
नवजात पुनर्जीवन की बेसिक तकनीक की गई जानकारी
Auraiya News - पुण्यश्लोका लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर चिकित्सा महाविद्यालय, औरैया में नवजात पुनर्जीवन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नवजात शिशुओं की देखभाल और आपात स्थिति में पुनर्जीवन तकनीकों की जानकारी देना था। प्रशिक्षकों ने बताया कि हर स्वास्थ्यकर्मी को इन तकनीकों को सीखना आवश्यक है।
पुण्यश्लोका लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, औरैया में गुरुवार को नवजात पुनर्जीवन ट्रेनिंग प्रोग्राम का सफल आयोजन किया गया। प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश वीर सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य नवजात शिशुओं की देखभाल एवं आपात स्थिति में पुनर्जीवन की तकनीकों की जानकारी देना था। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नेहा गुप्ता ने बताया कि नवजात पुनर्जीवन एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसे हर स्वास्थ्यकर्मी को सीखना आवश्यक है। इससे नवजात शिशुओं के जीवन की रक्षा में मदद मिलती है और शिशु मृत्यु दर को कम करने में भी यह प्रशिक्षण अहम भूमिका निभाता है। कार्यक्रम में प्रशिक्षक के रूप में राजकीय मेडिकल कॉलेज बुलंदशहर के सहायक प्राचार्य डॉ. ब्रजेन्द्र सिंह और राजकीय मेडिकल कॉलेज जालौन के सहायक आचार्य डॉ. संतोष कुमार लोधी शामिल हुए।
दोनों विशेषज्ञों ने बताया कि जन्म के तुरंत बाद यदि शिशु को सांस लेने में दिक्कत होती है, तो तत्काल और प्रभावी हस्तक्षेप उसके जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय कर सकता है। इसलिए हर चिकित्सक, रेजिडेंट डॉक्टर, स्टाफ नर्स और स्वास्थ्यकर्मी को इस प्रक्रिया में प्रशिक्षित होना चाहिए। कार्यक्रम में प्रतिभागियों को नवजात पुनर्जीवन की बेसिक तकनीक, ऑक्सीजन सपोर्ट, वेंटिलेशन, सीपीआर प्रक्रिया और आवश्यक उपकरणों के सही उपयोग की जानकारी दी गई। कार्यक्रम को सफल बनाने में बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नेहा गुप्ता एवं डॉ. रंजीत सिंह कुशवाह का विशेष योगदान रहा। प्रशिक्षण सत्र में मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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