राष्ट्रपति को भी शंकराचार्य तय करने का अधिकार नहीं; यूपी प्रशासन के नोटिस पर भड़के अविमुक्तेश्वरानंद
प्रयागराज में शंकराचार्य पद को लेकर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मेला प्रशासन और शासन-प्रशासन पर तीखा हमला बोला है।कहा कि शंकराचार्य का फैसला सिर्फ शंकराचार्यों का होता है, न कि मुख्यमंत्री या राष्ट्रपति का।
प्रयागराज में शंकराचार्य पर छिड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अब शासन-प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश का मुख्यमंत्री या राष्ट्रपति तय करेगा कि शंकराचार्य कौन है। राष्ट्रपति को भी शंकराचार्य तय करने का अधिकार नहीं है। बता दें कि मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वी को एक नोटिस जारी कर उनके शंकराचार्य पद पर सवाल उठाया है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा है, ‘शंकराचार्य वह है जिसे बाकी तीन पीठों के शंकराचार्य कहें कि वह शंकराचार्य हैं। तीन पीठों में से दो पीठों के शंकराचार्य हमें शंकराचार्य कहते हैं। पिछले माघ मेले में भी मुझे अपने साथ लेकर स्नान कर चुके हैं। जब स्वयं द्वारका और शृंगेरी के शंकराचार्य जी कह रहे हैं कि आप शंकराचार्य हैं और स्नान कर रहे हैं, तो आपको किस प्रमाण की जरूरत है?’
अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा, ‘क्या प्रशासन तय करेगा कि शंकराचार्य हैं या नहीं? उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री तय करेगा कि हम शंकराचार्य हैं या नहीं? या देश का राष्ट्रपति तय करेगा? भारत के राष्ट्रपति को भी यह अधिकार नहीं है कि वह तय करे कि कौन शंकराचार्य है और कौन नहीं। शंकराचार्य का निर्णय शंकराचार्य करते हैं। पूरी के शंकराचार्य जी ने कुछ नहीं कहा है, वह साइलेंट हैं। उनका एफिडेविट सुप्रीम कोर्ट में पहले बताया गया कि उन्होंने विरोध किया है। लेकिन जब हमने एफिडेविट की कॉपी निकाली तो उसमें उन्होंने लिखा कि हमसे कोई समर्थन नहीं मांगा गया, इसलिए हमने दिया भी नहीं।’
निर्विवाद रूप से हम ही हैं शंकराचार्य
उन्होंने कहा कि दो शंकराचार्यों का प्रत्यक्ष लिखित और व्यवहारिक समर्थन हमारे पास है और तीसरे शंकराचार्य की मौन सहमति भी हमारे साथ है। और कौन शंकराचार्य है? हम हैं ज्योतिर्विद के शंकराचार्य, निर्विवाद रूप से।
स्नान से नहीं वाहन से जाने से रोका गया: प्रशासन
इससे पहले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को संगम जाने से रोके जाने को लेकर प्रशासन ने सफाई दी। अफसरों ने स्पष्ट किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम स्नान से नहीं रोका गया था, यह भ्रम फैलाया जा रहा है। उनसे वाहन से उतरकर स्नान के लिए पैदल जाने का अनुरोध किया गया था। तीन घंटे तक लगातार आग्रह करने के बाद भी वह अपनी जिद पर अड़े रहे। बिना अनुमति के मौनी अमावस्या जैसे महत्वपूर्ण स्नान पर्व की व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयास किया।
लेखक के बारे में
Pawan Kumar Sharmaपवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।
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