जुनून से बचें, क्योंकि आपकी थोड़ी-सी जल्दबाजी पूरे परिवार के लिए भारी पड़ सकती है।
हाई बीम लाइट का उपयोग करना
अक्सर ड्राइवरों को लगता है कि कोहरे में 'हाई बीम' (तेज लाइट) जलाने से दूर तक दिखेगा, लेकिन यह एक बड़ी गलतफहमी है। कोहरे के कण प्रकाश को परावर्तित (Reflect) करते हैं, जिससे ड्राइवर की आंखों के सामने रोशनी की एक सफेद दीवार बन जाती है और सामने कुछ भी दिखाई नहीं देता। कोहरे में हमेशा लो बीम (Low Beam) और फॉग लाइट्स का ही उपयोग करें।
चलते वाहन में 'हजार्ड लाइट्स' (Hazard Lights) जलाना
सबसे आम गलती यह है कि लोग कोहरे में गाड़ी चलाते समय चारों इंडिकेटर (हजार्ड लाइट्स) जला लेते हैं। ट्रैफिक नियमों के अनुसार, हजार्ड लाइट्स का मतलब होता है कि गाड़ी खड़ी है या आपात स्थिति में है। अगर आप चलते समय इसे जलाते हैं, तो पीछे वाले वाहन को यह समझ नहीं आता कि आप मुड़ने वाले हैं या रुके हुए हैं। लेन बदलते समय हमेशा केवल साइड इंडिकेटर का ही प्रयोग करें।
एक्सप्रेसवे के किनारे (Shoulder) गाड़ी खड़ी करना
यमुना और लखनऊ एक्सप्रेसवे पर अक्सर देखा गया है कि विजिबिलिटी कम होने पर लोग गाड़ी सड़क के किनारे खड़ी कर देते हैं। कोहरे में यह आत्मघाती हो सकता है। पीछे से आने वाला वाहन इसे सड़क की लेन समझकर आपकी गाड़ी से टकरा सकता है। अगर रुकना अनिवार्य हो, तो किसी अधिकृत टोल प्लाजा, पेट्रोल पंप या ढाबे पर ही रुकें।
आगे वाले वाहन से दूरी न बनाना
कोहरे में सड़कों पर फिसलन और दृश्यता की कमी होती है। अगर आप आगे वाले वाहन के बिल्कुल पीछे (Tailgating) चल रहे हैं, तो अचानक ब्रेक लगने पर आप टकरा सकते हैं। कोहरे में 'दो सेकंड' के नियम को बढ़ाकर 'पांच सेकंड' कर दें। यानी आगे वाले वाहन से इतनी दूरी रखें कि अचानक रुकने पर आपको पर्याप्त समय मिले।
वाइपर और डिफ्रॉस्टर का उपयोग न करना
कोहरे के दौरान हवा में नमी शीशे पर जम जाती है, जिससे धुंधलापन बढ़ जाता है। खिड़कियां थोड़ी नीचे रखें या डिफ्रॉस्टर (Heater) चलाएं ताकि शीशा साफ रहे। साथ ही, समय-समय पर वाइपर चलाकर बाहरी धुंध को साफ करते रहें।

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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