यहां आवास विकास ने निजी जमीन पर बना दिए मकान, पुलिस बल के साथ तोड़ने पहुंची टीम

प्रमुख संवाददाता, गोरखपुर
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पुलिस और राजस्व कर्मियों संग आए अदालत अमीन ने जमीन की पैमाइश कर बने हुए मकानों पर निशान लगाए। पैमाइश में नगर निगम की पानी की टंकी बच गई लेकिन परिसर का कुछ हिस्सा दायरे में आ रहा है। स्थानीय पार्षद और प्रभावित भवन स्वामी भी मौके पर पहुंच गए। भवन स्वामियों ने अदालत की कार्रवाई का विरोध किया।

यहां आवास विकास ने निजी जमीन पर बना दिए मकान, पुलिस बल के साथ तोड़ने पहुंची टीम

UP News : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के सबसे अच्छे माने जाने वाले मोहल्लों में से एक बेतियाहाता में एक अजीब और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि यहां आवास विकास ने निजी जमीन पर आवास बनाकर बेच दिए। मामले में अदालत के सख्त रुख के बाद पुलिस बल के साथ अदालत अमीन वीरेंद्र यादव कब्जा दिलाने पहुंचे। उन्होंने जमीन की निशानदेही की। भवनों पर निशान लगाए, हालांकि कटर और जरूरी संसाधनों के अभाव में भवन तोड़कर कब्जा दिलाने की कार्रवाई नहीं हो सकी। इस बीच टीम को आवास विकास परिषद से भवन खरीदने वाले भवन स्वामियों के प्रतिरोध का सामना भी करना पड़ा।

मार्च से ही इजरा के आदेश का अनुपालन कराने में जुटे अदालत अमीन वीरेंद्र यादव मंगलवार को अदालत के कर्मचारियों, बेतियाहाता चौकी इंजार्ज विवेक राय और पुलिस बल के साथ प्रेमचंद पार्क के पास आवास विकास कॉलोनी पहुंचे। उन्होंने राजस्व कर्मियों संग जमीन की पैमाइश कर बने हुए भवनों पर निशान लगाए। पैमाइश के दौरान नगर निगम की पानी की टंकी बच गई लेकिन परिसर का कुछ हिस्सा दायरे में आ रहा है। इस बीच स्थानीय पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी, प्रभावित भवन स्वामी भी मौके पर पहुंच गए। भवन स्वामियों ने अदालत की कार्रवाई का विरोध किया। उनका कहना था कि उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला है, न ही आवास विकास कॉलोनी ने अवगत कराया है।

ये भवन स्वामी प्रभावित

भवन संख्या 01 से 11 और 52 इस मामले से सीधे प्रभावित हो रहे हैं। परिषद ने वर्ष 1983-84 में इन भवनों का आवंटन किया और 1986 में लोगों को कब्जा भी दे दिया। 1999 में अदालत का फैसला परिषद के खिलाफ आने के बावजूद 2002 में इन भवनों को फ्री होल्ड भी कर दिया। इन मकानों में डॉ. राजीव जायसवाल, डॉ. डी.पी. सिंह, डॉ. दुर्गेश गुप्ता, डॉ. नीरज नथानी, डॉ. वीर आर. सिंह, दिलीप मुरारका, विनोद गुप्ता, सुरेश सिंह, पूर्व विधायक बृजेश सिंह, अरविंद पाण्डेय समेत कई प्रतिष्ठित लोग पिछले करीब चार दशकों से निवास कर रहे हैं।

27 साल से फैसले का अनुपालन लंबित

उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद पर आरोप है कि उसने प्रेमचंद पार्क के सामने स्थित आवास विकास कॉलोनी में खुर्रमपुर की अराजी संख्या 277, रकबा 55 डिसमिल जमीन का न तो अधिग्रहण किया और न ही भू-स्वामी को मुआवजा दिया। जमीन पर 11 आवासीय भवनों का निर्माण कर बेच दिया। भू-स्वामी श्याम सुंदर सर्राफ 23 मार्च 1993 को अदालत पहुंचे। 28 जुलाई 1999 को सिविल जज (सीनियर डिविजन) ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए तीन माह के भीतर अवैध कब्जा हटाकर कब्जा दिलाने का आदेश दिया। इस निर्णय के खिलाफ परिषद ने जिला जज की अदालत में अपील की लेकिन राहत न मिलने पर 21 नवंबर 2005 को मामला हाईकोर्ट पहुंचा। वहां से भी परिषद को राहत नहीं मिली। इसी बीच, अपने पक्ष में आए फैसले का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए श्याम सुंदर सर्राफ ने इजरा वाद संख्या 04/2023 दाखिल किया।

क्या बोले पार्षद

इस मामले में बेतियाहाता दक्षिणी के पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने कहा कि जमीन के स्वामी श्याम सुंदर सर्राफ को अदालत से मिले न्यायालय का लाभ मिलना चाहिए, लेकिन आवास विकास से आवास और जमीन खरीदने वाले भवन स्वामियों के हितों का संरक्षण भी होना चाहिए। उन्हें कोई नोटिस भी नहीं मिला है।

अदालत अमीन ने बताया

अदालत अमीन वीरेंद्र यादव ने बताया कि अदालत के आदेश के अनुपालन के क्रम में भवन स्वामियों के प्रतिरोध के बीच पुलिस की उपस्थिति में पैमाइश कर भवनों पर निशान लगाए गए हैं। कटर और अन्य संसाधन के अभाव में कार्रवाई अगली तारीख तक के लिए स्थगित कर अदालत को रिपोर्ट करेंगे।

भवन स्वामियों का पक्ष

इस मामले में प्रभावित भवन स्वामी डॉ.राजीव जायसवाल ने कहा कि आवास विकास कॉलोनी का भवन खरीदकर हम वर्षों से उसमें काबिज हैं। न तो आवास विकास परिषद की ओर से सूचना दी गई और न नोटिस मिला। जीवन भर की कमाई से खरीदे गए आशियाने पर बुलडोजर चलाने से पहले हमें न्याय मिलना चाहिए। वहीं, भवन स्वामी दिलीप मुरारका ने कहा कि अपने खून-पसीने की कमाई लगाकर हमने आवास विकास कॉलोनी में भवन खरीदा और उसे नए सिरे से बनवाया। यदि जमीन विवादित थी तो आवास विकास परिषद जिम्मेदार है, आवंटी नहीं। अदालत जमीन मालिकों के हितों का भी संरक्षण करे।

Ajay Singh

लेखक के बारे में

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अजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।

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