
सर्दी में बढ़े प्रदूषण से खांसी-जुकाम के मरीजों में उछाल
Auraiya News - अछल्दा क्षेत्र में ठंडी हवाओं और प्रदूषण के कारण सर्दी से संबंधित श्वसन रोगों में वृद्धि हुई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रोजाना लगभग 200 मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे शामिल हैं। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि अगर खांसी या सांस लेने में दिक्कत हो, तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लें।
अछल्दा क्षेत्र में ठंडी हवाओं के साथ हवा में मौजूद धूल-धुआं और तापमान में तेज उतार-चढ़ाव के चलते सर्दी से जुड़ी श्वसन संबंधी बीमारियों में अचानक वृद्धि दर्ज की जा रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी की ओपीडी में इन दिनों रोजाना लगभग 200 मरीज पहुंच रहे हैं। जिनमें अधिकांश महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे हैं। मरीजों की शिकायतें सामान्यत: लगातार खांसी, नाक बहना, गले में खराश, छींकें और श्वास में तकलीफ की रही हैं। सीएचसी प्रभारी डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि पिछले सप्ताह से खांसी-जुकाम और एलर्जी के मामलों में स्पष्ट उछाल दिख रहा है। मौसम और प्रदूषण के समन्वय से वायरल संक्रमण का प्रसार बढ़ा है।

यदि प्रदूषण का स्तर इसी तरह बना रहा तो आने वाले दिनों में और अधिक लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं। डॉ. जितेंद्र ने यह भी चेतावनी दी कि हल्की-सी लापरवाही से सामान्य खांसी अस्थमा अटैक में बदल सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान लक्षणों का प्रमुख कारण वायु में सूक्ष्म कणों, धुआं, स्थानीय जलभराव व ठण्डे-गरम मौसम का अचानक बदलाव है। कई मरीजों ने बताया कि वे सुबह-शाम घर से बाहर निकलने पर गम्भीर असहजता महसूस करते हैं, क्योंकि इन समय प्रदूषण का स्तर अधिक होता है। सीएचसी में आने वाले रोगियों में कुछ को पांच से सात दिन तक लगातार खांसी की शिकायत रह रही है, जिससे उनकी निंद्रा और कामकाजी क्षमता प्रभावित हो रही है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि समय पर जांच-इलाज बेहद जरूरी है। श्वसन विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि खांसी-जुकाम के शुरुआती संकेत दिखते ही डॉक्टर से परामर्श लें, घरेलू नुस्खों के बजाय चिकित्सकीय सलाह पर दवा और एंटी रैबीज/वायरल-रिलेटेड उपचार लें। डॉ. जितेंद्र कुमार ने सुझाव दिया: लोग सुबह-शाम अनावश्यक बाहर न निकलें, बाहर निकलते समय नाक-मुंह कपड़े या मास्क से ढकें, दिन में गर्म पानी पिएं और ठंडे पेय पदार्थों से बचें। यदि खांसी सात दिन से अधिक बनी रहे या सांस फूलने लगे तो तुरंत अस्पताल आएं। सीएचसी स्टाफ ने कहा कि अस्पताल ने अतिरिक्त मेडिकल स्टाफ व दवाइयों की व्यवस्था कर ली है, परन्तु यदि मरीजों की संख्या और बढ़ी तो संसाधनों पर दबाव बन सकता है। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने नगर निकायों को धूल-धुआं नियंत्रित करने, सड़कों पर पानी छिड़कने तथा खुले स्थानों पर बचाव उपाय तेज करने के निर्देश दिए हैं।

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