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धर्म के साथ कर्म का सामंजस्य बिठा रहीं महिलाएं

पवित्र रमजान माह में धर्म व कर्म दोनों का सामंजस्य मुस्लिम महिलाएं अच्छे से निभा रही हैं।

तमाम महिलाएं ऐसी हैं जो न सिर्फ घरेलू जिम्मेदारी का निर्वहन कर रही है वरन सरकारी व निजी नौकरी भी समय की पाबंदी व जिम्मेदारी के साथ कर रही हैं। ऐसी महिलाओं व युवतियों का कहना है कि उन्हें रोजा रखने से नई ऊर्जा मिलती है। अल्लाह की इबादत में वह ताकत है जो किसी मनुष्य को कमजोर नहीं होने देती। इसी ऊर्जा के चलते रमजान माह में रोजा रखने के बावजूद किसी प्रकार की असुविधा या दिक्कत महसूस नहीं होती है।

कहा कि जो महिलाएं व युवतियां रोजा नहीं रखतीं हैं, उन्हें अगली बार से जरूर रोजा रखना चाहिए। हिन्दुस्तान टीम शुक्रवार को कुछ ऐसी ही मुस्लिम महिलाओं से रूबरू हुई। पेश है उन महिलाओं व युवतियों से बातचीत, जो धर्म के साथ कर्म क्षेत्र में भी पूरी गंभीरता से ध्यान दे रही हैं।

केस वन

सरकारी कामकाज में व्यस्त रहने के बावजूद मैं रोजा रखती हूं। रमजान माह की शुरुआत में रोजा रखकर कुछ समस्या उत्पन्न हुई, लेकिन जैसे जैसे समय आगे बढ़ता गया सबकुछ सामान्य हो गया। रोजा रखकर सरकारी कार्य करने व छात्र-छात्राओं के बीच कुछ समय गुजर जाता है। इस दौरान रोजा रखने का एहसास ही नहीं होता। इफ्तार के लिए जरूरी खाद्य सामग्री तैयार करने में परिवार के अन्य सदस्य भी पूरा सहयोग करते हैं। इससे इसमें कोई मुश्किल नहीं होती।

- रजिया, प्रधानाध्यापिका, प्राथमिक विद्यालय अधासी

केस टू

रमजान माह की शुरुआत में रोजा व कामकाज के बीच सामंजस्य बैठाने में कुछ मुश्किल हुई थी। हालांकि धीरे धीरे सबकुछ ठीक हो गया। अब पता ही नहीं चलता। दोपहर तक स्कूल में छात्र-छात्राओं के साथ समय व्यतीत हो जाता है। इसके बाद घर पहुंचकर कुछ देर आराम करते हैं। इसके बाद इबादत का दौर शुरू हो जाता है। शाम पांच इफ्तार के लिए सामान तैयार करते हैं। वैसे तो इफ्तार करने के दौरान नीबू शर्बत का अधिक प्रयोग करती हूं। इसके अलावा पकौड़ी, लच्छा, पापड़, ब्रेड पकौड़ा, मटर चाट भी थोड़ा थोड़ा खाते हैं। ताकत के लिए अनार जूस का प्रयोग करते हैं।

- रिजवाना, सरकारी शिक्षिका

केस थ्री

रोजा रखने से दिनचर्या में परिवर्तन आया है। विद्यालय में शिक्षण कार्य करने के बाद कम से कम दो घंटा सोते हैं। शाम में परिवार के सदस्यों के सहयोग से इफ्तार की व्यवस्था करते हैं। सुबह से दोपहर तक का समय तो छात्र-छात्राओं के बीच व्यतीत हो जाता है, लेकिन इसके बाद का समय व्यतीत करने में मुश्किल होती है। शुरुआत में तो अधिक परेशानी थी, लेकिन अब नहीं होती। इफ्तार में मसालेदार व तेलीय खाद्य पदार्थ का कम प्रयोग करते हैं। उसके स्थान पर फल का प्रयोग करते हैं।

- हुदैबिया रहमान, सरकारी शिक्षिका

केस फोर

रमजान माह की शुरुआत में रोजा व कामकाज के बीच सामंजस्य बैठाने में कुछ मुश्किल हुई थी। हालांकि धीरे धीरे सबकुछ ठीक हो गया। अब पता ही नहीं चलता। दोपहर तक स्कूल में छात्र-छात्राओं के साथ समय व्यतीत हो जाता है। इसके बाद घर पहुंचकर कुछ देर आराम करते हैं। इसके बाद इबादत का दौर शुरू हो जाता है। शाम पांच इफ्तार के लिए सामान तैयार करते हैं। इसमें परिवारीजनों का पूरा सहयोग रहता है। एनर्जी के लिए अनार व बेल का जूस प्रयोग करते हैं।

- शबेनूर, शिक्षिका

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  • Web Title:Women engaged in harmony with religion