
यमुना नदी के संरक्षण को मिलेगी मजबूती, कछुओं के संवर्धन के लिए बनेगी हेचरी
Auraiya News - जल्द ही यमुना नदी के किनारे कछुओं के संरक्षण के लिए एक हेचरी स्थापित की जाएगी। जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने इसकी स्वीकृति दी। उन्होंने किसानों को कछुओं के अंडों की सुरक्षा के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए। बैठक में वृक्षारोपण और प्लास्टिक जब्ती अभियानों के बारे में भी चर्चा हुई।
जिले में कछुओं के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए जल्द ही यमुना नदी के किनारे कछुआ हेचरी स्थापित की जाएगी। मानस सभागार में आयोजित जिला गंगा समिति, जिला वृक्षारोपण समिति और जिला पर्यावरण समिति की संयुक्त बैठक में यह निर्णय लिया गया। जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने हेचरी निर्माण के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। जिलाधिकारी ने कहा कि यमुना नदी को स्वच्छ और जैव विविधता से समृद्ध बनाने में कछुए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए इनके संरक्षण के लिए संगठित प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि नदी किनारे रहने वाले किसानों के साथ बैठक कर उन्हें जागरूक किया जाए कि खेती करते समय यदि कछुओं के अंडे मिलें तो उन्हें सुरक्षित रखा जाए और तुरंत वन विभाग को सूचना दी जाए, ताकि हैचिंग और संरक्षण की प्रक्रिया जारी रखी जा सके।
बैठक में मौजूद वाइल्डलाइफ विशेषज्ञों की मौजूदगी में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के प्रतिनिधियों को हेचरी बनाने की अनुमति प्रदान की गई। बैठक के दौरान वृक्षारोपण समिति द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए प्राप्त लक्ष्य प्रस्तुत किया गया। इस पर डीएम ने निर्देश दिए कि आगामी वृक्षारोपण कार्यक्रम को महोत्सव की तरह आयोजित किया जाए और पहले से स्थानों का चिन्हांकन कर समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए। वहीं जिला पर्यावरण समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने प्लास्टिक जब्ती अभियान को और तेज करने के आदेश दिए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी संत कुमार, प्रभागीय वनाधिकारी सीपी सिंह, जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र कुमार वर्मा, जिला विद्यालय निरीक्षक प्रदीप कुमार, जिला परियोजना अधिकारी नमामि गंगे और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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