रमज़ान रहमत, बरकत और मग़फिरत का मुबारक महीना: मौलाना अल्तमश चिश्ती

Feb 28, 2026 06:27 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, औरैया
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Auraiya News - पवित्र रमज़ान माह इस्लाम में रहमत और बरकत का महीना है। इस दौरान रोज़ेदार सहरी से इफ्तार तक रोज़ा रखते हैं और तरावीह की नमाज़ अदा की जाती है। मौलाना अल्तमश चिश्ती ने रमज़ान की फज़ीलत को बताते हुए कहा कि यह आत्मशुद्धि और तौबा का समय है, जिसमें दान-पुण्य बढ़ता है और समाज में भलाई फैलती है।

रमज़ान रहमत, बरकत और मग़फिरत का मुबारक महीना: मौलाना अल्तमश चिश्ती

फफूंद, संवाददाता। पवित्र रमज़ान माह को इस्लाम में रहमत, बरकत और मग़फिरत का महीना माना गया है। नगर में इन दिनों इबादत, तिलावत और दुआओं का विशेष माहौल है। सहरी से इफ्तार तक रोज़ेदार सब्र और शुक्र के साथ रोज़ा रख रहे हैं, वहीं रातों को मस्जिदों में तरावीह की नमाज़ अदा की जा रही है। औरैया शहर स्थित जामा मस्जिद शाह जमाल के पेश इमाम मौलाना अल्तमश चिश्ती ने रमज़ान की फज़ीलत बयान करते हुए कहा कि यह वही महीना है जिसमें अल्लाह ने कुरआन शरीफ को नाज़िल फरमाया। उन्होंने कुरआन की आयत का हवाला देते हुए बताया कि ‘ऐ ईमान वालों! तुम पर रोज़े फर्ज़ किए गए, जैसे तुमसे पहले लोगों पर फर्ज़ किए गए थे, ताकि तुम तक़वा हासिल करो।’

(सूरह अल-बक़रह 2:183)। उन्होंने कहा कि रोज़ा केवल भूख-प्यास का नाम नहीं, बल्कि आत्मसंयम, परहेज़गारी और अल्लाह की आज्ञाकारिता का अभ्यास है। मौलाना ने बताया कि रमज़ान में कुरआन की तिलावत का विशेष महत्व है। मस्जिदों में तरावीह की नमाज़ में पूरा कुरआन सुनने और सुनाने की परंपरा इसी कारण है। हदीस का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जब रमज़ान आता है तो जन्नत के दरवाज़े खोल दिए जाते हैं और जहन्नम के दरवाज़े बंद कर दिए जाते हैं। (सहीह बुख़ारी, सहीह मुस्लिम)। उन्होंने एक अन्य हदीस का जिक्र करते हुए बताया कि ‘जिसने ईमान और सवाब की नीयत से रमज़ान के रोज़े रखे, उसके पिछले गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं। (सहीह बुख़ारी)। इससे स्पष्ट है कि यह महीना आत्मशुद्धि और तौबा का अवसर है। रमज़ान का एक महत्वपूर्ण पहलू ज़कात और सदक़ा भी है। रोज़ा इंसान को भूख-प्यास का एहसास कराकर जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील बनाता है। इसी कारण इस महीने में दान-पुण्य के कार्यों में बढ़ोतरी देखी जाती है। मौलाना अल्तमश चिश्ती ने बताया कि रमज़ान का दूसरा अशरह ‘मग़फिरत का अशरह’ शुरू हो चुका है। इस दौर में बंदों को इस्तिग़फार की कसरत करनी चाहिए और गुनाहों से सच्ची तौबा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि झूठ, ग़ीबत और बुराइयों से बचना ही रोज़े की असली रूह है। नगर में रमज़ान को लेकर उत्साह का माहौल है। लोग इबादत के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश भी दे रहे हैं। रमज़ान वास्तव में इंसान को अपने रब से जोड़ने और समाज में भलाई फैलाने का अवसर प्रदान करता है।

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